तेल-गैस छोड़िए, अब कैंसर की सस्ती दवाओं पर होर्मुज संकट का असर, मार्केट से हुईं ‘गायब’

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में कैंसर की दवाओं की कमी तेजी से बढ़ रही है। थोक विक्रेताओं और स्टॉक रखने वालों के पास इन दवाओं का स्टॉक तेजी से खत्म होता जा रहा है। एक रिटेल फार्मेसी के मालिक ने बताया कि “इस समय देश में लगभग किसी भी मेडिकल स्टोर पर ये दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं।” खाड़ी क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति और होर्मुज़ संकट का असर केवल फ्यूल और गैस पर ही नहीं, बल्कि दवाओं पर भी गंभीरता से देखने को मिल रहा है। मार्केट में कैंसर के इलाज के लिए जरूरी दवाएं जैसे सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) पूरी तरह से अनुपलब्ध हो गई हैं।

कैंसर मरीजों के लिए दवाएं क्यों हैं जरूरी

कैंसर विशेषज्ञों ने इन दवाओं की कमी को लेकर चिंता जताई है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, सर गंगा राम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी के चेयरमैन डॉक्टर श्याम अग्रवाल का कहना है कि “हमारे अस्पताल की फ़ार्मेसी में सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन खत्म हो गई हैं। हर 10 में से करीब 7 मरीजों को इन दवाओं की जरूरत होती है।” यह दवाएं मुंह, फेफड़े, गर्भाशय और अन्य प्रकार के कैंसर के इलाज में बेहद अहम मानी जाती हैं। अब, इनकी कमी ने कैंसर के मरीजों को दवा की तलाश में दुकानों का चक्कर लगाने पर मजबूर कर दिया है।

डोज की कमी भी बढ़ रही है

नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिषेक शंकर ने बताया, “पिछले कम से कम 2 हफ्तों से इन दवाइयों की कमी बनी हुई है।” कम डोज वाली दवाएं स्टोर से पूरी तरह गायब हो चुकी हैं। जबकि अधिक डोज वाली दवाएं कुछ दुकानों में मिल रही हैं। मुंबई के लीलावती अस्पताल में भी प्लैटिनम से बनी सभी कीमोथेरेपी दवाओं की कमी हो गई है।

कीमतों में वृद्धि की वजह क्या है?

कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण दुनिया भर में प्लैटिनम की कीमतों में भारी बढ़ोतरी है। डॉक्टर मोहन मेनन ने बताया कि “साल 2023 के मध्य में प्लैटिनम की कीमत 2,700 रुपये प्रति ग्राम थी, अब यह 7,800 रुपये प्रति ग्राम से भी ज्यादा हो गई है।” हालाँकि, युद्ध के शुरू होने के बाद से कच्चे माल के बढ़ते मूल्य के कारण कई मेडिकल उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन दवा कंपनियों ने अपने दामों में वृद्धि नहीं की है।

दवाओं की अनुपलब्धता का बड़ा कारण

युद्ध के कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण पेट्रोकेमिकल आधारित उत्पादों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। लेकिन ये दवाएं ‘ड्रग प्राइसिंग कंट्रोल ऑर्डर’ (DPCO) के तहत आती हैं, जो आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करता है। DPCO के अनुसार, किसी भी दवा की कीमत में सालाना औसत मूल्य वृद्धि के अनुसार ही बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा, प्लैटिनम की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसकी मुख्य वजह दक्षिण अफ्रीका में उत्पादन में कमी और ऑटोमोटिव सेक्टर में बढ़ता

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