ग्रीन मुंबई समिट 2026’ का तीसरा संस्करण 11 सितंबर को मुंबई में, ‘नेट जीरो’ और टिकाऊ शहरों के निर्माण पर होगा मंथन
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को वर्ष 2040 तक नेट-जीरो (Net Zero), जलवायु-अनुकूल (Resilient) और रहने योग्य (Livable) महानगर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) द्वारा ग्रीन मुंबई समिट 2026 के तीसरे संस्करण का आयोजन 11 सितंबर 2026 को मुंबई के ताज प्रेसिडेंट होटल में किया जाएगा। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “Mumbai 2040: Shaping a Net Zero, Resilient and Livable Future” रखी गई है, जिसका उद्देश्य मुंबई के सतत शहरी विकास के लिए सरकार, उद्योग, विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा मंच पर लाना है।
विशेषज्ञों की विस्तृत चर्चा
सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलने वाले इस एक दिवसीय सम्मेलन में नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, पर्यावरण विशेषज्ञ, वास्तुकार, रियल एस्टेट डेवलपर, शहरी योजनाकार, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि तथा नई तकनीकों पर कार्य कर रहे नवाचारकर्ता (Innovators) भाग लेंगे। सम्मेलन के माध्यम से मुंबई के भविष्य को हरित, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा होगी।
मुंबई 2040 की परिकल्पना को साकार करने का प्रयास
मुंबई देश का सबसे बड़ा आर्थिक और वित्तीय केंद्र होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले महानगरों में भी शामिल है। समुद्र का बढ़ता जलस्तर, अत्यधिक वर्षा, शहरी बाढ़, हीट वेव, वायु प्रदूषण, कचरा प्रबंधन और तेजी से बढ़ती आबादी जैसी चुनौतियों के बीच शहर के सतत विकास की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन मुंबई के लिए एक दीर्घकालिक विकास रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभी से पर्यावरण-अनुकूल शहरी विकास मॉडल अपनाए जाएं तो वर्ष 2040 तक मुंबई को कम कार्बन उत्सर्जन वाला, ऊर्जा दक्ष और बेहतर जीवन गुणवत्ता वाला शहर बनाया जा सकता है।
30 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ करेंगे विचार-विमर्श
समिट में भारत और विदेशों से 30 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ता शामिल होंगे। ये विशेषज्ञ ग्रीन बिल्डिंग, ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन, कचरा प्रबंधन, कार्बन उत्सर्जन में कमी, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी परिवहन और नई तकनीकों से जुड़े विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे। सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों, पैनल चर्चाओं और संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को नवीनतम वैश्विक रुझानों और सफल मॉडलों की जानकारी मिलेगी।
इन प्रमुख विषयों पर होगी चर्चा
ग्रीन मुंबई समिट 2026 में कई महत्वपूर्ण विषयों को केंद्र में रखा गया है—
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ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण
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नेट-जीरो भवन (Net Zero Buildings)
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सर्कुलर इकोनॉमी और संसाधनों का पुनः उपयोग
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सतत शहरी विकास
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जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियां
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हरित वित्तपोषण (Green Finance)
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स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता
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स्मार्ट शहर और डिजिटल तकनीक
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जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन
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कचरा प्रबंधन और रीसाइक्लिंग
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सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP)
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जलवायु जोखिमों से शहरों की सुरक्षा
हरित भवनों की भूमिका होगी अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में ऊर्जा की कुल खपत का बड़ा हिस्सा भवन क्षेत्र से आता है। ऐसे में ग्रीन बिल्डिंग तकनीकों को अपनाकर बिजली और पानी की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। सम्मेलन में ऐसे भवनों की डिजाइन, निर्माण सामग्री, ऊर्जा दक्ष तकनीकों और कार्बन उत्सर्जन कम करने वाले उपायों पर विस्तार से चर्चा होगी।
सर्कुलर इकोनॉमी पर विशेष फोकस
सम्मेलन में “सर्कुलर इकोनॉमी” यानी ऐसी अर्थव्यवस्था पर भी विशेष जोर रहेगा जिसमें संसाधनों का अधिकतम पुनः उपयोग किया जाए तथा कचरे को न्यूनतम किया जाए। विशेषज्ञ बताएंगे कि निर्माण क्षेत्र, उद्योग और शहरी प्रशासन किस प्रकार पुनर्चक्रण (Recycling), पुनः उपयोग (Reuse) और संसाधन दक्षता के माध्यम से पर्यावरणीय दबाव को कम कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ साझा रणनीति
मुंबई हर वर्ष भारी वर्षा, जलभराव और समुद्री तटीय जोखिमों का सामना करता है। ऐसे में सम्मेलन में यह भी चर्चा होगी कि भविष्य के शहरों को किस प्रकार जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सक्षम (Climate Resilient) बनाया जाए।विशेषज्ञ बाढ़ नियंत्रण, हरित क्षेत्रों के विस्तार, प्राकृतिक जल निकासी तंत्र के संरक्षण, मैंग्रोव सुरक्षा, वर्षा जल संचयन और जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन जैसे उपायों पर अपने सुझाव देंगे।
तकनीक और नवाचार पर रहेगा जोर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), डिजिटल ट्विन, स्मार्ट सेंसर, ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली और डेटा आधारित शहरी नियोजन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा होगी। इन तकनीकों के माध्यम से शहरों में ऊर्जा की बचत, ट्रैफिक प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
हरित वित्तपोषण बनेगा प्रमुख मुद्दा
सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्त की उपलब्धता भी सम्मेलन का महत्वपूर्ण विषय होगी। ग्रीन बॉन्ड, जलवायु वित्त, ESG निवेश, सतत बैंकिंग और निजी क्षेत्र की भागीदारी जैसे विषयों पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे कि बड़े पैमाने पर हरित परियोजनाओं को आर्थिक रूप से कैसे सफल बनाया जा सकता है।
सहयोग से बनेगा भविष्य का मुंबई
सम्मेलन का मुख्य संदेश यह है कि केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। उद्योग, शैक्षणिक संस्थान, नगर निकाय, नागरिक समाज, निवेशक और आम नागरिक, सभी की भागीदारी से ही मुंबई को एक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सम्मेलन में विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने, ज्ञान साझा करने और भविष्य की संयुक्त कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा होगी।
प्रतिभागियों को मिलेंगे अनेक अवसर
सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को—
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राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलेगा।
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हरित निर्माण और शहरी विकास की नई तकनीकों की जानकारी मिलेगी।
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उद्योग जगत के वरिष्ठ नेताओं के साथ नेटवर्किंग का अवसर प्राप्त होगा।
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सतत विकास से जुड़े नवीन समाधानों और सफल परियोजनाओं को समझने का मौका मिलेगा।
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भविष्य की हरित परियोजनाओं में सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलेगा।
मुंबई के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?
मुंबई भारत की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से जूझने वाला प्रमुख तटीय महानगर भी है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, सीमित भूमि, बढ़ते प्रदूषण, कचरा प्रबंधन, ऊर्जा की बढ़ती मांग और चरम मौसम की घटनाओं को देखते हुए शहर के विकास के लिए टिकाऊ मॉडल अपनाना समय की आवश्यकता बन गया है।
मुंबई के हरित भविष्य की रूपरेखा तैयार करेगा IGBC ग्रीन मुंबई समिट 2026
ग्रीन मुंबई समिट 2026 ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब भारत वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुंबई जैसे महानगर हरित भवनों, स्वच्छ ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी और जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन को प्राथमिकता दें, तो न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि आर्थिक विकास और नागरिकों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। यह सम्मेलन नीति निर्माण, निवेश, तकनीक और जनभागीदारी को एक मंच पर लाकर मुंबई को वर्ष 2040 तक एक अधिक सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल, प्रतिस्पर्धी और रहने योग्य वैश्विक शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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