तेज़ी से बढ़ा इथेनॉल का ग्राफ़; 501 कंपनियों की चमकी किस्मत, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कारोबार

The CSR Journal Magazine

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच सरकार ने 501 इथेनॉल सप्लाई करने वाली कंपनियों का खजाना खोला!

भारत सरकार ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत देश की 501 पंजीकृत इथेनॉल निर्माता कंपनियों के लिए कमाई के बड़े रास्ते खोल दिए हैं, जिससे पिछले तीन वर्षों में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने इथेनॉल खरीद पर ₹1.72 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड खर्च किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में इसकी विस्तृत जानकारी साझा की है।

इथेनॉल के व्यापार का तेज़ी से बढ़ता ग्राफ

देश में पेट्रोल-डीजल की महंगाई के बीच, इथेनॉल का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में सरकार ने पहली बार 501 कंपनियों की सूची जारी की है, जो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को इथेनॉल की सप्लाई कर रही हैं। मात्र तीन साल में, इथेनॉल खरीद पर तेल कंपनियों का खर्च लगभग 1.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके परिणामस्वरूप नया उद्योग विकसित हो चुका है, जिसका सीधा लाभ कई कंपनियों को हो रहा है।

उत्पादन क्षमता और मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर टॉप 5 इथेनॉल उत्पादक कंपनियां

1. श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड (Shree Renuka Sugars Ltd)

यह स्थापित डिस्टिलरी क्षमता के मामले में भारत की सबसे बड़ी इथेनॉल उत्पादक कंपनी है। इसकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 1,250 KLPD (किलोलीटर प्रति दिन) है। यह विल्मार इंटरनेशनल समूह का हिस्सा है।

2. बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (Balrampur Chini Mills Ltd)

यह भारत की सबसे बड़ी और वित्तीय रूप से बेहद मजबूत एकीकृत चीनी और बायोफ्यूल कंपनियों में से एक है। उत्तर प्रदेश में इसके कई प्लांट हैं और इसकी इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 1,050 KLPD है।

3. E.I.D-पैरी इंडिया लिमिटेड (E.I.D. – Parry India Ltd)

दक्षिण भारत के मशहूर मुरुगप्पा ग्रुप की यह कंपनी देश के सबसे पुराने चीनी और डिस्टिलरी मैन्युफैक्चरर्स में से एक है। दक्षिण भारत (तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश) में फैले इसके प्लांट्स की इथेनॉल क्षमता लगभग 582 KLPD है।

4. त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Triveni Engineering & Industries Ltd)

यह चीनी, इथेनॉल और इंजीनियरिंग सेक्टर की एक दिग्गज लिस्टेड कंपनी है, जिसके प्लांट मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में हैं। इसकी वर्तमान क्षमता 520 KLPD है, जिसे कंपनी तेज़ी से बढ़ाकर 660 KLPD करने पर काम कर रही है।

5. प्राज इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Praj Industries Ltd)

यह सीधे इथेनॉल बेचने के बजाय इथेनॉल बनाने वाले प्लांट्स और उन्नत तकनीक (Bio-Refinery Technology) की सप्लाई करने वाली वैश्विक लीडर है। भारत की अधिकांश बड़ी इथेनॉल कंपनियां प्राज इंडस्ट्रीज की ही 1G और 2G (दूसरी पीढ़ी) इथेनॉल तकनीक का उपयोग करती हैं।

क्या इथेनॉल का बिजनेस सबसे अधिक फायदे में है?

इस नीति के तहत, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से कई कंपनियां मालामाल हो रही हैं। दस्तावेज़ों के मुताबिक, 16 जुलाई 2026 तक ये 501 कंपनियां इथेनॉल सप्लाई के लिए पंजीकृत हैं। इनमें चीनी मिलें, डिस्टिलरी, बायोफ्यूल निर्माता और कृषि आधारित उद्योग शामिल हैं। यह कार्यक्रम किसानों की आय में इजाफा, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और प्रदूषण में कमी के लिए महत्वपूर्ण है।

आर्थिक आंकड़ों की झलक

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सार्वजनिक तेल कंपनियों ने 2023-24 में ₹48,757 करोड़, 2024-25 में ₹73,996 करोड़ और 2025-26 के पहले छह महीनों में ₹49,577 करोड़ इथेनॉल खरीद पर खर्च किए हैं। यह दर्शाता है कि इथेनॉल का व्यापार काफी लाभकारी सिद्ध हो रहा है।

कौन सी कंपनियां हैं प्रमुख सप्लायर?

सरकार की सूची के अनुसार, इथेनॉल सप्लाई देने वाले में चीनी उद्योग और कृषि आधारित कंपनियों की संख्या सबसे अधिक है। कच्चा माल जैसे गन्ने का रस, बी-हेवी और सी-हेवी मोलासेस, और मक्का इथेनॉल के लिए उपयोग किया जा रहा है। यानि यह उद्योग पहले से चार-पांच सालों से अधिक संपन्न हो चुका है।

राज्यों का योगदान

501 कंपनियों की सूची में प्रमुखता से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की मौजूदगी है। उत्तर प्रदेश में बलरामपुर चीनी मिल्स, बजाज हिंदुस्तान शुगर, और धामपुर शुगर जैसी कंपनियाँ इस व्यवसाय में शामिल हैं।

इथेनॉल ब्लेंडिंग की शुरुआत

भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग की प्रक्रिया 1 जनवरी 2003 को शुरू हुई थी, जिसमें 5% इथेनॉल मिश्रण के साथ प्रयोग किया गया। धीरे-धीरे इसे बढ़ाया गया, और अब यह पूरे देश में 10% तक पहुंच चुका है। स्वच्छ ऊर्जा के प्रति बढ़ते रुझान को देखते हुए इस प्रक्रिया को और बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार को क्या मिल रहा है फायदा?

सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से कच्चे तेल का आयात कम होता है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है। साथ ही, किसानों को नए बाजार मिलते हैं और प्रदूषण में कमी आती है। इसलिए सरकार लगातार इस नीति को बढ़ावा देने में लगी हुई है।

क्या है सरकार की भावी योजना?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत का इथेनॉल मिश्रण प्रतिशत साल 2013-14 के महज 1.53% से बढ़कर अब 20% (E20) के स्तर पर आ चुका है। फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को 20% से अधिक बढ़ाने का कोई तुरंत निर्णय नहीं लिया गया है। आगे की किसी भी बढ़ोतरी से पहले पूरी तरह से वैज्ञानिक और तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने हाल ही में E22 से लेकर E30 (22% से 30% मिश्रण) वाले ईंधन पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (केंद्रीय उत्पाद शुल्क), एडिशनल एक्साइज ड्यूटी और रोड एवं इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को पूरी तरह से शून्य करने का भी नोटिफिकेशन जारी किया था, ताकि भविष्य में स्वच्छ ईंधन को और बढ़ावा मिल सके।

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