मध्य प्रदेश UCC: आदिवासियों को दायरे से बाहर क्यों रखा गया?

The CSR Journal Magazine
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। इस दौरान 21% से ज्यादा आदिवासी आबादी और घुमंतू समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा जा सकेगा। UCC विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए समान कानून लागू करेगा, जिसमें विवाह, तलाक, बहुविवाह, लिव-इन रिश्ते और संपत्ति अधिकार शामिल हैं। प्रदेश की मुस्लिम आबादी करीब 7% है, जबकि आदिवासी समुदाय की संख्या अधिक है। फिर भी, UCC के ड्राफ्ट में ये समुदाय शामिल नहीं हैं। इसके पीछे क्या कारण हैं? आइए समझते हैं।

आदिवासियों को UCC से बाहर करने की वजह

मध्य प्रदेश भारत में आदिवासी आबादी वाला सबसे बड़ा राज्य है। यहां की 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि आदिवासी समुदाय एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक अंग है। लेकिन, उन्हें UCC से बाहर रखने का मुख्य कारण उनकी गहरी सांस्कृतिक जड़ें हैं। जनजातीय समाज में पारिवारिक प्रथाएं ऐसे हैं जो अन्य धर्मों के कानूनों से भिन्न हैं। उदाहरण के लिए, दापा प्रथा में दूल्हे का परिवार दुल्हन के परिवार को दहेज देता है, जो कि दहेज प्रथा के खिलाफ है। इसी तरह कुछ अन्य प्रथाएं हैं जो UCC लागू होने पर खतरे में पड़ सकती हैं।

राजनीति बनाम सांस्कृतिक पहचान

यदि UCC को आदिवासियों पर लागू किया जाता, तो यह उनके सदियों पुरानी परंपराओं को प्रभावित कर सकता था। इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर विरोध उभरने की आशंका थी। संविधान भी अनुसूचित जनजातियों को उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करने में विशेष छूट देता है। इस टकराव को टालने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया कि वे आदिवासी मामलों में दखल नहीं देंगे। केंद्रीय गृह मंत्री ने भी संकेत दिया है कि असम के जनजातीय समुदायों को भी इस कानून से मुक्त रखा जाएगा।

MP का UCC ड्राफ्ट: क्या यह अलग है?

मध्य प्रदेश का UCC ड्राफ्ट उत्तराखंड मॉडल पर आधारित है और इसे सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली हाई लेवल कमेटी ने तैयार किया है। हालांकि, एमपी के ड्राफ्ट को आम लोगों के लिए सरल बनाया गया है। कानूनी जटिलताओं को कम करने के लिए, उत्तराधिकार से संबंधित 100 जटिल प्रावधानों को घटाकर 30 कर दिया गया है।

UCC लागू होने पर क्या बदलेगा?

यदि UCC कार्यान्वित होता है, तो समाज में कई परिवर्तन संभव होंगे। आदिवासियों को छोड़कर सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू होगा। विवाह और तलाक के नियम सभी के लिए समान होंगे। लिव-इन रिश्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, जिसका पालन न करने पर सजा का प्रावधान होगा। बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी और संपत्ति अधिकार बेटियों को भी संबंध में बराबर मिलेंगे।

UCC का सफर

भारत में गोवा ऐसा पहला राज्य है, जहां UCC पहले से लागू है। उत्तराखंड ने भी हाल ही में UCC बिल पास किया है, जबकि गुजरात ने इसे पारित किया है। अब मध्य प्रदेश इसी कड़ी में अगला राज्य बनेगा। UCC का मुख्य उद्देश्य एक धर्मनिरपेक्ष नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित करना है। मध्य प्रदेश

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