करप्शन पर मृत्युदंड! जस्टिस श्रीधरन की वो 3 बातें जिसने सिस्टम को हिला दिया

The CSR Journal Magazine

करप्शन पर मृत्युदंड! जस्टिस श्रीधरन की 3 बड़ी बातें, कानून और भ्रष्टाचार के आंकड़े क्या कहते हैं?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि भ्रष्टाचारियों के लिए मृत्युदंड पर विचार किया जाना चाहिए। जस्टिस श्रीधरन का यह बयान तब आया जब उन्होंने यूपी में बुलडोजर एक्शन के संबंध में निर्णय सुनाया। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरूरत बताई।

राम मंदिर में चोरी ईमान का सबसे निचला स्तर

जस्टिस श्रीधरन ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के विवाद को “भारतीयों की ईमानदारी का सबसे निम्नतम स्तर” (Nadir of Indians’ Integrity) करार दिया। उन्होंने कहा कि जो समाज इस तरह के पवित्र स्थल पर हुई चोरी से भी नहीं आहत होता, उसे किसी बात से शर्मिंदा नहीं किया जा सकता। जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि जो लोग इस घटना पर भी चिंतित नहीं हैं, वे समाज में भ्रष्टाचार को स्वीकार कर चुके हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस तरह के भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने के लिए सजा के कड़े उपाय आवश्यक हैं।

भ्रष्टाचार का सामान्यीकरण (Normalisation)

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि एक औसत भारतीय ने भ्रष्टाचार को सामान्य मान लिया है। समाज में अब इसे तब तक गलत नहीं समझा जाता जब तक कि कोई रंगे हाथों पकड़ा न जाए। न्यायाधीश ने कहा कि यदि राज्य सरकार वास्तव में प्रशासनिक व्यवस्था को साफ करने और देश को बेईमानी के दलदल से निकालने के लिए गंभीर है, तो उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन करके दोषियों के लिए मृत्युदंड के प्रावधान पर विचार करना चाहिए।

क्या कहता है मौजूदा कानून

भारत में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए मुख्य कानून भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act, 1988) है। इस कानून के तहत विभिन्न अपराधों के लिए 3 वर्ष से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है, लेकिन इसमें मृत्युदंड का कोई नियम नहीं है।

वैश्विक सूचकांक (CPI 2025)

जस्टिस श्रीधरन ने अपने आदेश में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के ‘करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2025’ का हवाला दिया। इस रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 182 देशों में भारत 91वें स्थान पर है। भारत का स्कोर 100 में से केवल 39 है, जो पिछले 10 वर्षों से स्थिर है। यह दर्शाता है कि सामान्य जनता ने भ्रष्टाचार को स्वीकार कर लिया है और यह समाज को पंगु बना रहा है। जज ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस खराब रैंकिंग के बाद भी हमारे समाज में कोई सार्वजनिक गुस्सा या शर्म महसूस नहीं की जाती।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस बेलगाम भ्रष्टाचार को नहीं रोका गया, तो देश में अवैध धन कुछ ही हाथों में सिमट जाएगा। इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई इतनी बढ़ जाएगी कि आने वाले दिनों में देश असंतोष और नागरिक अशांति (Civil Unrest) की ओर बढ़ सकता है।

अवैध निर्माण और बुलडोजर जस्टिस

जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि अवैध निर्माण के मामले में तुरंत कार्रवाई करना मुख्य रूप से समाज की न्याय की प्यास को शांत करने का प्रयास है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बेईमान अधिकारियों के साथ मिलकर निर्माण करने वाले बिल्डर्स पर कड़ी निगरानी होनी चाहिए।

आंकड़े क्या दर्शाते हैं?

द हिंदू के एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश के 16 राज्यों में 7,407 घरों को बुलडोजर के माध्यम से ढहाया गया। इससे लगभग 41,085 लोग बेघर हो गए हैं। उत्तर प्रदेश में अकेले 30% मामले सामने आए हैं।

कानूनी पक्ष

एक हालिया फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी का घर तोड़ना असंवैधानिक है। यह मामला मानवाधिकारों का भी उल्लंघन है। कानून की अवहेलना अभी भी जारी है और अधिकारी इस मौके का फायदा उठाते हैं।

करप्शन का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

जस्टिस श्रीधरन ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार अब केवल नैतिक समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की प्रगति में एक बड़ी रुकावट बन चुका है। अधिकारियों की लापरवाही और व्यवस्थाओं की जटिलता के कारण आम जनता और व्यापारियों का शोषण बढ़ रहा है।

आंकड़े क्या इंगित करते हैं?

वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार के कारण हर साल देशों को अपनी जीडीपी का 5% गंवाना पड़ता है। भारत को भी अपने जीडीपी का 1% से 1.5% हिस्सा हर साल भ्रष्टाचार के कारण चुकाना पड़ता है।

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