अल नीनो के कारण 10 राज्यों में अलर्ट जारी, खेती पर मौसम की दोहरी मार: खरीफ बुवाई की रफ्तार पड़ी धीमी
अल नीनो (El Niño) के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने देश के 9 से 10 राज्यों के लगभग 200 संवेदनशील जिलों में खरीफ फसलों के लिए अलर्ट जारी किया है। प्रशांत महासागर में सक्रिय हुई इस भौगोलिक घटना के कारण भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल मानसून की बारिश सामान्य से 10% कम (दीर्घकालिक औसत का 90%) रहने का अनुमान लगाया है। इससे खरीफ सत्र (Kharif 2026) की मुख्य फसलों पर संकट मंडरा रहा है और शुरुआती बुवाई की गति भी धीमी पड़ गई है।
किसानों के लिए चिंता का विषय
देश में इस बार अल नीनो का प्रभाव 9 से 10 राज्यों पर नजर आ रहा है। यह स्थिति खरीफ फसलों के उत्पादन पर गंभीर असर डाल सकती है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार, इस बार वर्षा में कमी आने की संभावना है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस स्थिति को समझते हुए तत्काल एक्शन लेने का फैसला किया है।
संकट का प्रभाव-कमजोर मानसून
जुलाई और अगस्त के मुख्य महीनों में मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में सूखा पड़ने की आशंका है। ओडिशा, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में मिट्टी की शुरुआती नमी काफी घट गई है। 5 जून 2026 तक देश में 72.5 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है, जो पिछले साल से 2 लाख हेक्टेयर कम है। कपास के रकबे में सबसे भारी गिरावट (9.72 लाख से घटकर 7.51 लाख हेक्टेयर) आई है।
सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली फसलें
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धान (चावल): यह फसल पूरी तरह मानसून और शुरुआती पानी पर निर्भर होती है; पूर्व के अल नीनो वर्षों में इसका उत्पादन 10% तक गिरा है।
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मक्का और तिलहन: पर्याप्त नमी न मिलने के कारण इनके उत्पादन पर गहरा दबाव रहने की चेतावनी दी गई है।
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दालें: वर्षा आधारित क्षेत्रों में बोई जाने वाली दालों पर अनियमित बारिश की मार पड़ने की सबसे ज्यादा संभावना है।

