AI नियंत्रण पर सरकार का बड़ा कदम: डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिए आएगा नया कानून

The CSR Journal Magazine

AI की बढ़ती ताकत: सरकार जल्द लाएगी नया कानून!

भारत सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रसार को नियंत्रित करने, डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने और उपयोगकर्ता गोपनीयता की रक्षा करने के लिए एक व्यापक standalone AI Act लाने की दिशा में काम कर रही है। इस आगामी कानून के मसौदे में ‘उच्च जोखिम वाले AI सिस्टम्स’, एल्गोरिथम पारदर्शिता, और दुरुपयोग रोकने के लिए एक National Artificial Intelligence Technology Regulatory Authority के गठन का प्रस्ताव है। वर्तमान में, डेटा गोपनीयता और AI के प्रशिक्षण (Training) को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के माध्यम से नियंत्रित किया जा रहा है।

AI पर नजर रखने की तैयारी

डीपफेक और मिसलेबलिंग जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए, सरकार अब AI के प्रयोग पर सख्त कदम उठाने जा रही है। IT सेक्रेटरी ने हाल ही में इस मुद्दे पर बात की और बताया कि तकनीक का बढ़ता हुआ प्रभाव चिंताजनक है। इस व्यापक कानून के अलावा, भारत सरकार ने तकनीकी रूप से कृत्रिम रूप से उत्पन्न जानकारी (Synthetically Generated Information – SGI) जैसे कि डीपफेक और भ्रामक मीडिया से निपटने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में सख्त संशोधन लागू किए हैं।

नए कानून की आवश्यकता

सरकार का मानना है कि AI के उपयोग में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। IT सेक्रेटरी ने कहा है कि अब समय आ गया है कि AI के समुचित प्रयोग के लिए नए नियमों पर काम शुरू किया जाए। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके। सरकार ने संकेत दिए हैं कि AI पर निगरानी रखने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। AI की ताकत अत्यधिक बढ़ गई है, और इसके दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ रहा है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, नए कानून का निर्माण जरूरी हो गया है।

क्या करेगा नया कानून?

नया कानून AI के कई पहलुओं को कवर करेगा, जिसमें डेटा सुरक्षा, उपयोगकर्ता गोपनीयता और एथिक्स शामिल हैं। इससे लोगों को AI के उपयोग के दौरान किसी भी प्रकार के खतरे से बचाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, सोशल प्लेटफॉर्म्स पर गलत सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए भी उपाय किए जाएंगे। नए नियमों के तहत-
लेबलिंग अनिवार्य: सभी AI-जनित या हेरफेर की गई सामग्री (जो वास्तविक प्रतीत होती है) पर ‘Synthetically Generated’ का स्पष्ट लेबल या मेटाडेटा लगाना अनिवार्य है।
तेज शिकायत निवारण: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक या अवैध AI सामग्री को 3 घंटे के भीतर हटाना होगा (गैर-सहमति वाले अंतरंग वीडियो के मामले में यह समय-सीमा 2 घंटे है)।
सख्त डेटा संग्रह: DPDP अधिनियम 2023 स्पष्ट रूप से उपयोगकर्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) को प्रशिक्षित करने के लिए व्यक्तिगत डेटा के उपयोग पर रोक लगाता है।

IT Rules 2026 द्वारा AI-जनित सामग्री पर लगाए गए प्रतिबंध

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा अधिसूचित सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) नियम, 2026 भारत में AI-जनित सामग्री (Deepfakes) और ऑनलाइन दुष्प्रचार को रोकने के लिए एक बेहद सख्त विनियामक ढांचा है। यह कानून डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए कई कड़े प्रतिबंध और नियम लागू करता है। IT Rules 2026 के तहत AI-जनित सामग्री पर लगाए गए प्रतिबंधों और प्रावधानों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है-

1. ‘सिंथेटिक मीडिया’ (SGI) की आधिकारिक परिभाषा

नियमों के तहत पहली बार कृत्रिम रूप से उत्पन्न जानकारी (Synthetically Generated Information – SGI) को कानूनी रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें ऐसा कोई भी ऑडियो, वीडियो, टेक्स्ट या इमेज शामिल है जिसे एल्गोरिदम या AI टूल के माध्यम से इस तरह बनाया या बदला गया हो कि वह बिल्कुल वास्तविक (Indistinguishable) प्रतीत हो। स्मार्टफोन कैमरा द्वारा की जाने वाली बुनियादी ऑटो-एडिटिंग या सामान्य फिल्टर संपादन को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।

2. सामग्री हटाने की समय-सीमा में भारी कटौती (

अवैध और भ्रामक AI सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए टेकडाउन की समय-सीमा को नाटकीय रूप से घटा दिया गया है। यदि कोई अदालत या अधिकृत सरकारी एजेंसी किसी AI-जनित सामग्री को अवैध, भ्रामक या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरनाक घोषित करती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।

2-घंटे का नियम (2-Hour Rule)

किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाली गैर-सहमति वाली कृत्रिम अश्लीलता (Non-Consensual Deepfakes/NCII) की रिपोर्ट मिलने पर प्लेटफॉर्म को उसे केवल 2 घंटे के भीतर ब्लॉक या डिलीट करना अनिवार्य है।

3. अनिवार्य AI लेबलिंग और वॉटरमार्किंग

कानूनी रूप से अनुमत सिंथेटिक सामग्री का उपयोग पारदर्शी होना चाहिए। सभी AI-जनित छवियों और वीडियो पर स्पष्ट रूप से “Synthetically Generated” या “AI Generated” का दृश्य लेबल होना चाहिए जो स्क्रीन के कम से कम 10% हिस्से को कवर करता हो। यदि आवाज AI द्वारा क्लोन या जनरेट की गई है, तो ऑडियो की शुरुआत के पहले 10% समय में इसका खुलासा करना अनिवार्य है। सामग्री के डिजिटल ओरिजिन को ट्रैक करने के लिए इसमें ओरिजिनल मेटाडेटा (Provenance) एम्बेड होना चाहिए, जिसे हटाया या बदला नहीं जा सकता।

4. प्लेटफॉर्म और क्रिएटर्स के लिए कड़े नियम

बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (SSMIs) को उपयोगकर्ताओं से सामग्री अपलोड करने से पहले यह घोषणा लेनी होगी कि क्या सामग्री AI-जनित है। मध्यस्थों को हर तीन महीने में कम से कम एक बार अपने उपयोगकर्ताओं को अवैध SGI बनाने और शेयर करने के कानूनी परिणामों के बारे में चेतावनी देनी होगी।

5. ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) सुरक्षा की समाप्ति

यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स आदि) इन नियमों का पालन करने में विफल रहता है या निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रतिबंधित डीपफेक सामग्री को नहीं हटाता है, तो वह IT अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ (कानूनी सुरक्षा कवच) को खो देगा। सुरक्षा कवच हटने के बाद, प्लेटफॉर्म को उस अवैध सामग्री के लिए तीसरे पक्ष (Third Party) के बजाय सीधे तौर पर दोषी माना जा सकता है और उस पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है।

6. शिकायत निवारण में तेजी

AI और डीपफेक से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए प्लेटफॉर्मों के शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal) को अधिकतम 7 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा।

खुद को सही दिशा में ले जाएगा देश

IT सेक्रेटरी का यह कहना है कि नए कानून के माध्यम से देश खुद को सही दिशा में ले जा सकेगा। AI का लाभ उठाना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही जिम्मेदारी का भी ध्यान रखना होगा। इस दिशा में उठाए गए कदम तकनीक की प्रगति के साथ जुड़े नीतिगत बदलावों की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

सबसे पहले किस पर सरकार ध्यान देगी?

सरकार ने पहले ही डीपफेक और मिसलेबलिंग जैसे मामलों पर नियम सख्त करने का निर्णय लिया है। अब AI के अन्य पहलुओं को भी देखने का प्रावधान है, ताकि आम जन जीवन में कोई परेशानी न आए। इस विषय पर सभी प्रमुख विभागों के साथ चर्चा की जाएगी।

सख्त कदम उठाने की आवश्यकता

AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, स्वच्छ और सुरक्षित तकनीकी वातावरण सुनिश्चित करना हर किसी के हित में है। इसलिए नया कानून लाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। सरकार इसे प्राथमिकता दे रही है ताकि लोगों को जल्द ही राहत मिले।

क्या होगा अगला कदम?

अगला कदम कानून का प्रारूप तैयार करना होगा, जिसे जल्द ही संबंधित मंत्रियों द्वारा मंजूरी दी जाएगी। इस प्रक्रिया में सभी प्रमुख हितधारकों की भी राय ली जाएगी। इसके अतिरिक्त, न्यायपालिका में AI के उपयोग को विनियमित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने ‘Regulations for Use of Artificial Intelligence (AI) in Courts, 2026’ का मसौदा तैयार किया है।

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