सावधान! ITR भरने के बाद भी क्यों अटक सकता है आपका रिफंड? जानें ई-वैरीफिकेशन का नियम

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ITR Filing: करना न भूलें ये जरूरी काम, मिलेगा रिफंड का फायदा

आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना अनिवार्य है, क्योंकि इसके बिना आपका ITR अधूरा माना जाता है और आयकर विभाग आपके रिफंड को प्रोसेस नहीं करेगा।

ITR Filing Process शुरू, तैयार रहें!

देशभर में असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने की प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है। लाखों टैक्सपेयर्स अपने रिटर्न को समय पर भरने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं। यदि आप अपनी ITR फाइल करने के बाद कुछ जरूरी कार्य नहीं करते हैं, तो आपका रिफंड अटक सकता है। इसलिए, हर टैक्सpayer को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें आगे क्या करना है।

ई-वैरीफिकेशन का महत्व

ITR फाइल करने के बाद एक महत्वपूर्ण कदम है ई-वैरीफिकेशन। यह प्रक्रिया आपकी फाइल की गई रिटर्न की पुष्टि करने में मदद करती है। अगर आपने इसे पूरा नहीं किया, तो आपके द्वारा दाखिल किया गया रिटर्न अमान्य हो सकता है। यह प्रक्रिया सरल है और इसे ऑनलाइन किया जा सकता है। ई-वैरीफिकेशन के लिए आपको अपने मोबाइल नंबर या ई-मेल का उपयोग करना होगा।

क्या है प्रक्रिया?

ई-वैरीफिकेशन करने के लिए आपको अपने पोर्टल पर लॉगिन करना होगा और रिटर्न की स्थिति की जांच करनी होगी। इसके बाद, आपको वैरीफिकेशन के लिए विकल्प चुनना होगा। यह प्रक्रिया आपको एक OTP भेजेगी, जिसे आपको अपने पंजीकृत मोबाइल पर दर्ज करना होगा। इतना करने के बाद आपकी रिटर्न को सफलतापूर्वक वैरीफाई किया जाएगा।

समय की पाबंदी है जरूरी

आपको ध्यान रखना चाहिए कि ई-वैरीफिकेशन की समय सीमा है। यदि आप समय पर इसे पूरा नहीं करते हैं, तो आपकी रिटर्न को मान्यता नहीं मिलेगी और आपका रिफंड भी लटक सकता है। इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कर लेना फायदेमंद होगा। ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी है (पहले यह सीमा 120 दिन थी)। यदि आप 30 दिनों में वेरिफिकेशन नहीं करते हैं, तो आपका ITR ‘अमान्य’ (Invalid) माना जाएगा। इसका मतलब है कि विभाग यह मानेगा कि आपने रिटर्न फाइल ही नहीं किया है। बिना वेरिफिकेशन के आयकर विभाग आपके टैक्स डेटा की जांच शुरू नहीं करता, जिससे आपका रिफंड अटक जाता है। समय सीमा खत्म होने के बाद वेरिफिकेशन करने पर देर से फाइलिंग की फीस (लेट फीस) और ब्याज लग सकता है।

ई-वेरिफिकेशन करने के 5 आसान तरीके

आप आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके नीचे दिए गए किसी भी एक तरीके से अपना ITR तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं-
आधार ओटीपी (Aadhar OTP): आपके आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा, जिसे दर्ज करके तुरंत वेरिफिकेशन हो जाता है। (यह सबसे आसान तरीका है)
नेट बैंकिंग (Net Banking): अपने बैंक अकाउंट में लॉगिन करें, वहां ‘E-verify Return’ के विकल्प पर क्लिक करें, जो आपको सीधे टैक्स पोर्टल पर रीडायरेक्ट कर देगा।
बैंक खाता (Bank Account EVC): यदि आपका बैंक खाता प्री-वैलिडेट (Pre-validated) है, तो आप अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) मंगाकर वेरिफाई कर सकते हैं।
डीमैट खाता (Demat Account EVC): बैंक खाते की तरह ही, प्री-वैलिडेटेड डीमैट खाते के जरिए भी EVC जनरेट किया जा सकता है।
एटीएम (ATM): कुछ चुनिंदा बैंकों के एटीएम पर जाकर भी ‘Generate EVC for ITR Filing’ विकल्प का उपयोग किया जा सकता है।

ऑफलाइन विकल्प

यदि आप ऊपर दिए गए डिजिटल तरीकों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं, तो आप यह ऑफलाइन तरीका चुन सकते हैं। अपने ITR-V (एक्नॉलेजमेंट फॉर्म) का प्रिंटआउट लें और उस पर नीली स्याही से हस्ताक्षर करें। इस हस्ताक्षरित फॉर्म को ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर इस पते पर भेजें- ‘सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC), आयकर विभाग, बेंगलुरु – 560500’। ध्यान रहे कि इसे कूरियर से नहीं, केवल साधारण पोस्ट या स्पीड पोस्ट से ही भेजना है।

अपना रिफंड स्टेटस कैसे चेक करें?

आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं।यूजर आईडी (पैन नंबर) और पासवर्ड डालकर लॉगिन करें।’e-File’ > ‘Income Tax Returns’ > ‘View Filed Returns’ पर जाएं।वहां आपको दिख जाएगा कि आपका रिटर्न ‘Successfully e-Verified’ हुआ है या नहीं, और रिफंड की स्थिति क्या है।

रिफंड प्रोसेसिंग का तरीका

जब आप ITR फाइल करने के बाद ई-वैरीफाई करते हैं, तो इसके बाद आपकी रिटर्न को प्रोसेस किया जाता है। प्रोसेसिंग के बाद ही आपका रिफंड जारी किया जाएगा। यह रिफंड आपके बैंक खाते में सीधे क्रेडिट किया जाएगा। ऐसा तब होगा जब सब कुछ सही तरीके से किया गया हो। इसलिए, किसी भी तरह की चूक से बचें।

स्मार्ट टैक्सपेयर्स की सलाह

वो टैक्सpayer जो अपने रिटर्न को समय पर और सही तरीके से फाइल करते हैं, उनके लिए ई-वैरीफिकेशन एक और जरूरी चरण है। इसे अनदेखा करके आप खुद को परेशानी में डाल सकते हैं। कई लोग इस प्रक्रिया को आसान समझते हुए नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह आपकी वित्तीय स्थिति पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।

निष्कर्ष के बिना आगे बढ़ें

इसलिए, हर टैक्सपेयर को याद रखना चाहिए कि ITR फाइल करने के बाद ई-वैरीफिकेशन में चूक न करें। आपकी मेहनत का फल तभी मिलेगा जब सभी प्रक्रियाएँ सही तरीके से पूरी की जाएंगी। यह न केवल आपकी गैर-रिफंड प्रक्रिया को सरल बनाता है, बल्कि आपकी वित्तीय सुरक्षा को भी सुनिश्चित करता है।

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