रिटर्न AI ने भरा, तो नोटिस भी AI को भेजो! CA की पोस्ट ने बढ़ाई करदाताओं की धड़कनें

The CSR Journal Magazine

AI की मदद से भरा ITR, फिर आया इनकम टैक्स नोटिस!

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट ने वित्तीय दुनिया में नई बहस को जन्म दिया है। इस पोस्ट में बताया गया कि एक व्यक्ति ने AI की मदद से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरा था, लेकिन बाद में उसे इनकम टैक्स नोटिस मिला। इस घटना ने टैक्स फाइलिंग में AI के उपयोग पर कई सवाल उठा दिए हैं। क्या AI तकनीक पर भरोसा किया जा सकता है? क्या यह हानिकारक हो सकता है?

चार्टर्ड अकाउंटेंट की पोस्ट ने मचाई हलचल

AI की मदद से आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करदाताओं को आयकर विभाग की ओर से धड़ाधड़ नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) की वायरल पोस्ट्स ने करदाताओं के बीच हलचल मचा दी है। दरअसल, असेसमेंट ईयर 2026-27 के टैक्स सीजन में कई कामकाजी पेशेवरों ने सीए की फीस बचाने और झंझट से बचने के लिए ‘एंथ्रोपिक क्लाउड’ (Claude AI), ChatGPT और जेमिनी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर अपना ITR-1 फाइल कर दिया था। शुरुआती उत्साह के बाद अब बड़ी संख्या में इन करदाताओं को डेटा विसंगतियों और अधूरी जानकारी के कारण आयकर नोटिस का सामना करना पड़ रहा है।

CA की पोस्ट से हुआ खुलासा: क्या था पूरा मामला?

सोशल मीडिया पर सीए और टैक्स विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए वीडियो और पोस्ट्स में एक खास पैटर्न सामने आया है। करदाता ‘राकेश’ (काल्पनिक नाम) का उदाहरण देते हुए एक सीए ने बताया कि कैसे लोग सिर्फ फॉर्म 16 को AI में अपलोड कर अपना रिटर्न प्रोसेस कर रहे हैं। जब ऐसे करदाताओं को विभाग से नोटिस मिले, तो वे मदद के लिए वापस चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पास भाग रहे हैं।विशेषज्ञों ने तंज कसते हुए कहा, “जब रिटर्न AI की मदद से भरा था, तो नोटिस भी समाधान के लिए एआई को ही फॉरवर्ड कर देना चाहिए था।” इस व्यंग्य ने इंटरनेट पर हलचल पैदा कर दी और लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया कि टैक्स जैसे संवेदनशील वित्तीय मामलों में बिना मानवीय विशेषज्ञता के तकनीक पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है।

क्यों फेल साबित हो रहे हैं सामान्य AI टूल्स?

टैक्स कंसल्टेंट्स और वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य उद्देश्य वाले एआई चैटबॉट्स से ITR फाइल करने में निम्नलिखित बड़ी कमियां सामने आ रही हैं-
अधूरी वित्तीय जानकारी: एआई केवल उतनी ही जानकारी प्रोसेस कर सकता है जितनी उसे फॉर्म 16 या एआईएस (AIS) के जरिए दी जाती है।
जटिल आय को समझने में असमर्थ: यदि किसी करदाता के पास एक से अधिक बैंक खाते हैं, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ब्याज है, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन्स है, या फिर क्रिप्टो और रेंटल इनकम है, तो एआई इसे सही ढंग से कैलकुलेट नहीं कर पाता।
फिक्स्ड कैलकुलेशन फ्रेमवर्क का अभाव: दिल्ली और रांची के स्वतंत्र सीए के अनुसार, ये सामान्य एआई टूल्स भाषा-आधारित (Generative AI) मॉडल हैं, जो भारत के जटिल टैक्स फ्रेमवर्क और न्यायशास्त्र के लिए डिजाइन नहीं किए गए हैं। एक ही डेटा को दोबारा डालने पर ये अलग-अलग गणनाएं दिखा सकते हैं।
डेटा गोपनीयता (Data Privacy) का खतरा: निजी वित्तीय दस्तावेजों और पैन (PAN) जैसी संवेदनशील जानकारियों को पब्लिक एआई प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करने से डेटा लीक होने का गंभीर खतरा बना रहता है।

विभाग का अपना AI भी है बेहद सख्त

एक तरफ जहां करदाता रिटर्न भरने के लिए AI की मदद ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आयकर विभाग भी ITR की स्क्रूटनी के लिए एडवांस एआई और मशीन लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है। विभाग का AI सिस्टम करदाताओं के रिटर्न की तुलना उनके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्स इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (TIS) और फॉर्म 26AS से सेकंडों में कर लेता है। यदि करदाता ने एआई के चक्कर में बचत खाते के ब्याज, एफडी ब्याज, या नौकरी बदलने के कारण दोनों नियोक्ताओं की सैलरी को ठीक से नहीं जोड़ा है, तो विभाग का एआई सिस्टम तुरंत उस विसंगति को पकड़कर ऑटोमेटेड नोटिस जारी कर देता है।

नोटिस आने पर करदाता अब क्या करें?

यदि आपने भी किसी एआई टूल की मदद से आईटीआर दाखिल किया था और अब नोटिस आ गया है, तो घबराने के बजाय इन कदमों का पालन करें-
नोटिस को ध्यान से पढ़ें: सबसे पहले देखें कि नोटिस किस धारा (जैसे 143(1), 139(9) आदि) के तहत और किस वित्तीय वर्ष के लिए आया है।
DIN नंबर की जांच करें: आयकर विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर नोटिस के डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) को सत्यापित करें।
AIS और TIS से मिलान करें: अपने पोर्टल से एआईएस डाउनलोड करें और देखें कि एआई से रिटर्न भरते समय कौन सी आय छूट गई थी।
संशोधित रिटर्न (Revised ITR) दाखिल करें: यदि गलती पकड़ी जाती है, तो अपनी भूल को सुधारते हुए धारा 139(5) के तहत संशोधित रिटर्न दाखिल करें।
विशेषज्ञ की सलाह लें: आगे किसी भी जुर्माने या कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से संपर्क करें और उनके माध्यम से ही नोटिस का आधिकारिक जवाब सबमिट करें।

न बनें तकनीक के गुलाम

 तकनीक सहायता के लिए बेहतर है, लेकिन टैक्स जैसे जटिल और कानूनी अनुपालन वाले मामलों में इसे अंतिम विकल्प मानना ‘वित्तीय आत्महत्या’ जैसा हो सकता है। सरकार ने स्वयं करदाताओं की सामान्य उलझनों के लिए आधिकारिक पोर्टल पर ‘कर साथी’ (Kar Saathi) AI चैटबॉट लॉन्च किया है, लेकिन अंतिम फाइलिंग हमेशा मानवीय देखरेख और विशेषज्ञता के साथ ही की जानी चाहिए।

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