केंद्र सरकार ने रद्द की लुटियंस दिल्ली के 112 साल पुराने ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब की लीज

The CSR Journal Magazine

ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब अब खत्म होने के कगार पर

दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित ऐतिहासिक ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ इस समय एक बड़े प्रशासनिक और कानूनी संकट के केंद्र में है। लगभग 112 वर्ष पुराने इस प्रतिष्ठित क्लब को केंद्र सरकार ने अपनी लीज शर्तों का हवाला देते हुए 5 जून 2026 तक परिसर खाली करने का नोटिस दिया है। प्रधानमंत्री आवास के करीब स्थित होने के कारण सुरक्षा और देश के रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के नाम पर यह जमीन वापस मांगी गई है। यह कदम न केवल क्लब के रसूखदार सदस्यों के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह सार्वजनिक हित और निजी विशेषाधिकारों के बीच एक बड़ी बहस को भी जन्म देता है।

दिल्ली जिमखाना क्लब पर सरकार का सख्त आदेश… 113 साल पुराना संस्थान 5 जून तक खाली करें

दिल्ली का जिमखाना क्लब, जो 113 साल पुराना है, अब एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने इसे खाली करने का निर्देश दिया है। यह क्लब, जिसका इतिहास ब्रिटिश राज से शुरू होता है, अब अपने अस्तित्व के लिए खतरे में है। 5 जून तक इसे खाली करने के लिए कहा गया है। सरकार के अनुसार, यह परिसर प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित है और इसे अब देश की सुरक्षा और सैन्य बुनियादी ढांचे के लिए समर्पित किया जाएगा।

खुशियों का ठिकाना, अब होगा समाप्त

दिल्ली जिमखाना क्लब लुटियंस दिल्ली के रग-रग में बसा हुआ है। यह एक ऐसा स्थान रहा है, जहाँ देश की ताकतवर शख्सियतें हमेशा से आती रही हैं। यहाँ तक कि 20 लाख रुपये की कॉर्पोरेट सदस्यता शुल्क चुकाने के बावजूद, बड़े उद्योगपति भी यहां प्रवेश पाने के लिए वर्षों तक प्रतीक्षा सूची में रहते थे। अब इस क्लब का भविष्य अनिश्चित है।

ऐतिहासिक महत्व

साल 1913 में ‘इम्पिरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के रूप में स्थापित। 112 वर्षों से यह भारत की सत्ता, नौकरशाही और सैन्य अधिकारियों का मुख्य सामाजिक केंद्र रहा है।रणनीतिक स्थान के करीब बना लुटियंस दिल्ली के सफदरजंग रोड पर स्थित 27.3 एकड़ का विशाल परिसर, जो प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के बेहद नजदीक है।

सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

यह क्लब 27.3 एकड़ की विशाल जमीन पर स्थित है, जो हाई-सिक्योरिटी जोन माना जाता है। सरकार का कहना है कि इस क्षेत्र में कई केंद्रीय सरकारी और रक्षा प्रतिष्ठान हैं, जिससे यह सुरक्षा कारणों से आवश्यक है कि क्लब को खाली किया जाए। केंद्र सरकार ने यह कड़ा कदम उठाकर एक नया मापदंड स्थापित किया है। हालाँकि, विपक्षी दलों की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इतिहास में दर्ज होने जा रहा क्लब

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना 1913 में इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब के नाम से हुई थी। आजादी के बाद इसे दिल्ली जिमखाना क्लब नाम दिया गया। क्लब की कई इमारतें 1930 के दशक में बनी थीं। यह क्लब देश की कई प्रमुख हस्तियों कीं गवाह रहा है, जो कई पीढ़ियों तक इसे पसंद करती रहीं हैं।

NCLT और अदालती कार्यवाही का इतिहास

दिल्ली जिमखाना क्लब का कानूनी विवाद केवल इस बेदखली नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक लंबा न्यायिक इतिहास रहा है। सरकार ने 2016 में क्लब में वित्तीय अनियमितताओं और सदस्यता प्रक्रियाओं में धांधली की जांच शुरू की थी। सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 241(2) के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) में याचिका दायर की। आरोप था कि क्लब का कामकाज “सार्वजनिक हित के प्रतिकूल” (Prejudicial to Public Interest) है। सरकार ने अदालत में दलील दी कि क्लब आम जनता के लिए बंद है। वर्षों से कतार में खड़े आवेदकों को दरकिनार कर, मौजूदा सदस्यों के बच्चों को ‘ग्रीन कार्ड’ और आश्रित कोटे के जरिए सीधे सदस्यता दी जा रही थी (जिस पर हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सख्ती दिखाई)।

सरकारी प्रशासक की नियुक्ति (2021-2022)

फरवरी 2021 में NCLAT और बाद में NCLT ने क्लब की चुनी हुई जनरल कमेटी को निलंबित कर दिया और केंद्र सरकार द्वारा नामित प्रशासक (Administrator) की नियुक्ति की कमान सौंप दी। अदालती जांच में पाया गया कि क्लब अपने मूल उद्देश्य (खेलों को बढ़ावा देना) पर कुल खर्च का केवल 3% खर्च कर रहा था, जबकि बाकी पैसा रसूखदारों के मनोरंजन और कैटरिंग पर खर्च हो रहा था।

क्यों वापस ली जा रही है यह जमीन?

दिल्ली जिमखाना क्लब पर भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) ने यह आदेश जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह जमीन सार्वजनिक सुरक्षा और रक्षा बुनियादी ढांचे के लिए बेहद आवश्यक है। 22 मई को क्लब के सचिव को लिखे पत्र में इस बात का जिक्र किया गया है कि यह सामाजिक और खेल संगठन चलाने के लिए दी गई थी। अब इसे वापस लिया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि देश के रक्षा बुनियादी ढांचे (Defence Infrastructure) को मजबूत करने और वीVIP क्षेत्र की सुरक्षा के लिए इस भूमि का उपयोग किया जाएगा।

जिमखाना विवाद: विशेषाधिकार बनाम जनहित

दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने का सरकार का यह फैसला विशुद्ध रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्राथमिकताओं से प्रेरित दिखाई देता है। वीवीआईपी (VVIP) क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस भूमि का महत्व रक्षा उद्देश्यों के लिए सर्वोपरि हो गया है। हालांकि, क्लब प्रबंधन द्वारा अदालत का रुख करने की तैयारी से यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला एक लंबी कानूनी लड़ाई का रूप लेगा। अंततः, यह मामला यह तय करेगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक उद्देश्यों के सामने दशकों पुराने ऐतिहासिक संस्थानों और उनके विशेषाधिकारों की कानूनी वैधता कितनी मजबूत रह पाती है।

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