पंजाब के किसान क्यों नहीं कर पाए पक्का मोर्चा? हरियाणा सरकार ने दो गलतियों से बचकर रखी स्थिति काबू में

The CSR Journal Magazine
पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इसके बाद करीब 5 घंटे की उठापटक के बाद किसान नेताओं ने वार्ता के बाद यह घोषणा की कि वे अब दिल्ली नहीं जाएंगे। बैरिकेड लगने के कुछ समय बाद किसान शंभू बॉर्डर से लौटने लगे। हरियाणा पुलिस ने बैरिकेड्स हटाकर जालंधर-दिल्ली नेशनल हाईवे पर यातायात को भी सामान्य कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बार किसान पक्का मोर्चा लगाने में क्यों असफल रहे?

संवेदनशीलता से हल निकाला गया

हरियाणा सरकार ने पिछली बार की कुछ गलतियां नहीं दोहराईं। 2024 में किसानों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी। पुलिस ने लाउडस्पीकर से चेतावनी दी थी, जिससे किसान भड़क गए थे। इस बार, पुलिस ने तुरंत बातचीत का हाथ बढ़ाया। प्रशासनिक संवेदनशीलता ने किसानों को यह महसूस कराया कि उनकी बात सुनी जा रही है। इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया।

किसानों की मांगों पर त्वरित कार्रवाई

पिछली बार मांगों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल की कमी थी। इस बार हरियाणा सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी जब किसान नेताओं ने अपनी मांगें रखीं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सकारात्मक बयान देकर स्थिति को संवेदनशील बनाया। केंद्र से जुड़ी बैठक का वादा भी किया गया, जिससे किसानों ने अपनी स्थिति मजबूत की।

शंभू बॉर्डर पर पुलिस की चतुराई

हरियाणा सरकार ने किसानों के पहुंचने से पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी। किसानों के नेता जैसे ही शंभू बॉर्डर पर पहुंचे, अंबाला के एसपी ने उनसे वार्ता की। इस दौरान उन्हें भरोसा भी दिया गया कि कृषि मंत्री उनसे मिलने आएंगे। जबकि पुलिस की योजना यह थी कि किसानों को बढ़ने से रोका जाएगा। इस बार प्रशासन ने किसानों के साथ संवाद किया, जिससे स्थिति नियंत्रण में रही।

दिल्ली कूच का स्थगन

21 जुलाई को पंजाब के किसानों का दिल्ली कूच स्थगित हो गया। इस दौरान कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनने की वजह से किसान शंभू बॉर्डर से लौटने लगे। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी की रिहाई और शंभू-खनौरी बॉर्डर का खुल जाना उनके लिए राहत की बात रही। इस बीच पुलिस ने स्थिति को संभालकर उसकी गंभीरता को कम किया।

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