100 बार गिरफ्तारी मंजूर, पर झुकूंगा नहीं- तृषा कृष्णन विवाद पर बोले उदयनिधि स्टालिन

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उदयनिधि स्टालिन ने कहा, ‘100 बार गिरफ्तारी के लिए तैयार’, तृषा कृष्णन पर विवादित बयानों का असर

तमिलनाडु पुलिस ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता और राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन को अभिनेत्री तृषा कृष्णन के खिलाफ कथित तौर पर की गई ‘डबल मीनिंग’ (द्विअर्थी) और आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में गिरफ्तार किया है, जिसके बाद उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि वह ‘किसानों के अधिकारों के लिए 100 बार भी जेल जाने को तैयार हैं’। तमिलनाडु की राजनीति में इस घटनाक्रम ने एक बड़ा भूचाल ला दिया है। सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्रि कज़गम (टीवीके) सरकार के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और द्रमुक (DMK) के बीच यह विवाद अब एक भीषण राजनीतिक युद्ध में तब्दील हो चुका है। मद्रास हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उदयनिधि स्टालिन को पूछताछ के बाद पुलिस स्टेशन से जमानत पर रिहा कर दिया गया, लेकिन इसके बाद दोनों ओर से बयानों के तीखे तीर चलाए जा रहे हैं।

तमिलनाडु में राजनीतिक महासंग्राम

तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों शब्दों की मर्यादा और सियासी रसूख को लेकर एक ऐसा घमासान छिड़ा है, जिसने दशकों पुराने राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की एक कथित टिप्पणी और उसके बाद उनकी नाटकीय गिरफ्तारी ने चेन्नई से लेकर दिल्ली तक का सियासी पारा चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्रि कज़गम (TVK) सरकार द्वारा की गई इस पुलिसिया कार्रवाई को द्रमुक ने ‘प्रतिशोध की राजनीति’ करार दिया है, जबकि टीवीके और भाजपा ने इसे ‘महिला अस्मिता और सार्वजनिक शुचिता’ से जुड़ा मामला बताया है।

क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

विवाद की जड़ें सोमवार को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित द्रमुक की एक विरोध रैली से जुड़ी हैं। रैली को संबोधित करते हुए विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन सत्तारूढ़ टीवीके सरकार और मुख्यमंत्री विजय पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे थे। उन्होंने जनसभा में कहा कि तमिलनाडु को कावेरी के पानी की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं और केवल विपक्ष के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करने में व्यस्त हैं। इसी दौरान, जनसभा में मौजूद कुछ कार्यकर्ताओं की तरफ से अचानक दक्षिण भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाए जाने लगे—जो मुख्यमंत्री विजय की पूर्व सह-कलाकार भी रही हैं। भीड़ के इस नारे पर प्रतिक्रिया देते हुए उदयनिधि स्टालिन ने मुस्कुराते हुए कथित तौर पर एक ऐसी टिप्पणी की, जिसे आलोचकों और राजनीतिक विरोधियों ने अत्यधिक आपत्तिजनक और द्विअर्थी (डबल मीनिंग) माना। आरोप है कि उन्होंने कहा, “पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, वहां जरूर पहुंचना चाहिए।” सोशल मीडिया पर इस भाषण का वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो गया और देखते ही देखते इसने एक राष्ट्रीय विवाद का रूप ले लिया।

कानूनी शिकंजा और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं

इस टिप्पणी के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद सत्तारूढ़ दल टीवीके की महिला विंग की पदाधिकारी भैरवी शंकर ने तंजावुर पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उदयनिधि स्टालिन ने एक सार्वजनिक मंच से अत्यंत अमर्यादित, अश्लील और महिला विरोधी भाषा का उपयोग किया है, जिससे अभिनेत्री तृषा कृष्णन और सामान्य महिला समाज की गरिमा को ठेस पहुंची है। टीवीके ने इस संबंध में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का भी रुख किया। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ बेहद गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित प्रमुख धाराएं शामिल की गईं-
धारा 61: आपराधिक साजिश
धारा 79: किसी महिला की शालीनता और अस्मिता को ठेस पहुंचाने के इरादे से कहे गए शब्द या हावभाव
धारा 192: दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना
धारा 296बी: सार्वजनिक स्थान पर अश्लील शब्दों का उच्चारण करना
धारा 352: शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर किया गया अपमान

चेन्नई आवास से गिरफ्तारी और पुलिस स्टेशन का हाई-वोल्टेज ड्रामा

मंगलवार सुबह चेन्नई के नीलंकरई स्थित उदयनिधि स्टालिन के आवास पर भारी पुलिस बल पहुंचा। पुलिस के पास गिरफ्तारी वारंट था। जैसे ही द्रमुक कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लगी, सैकड़ों की संख्या में समर्थक उनके घर के बाहर एकत्र हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। पुलिस वाहनों को रोकने की कोशिश की गई, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, उदयनिधि स्टालिन बेहद शांत दिखे, उन्होंने मुस्कुराते हुए समर्थकों की तरफ हाथ हिलाया और इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया।पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए तंजावुर ले जा रही थी। शुरुआती योजना उन्हें तंजावुर दक्षिण पुलिस स्टेशन ले जाने की थी, लेकिन वहां द्रमुक समर्थकों की भारी भीड़ और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के अंदेशे को देखते हुए पुलिस ने अंतिम क्षणों में अपना रास्ता बदल दिया। पुलिस उन्हें लगभग 21 किलोमीटर दूर सेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन लेकर गई।

अग्रिम जमानत

इस दौरान पुलिस स्टेशन पहुंचने पर उदयनिधि ने कुछ समय के लिए वाहन से बाहर निकलने से इनकार भी किया और तर्क दिया कि यह वह पुलिस स्टेशन नहीं है जिसका उल्लेख कानूनी प्रक्रियाओं में था। इसी बीच, गिरफ्तारी से ऐन पहले उदयनिधि की कानूनी टीम ने मद्रास हाईकोर्ट में एक आकस्मिक अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। दोपहर में सुनवाई करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि उदयनिधि स्टालिन को पुलिस जांच में सहयोग करना होगा, लेकिन पुलिस को उन्हें केवल पूछताछ करने और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद तुरंत स्टेशन जमानत (Station Bail) पर रिहा करना होगा। पुलिस स्टेशन में करीब 90 मिनट की गहन पूछताछ के बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर रिहा कर दिया गया।

‘100 बार भी गिरफ्तारी के लिए तैयार’: उदयनिधि का करारा पलटवार

जमानत पर रिहा होने के बाद सेंगीपट्टी पुलिस स्टेशन के बाहर एकत्र हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने टीवीके सरकार पर ‘झूठे मुकदमे’ बनाने और वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उदयनिधि ने गरजते हुए कहा:”यह गिरफ्तारी और कुछ नहीं बल्कि एक कॉमेडी है। मैं कलैगनार (करुणानिधि) का पोता और मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन का बेटा हूँ। मैं जेल जाने या पुलिस की इन धमकियों से डरने वाला नहीं हूँ। अगर किसानों के अधिकारों और कावेरी जल के मुद्दे को उठाने के लिए यह सरकार मुझे जेल भेजना चाहती है, तो मैं ऐसी 100 गिरफ्तारियों का सामना करने के लिए तैयार हूँ।”उन्होंने अपनी सफाई में स्पष्ट किया कि उनके भाषण में कोई द्विअर्थी संवाद या किसी महिला का अपमान करने का इरादा नहीं था। उन्होंने विरोधी दलों पर आरोप लगाया कि उनके पूरे भाषण को ‘कट, कॉपी और पेस्ट’ करके राष्ट्रीय मीडिया में गलत तरीके से प्रसारित किया गया ताकि उनकी छवि खराब की जा सके। उन्होंने कहा, “मेरा पालन-पोषण ऐसे संस्कारों में नहीं हुआ है। मेरी भी एक बहन है, एक परिवार है और मैं महिलाओं का बेहद सम्मान करता हूँ।”

एम.के. स्टालिन का तीखा हमला: ‘अहंकार ही विनाश की वजह बनता है’

उदयनिधि की गिरफ्तारी पर द्रमुक प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय की सरकार को ‘जोकर कैबिनेट’ और बेहद ‘अहंकारी’ करार दिया। एम.के. स्टालिन ने अपने बयान में कहा कि पुलिस ने बेहद अलोकतांत्रिक तरीके से विपक्ष के नेता को उनके घर से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह सब इसलिए कर रही है क्योंकि वह कावेरी जल विवाद पर पूरी तरह विफल हो चुकी है और इस विफलता को छिपाने के लिए एक नया विवाद खड़ा किया जा रहा है। स्टालिन ने यह भी दावा किया कि सरकार उदयनिधि को राज्य विधानसभा के आगामी बजट सत्र में भाग लेने से रोकना चाहती थी, इसलिए इस गिरफ्तारी का समय इस तरह तय किया गया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इतिहास गवाह है कि सत्ता का अहंकार ही हमेशा शासकों के विनाश की वजह बनता है।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय: क्या थलपति विजय का दांव उल्टा पड़ा?

तमिलनाडु के इस नए राजनीतिक समीकरण को विश्लेषक बेहद दिलचस्प मान रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत में ही राज्य की सत्ता में आए सिनेमा के ‘थलपति’ यानी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक परीक्षण है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि तृषा कृष्णन के नाम पर उदयनिधि को घेरने का जो दांव टीवीके सरकार ने खेला था, वह द्रमुक के आक्रामक रुख के कारण उलझा हुआ नजर आ रहा है। इस कार्रवाई ने द्रमुक के बिखरते कैडर को फिर से एकजुट होने का एक बड़ा मौका दे दिया है। पूरे राज्य में द्रमुक कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे यह संदेश गया कि विपक्ष झुकने को तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक (AIADMK) के प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी इस गिरफ्तारी के समय (टायमिंग) पर सवाल उठाए हैं, जिससे सत्तारूढ़ दल थोड़ा अलग-थलग पड़ता दिख रहा है।

तमिलनाडु में राजनीतिक घमासान

अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर राजनीतिक मंचों से शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी तरह से एक शुद्ध राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई बन चुका है। एक तरफ जहां सत्तापक्ष इसे महिलाओं के सम्मान की रक्षा की वैधानिक कानूनी प्रक्रिया बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ उदयनिधि स्टालिन ने ‘100 बार जेल जाने’ की हुंकार भरकर इस विवाद को किसानों के आंदोलन और क्षेत्रीय अस्मिता से जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में विधानसभा के सत्र के दौरान और तमिलनाडु की सड़कों पर इस विवाद की गूँज और भी तेज सुनाई देने की पूरी संभावना है।

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