बुवाई के बीच बोगस बीजों का खेल: ब्रांडेड पैकेट, नकली दाने और अन्नदाता पर दोहरी मार

The CSR Journal Magazine

यूपी से महाराष्ट्र तक…बुवाई के बीच नकली बीज का खेल, कैसे हो रही धांधली?

यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक खरीफ सीजन की बुवाई के बीच नकली और बोगस बीजों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जिसके कारण लाखों हेक्टेयर की फसल प्रभावित हुई है। इस गोरखधंधे में जालसाज कंपनियां और बिचौलिए मिलकर ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर घटिया और बिना अंकुरण क्षमता वाले बीजों को बाजार में खपा रहे हैं।

नकली बीजों का उभरता सच

खरीफ की बुवाई का मौसम जैसे ही आता है, नकली बीजों का धंधा तेजी से बढ़ता है। महाराष्ट्र के 18 जिलों में फसलों की हालत को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि इसमें इस्तेमाल किए गए बीज सही से अंकुरित नहीं हो रहे हैं। यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में भी ऐसे कई मामले प्रकाश में आए हैं। इस साल अल नीनो से बारिश 60 प्रतिशत कम होने का अनुमान है, जिससे किसानों पर अधिक दबाव पड़ सकता है। ऐसे में इस स्थिति का दोष किस पर आएगा, यह सवाल है।

ब्रांडेड पैकेटों की री-पैकेजिंग

जालसाज बाजार से खुले और बेहद साधारण अनाज (जैसे सामान्य सोयाबीन या कपास) को सस्ते दामों पर खरीदते हैं। इसके बाद नामी और प्रतिष्ठित कंपनियों के नकली रैपर, पैकेट और बारकोड तैयार कर उनमें इन खराब दानों को पैक कर दिया जाता है।

अंतरराज्यीय सप्लाई चेन

इसका नेटवर्क देशव्यापी है। उत्तर प्रदेश (जैसे जौनपुर, बाराबंकी), गुजरात और मध्य प्रदेश से घटिया बीजों को प्रोसेस और पैक करके महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे बड़े कृषि केंद्रों में धड़ल्ले से खपाया जाता है।

नकली लेबल और एक्सपायर्ड स्टॉक

पुरानी और एक्सपायर हो चुकी दवाइयों और बीजों के लॉट पर नए और नकली स्टीकर लगाकर उन्हें ‘सर्टिफाइड’ या ‘ट्रुथफुल’ बीज के नाम पर महंगे दामों पर बेच दिया जाता है।

बिचौलियों और डीलरों की सांठगांठ

बुवाई के ऐन वक्त पर जब बाजार में बीजों की भारी मांग और कमी (शॉर्टेज) होती है, तब लोकल डीलर ज्यादा मुनाफे के चक्कर में बिना बिल या ट्रुथफुल लेबल का हवाला देकर किसानों को यह नकली बीज बेच देते हैं।

किसानों पर दोहरी मार और नुकसान

इस साल महाराष्ट्र के करीब 18 जिलों (जैसे अमरावती, अकोला, वर्धा, यवतमाल, लातूर) में सोयाबीन और कपास की बुवाई के 15-20 दिनों बाद भी खेतों में एक भी अंकुर नहीं फूटा। इससे किसानों को करीब 500 से 1000 करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय झटका लगा है। किसानों ने कर्ज लेकर महंगी कीमतों पर बीज खरीदे, जुताई और सिंचाई करवाई, जो पूरी तरह बर्बाद हो गई। अब उन्हें दोबारा बुवाई (दुबार पेरणी) के लिए नए सिरे से खर्च करना पड़ रहा है।

राज्य स्तर पर कार्रवाई

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में किसान लगातार शिकायतें कर रहे हैं। अभी तक 5000 से अधिक किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग को नकली बीजों की बिक्री की शिकायत दर्ज कराई है। सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पांच सदस्यीय शिकायत निवारण समिति को भंग कर दिया गया है। यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और तेलंगाना में भी नकली बीजों के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

प्रशासन और सरकार का एक्शन

कंपनियों पर FIR: अमरावती, वर्धा और बाभुलगांव समेत कई इलाकों में ‘बूस्टर प्लांट जेनेटिक्स’ और ‘हुतुतु’ वैरायटी जैसी कई बीज कंपनियों पर आपराधिक मामले (FIR) दर्ज किए गए हैं।
निरीक्षण और समितियां: महाराष्ट्र सरकार ने तालुका स्तर पर शिकायत निवारण समितियों का पुनर्गठन किया है और कृषि विभाग लैब्स में बीजों के नमूनों की जांच तेज कर रहा है।
मुआवजा और दोबारा बुवाई में मदद: प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए जिला योजना समितियों (DPDC) के माध्यम से मुफ्त या रियायती दरों पर नए बीज उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
सीड बिल 2025: भविष्य में ऐसी धांधली रोकने के लिए केंद्र सरकार सीड बिल पर काम कर रही है, जिसके तहत हर बीज की पैकिंग पर अनिवार्य QR कोड होगा ताकि किसान खुद असली-नकली की पहचान कर सकें।

उत्तर प्रदेश में विशेष पहल

उत्तर प्रदेश के झांसी और इटावा में नकली मूंगफली बीज की बिक्री के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए “साथी” नामक पोर्टल को लॉन्च किया है। इस ऐप के माध्यम से बीजों का ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया गया है, जिससे किसान गुणवत्तापूर्ण बीज प्राप्त कर सकेंगे।

मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी स्थिति गंभीर

मध्य प्रदेश में नकली और घटिया बीजों की बिक्री एक गंभीर समस्या बन चुकी है। हाल ही में सागर और जबलपुर में गैर मानक बीजों के गोदामों पर छापे मारे गए हैं। वहीं, राजस्थान में एसीबी ने 15 करोड़ रुपये मूल्य के घटिया बीज जब्त किए हैं। तेलंगाना में भी नकली कपास के बीजों की बड़ी मात्रा में बरामदगी हुई है।

नकली बीज का कारोबार कैसे होता है?

नकली बीजों का खेल आश्चर्यजनक है। धोखाधड़ी करने वाले लोग अच्छी कंपनियों की पैकिंग की नकल करते हैं, जिससे किसान भ्रमित हो जाते हैं। बिना प्रमाणित बीजों को हाइब्रिड बताकर बेचना, पुरानी बीजों की री-पैकिंग और मिलावट जैसे तरीके शामिल हैं। इसके अलावा, कई स्थानों पर बिना लाइसेंस वाले विक्रेता भी सक्रिय हैं।

किसानों को होने वाले नुकसान

नकली बीजों की बिक्री केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि किसान की पूरी फसल को प्रभावित करती है। पौधे कमजोर होते हैं, उत्पादन में भारी कमी आती है, और किसान को दोबारा बुवाई करनी पड़ती है। इस बीच पर उन पर कर्जा बढ़ता है। धान, सोयाबीन, कपास जैसे फसलों में नकली बीजों की सबसे अधिक आशंका होती है।

निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया

देश में बीजों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए कई संस्थाएं कार्यरत हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और राज्य कृषि विभाग समय-समय पर बाजार में सैंपल की जांच करते हैं। यदि कोई व्यापारी धोखाधड़ी में पाया जाता है, तो उसके लाइसेंस को रद्द किया जा सकता है।

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