छंटनी के बीच American Airlines का बड़ा दांव, भारत में दोगुना करेगी अपना टेक स्टाफ

The CSR Journal Magazine

छंटनी के दौर में American Airlines का इंडिया टेक्नोलॉजी हब के लिए बड़ा प्लान, दोगुना करेगी स्टाफ

अमेरिकन एयरलाइंस (American Airlines) वैश्विक स्तर पर चल रही आर्थिक अनिश्चितताओं और छंटनी के बीच अपने भारत (हैदराबाद) टेक्नोलॉजी हब में कर्मचारियों की संख्या को दोगुना (करीब 800) करने की बड़ी योजना बना रही है। यह विस्तार अगले वर्ष की शुरुआत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

हैदराबाद हब में होगा विस्तार

अमेरिकन एयरलाइंस ने हाल ही में अपने हैदराबाद टेक्नोलॉजी हब को लेकर बड़ा ऐलान किया है। 2024 में शुरुआत के बाद, वर्तमान में इस हब में लगभग 400 कर्मचारी काम कर रहे हैं। कंपनी का प्लान है कि वह इस संख्या को दोगुना करके लगभग 800 कर्मचारियों तक पहुंचाएगी। इस कदम से न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि कंपनी के लिए भी व्यापक लाभ होगा।

भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह कर्मचारियों की भर्ती जारी रखने का इरादा रखती है। पिछले कुछ वर्षों में, एयरलाइन ने अपने टेक्नोलॉजी सेक्टर में कई बदलाव किए हैं। खासकर साल 2021 के बाद से, हर साल एयरलाइन ने अपने IT निवेश में वृद्धि की है, जिससे अमेरिका स्थित टेक्नोलॉजी कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ी है।

इन क्षेत्रों में होंगी नियुक्तियां

इस टेक हब का मुख्य फोकस केवल बैक-ऑफिस काम संभालना नहीं, बल्कि एयरलाइन के कोर ऑपरेशन्स को मजबूत करना है। नई भर्तियां मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में की जाएंगी- सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग (Software Engineering)आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्ससाइबर सिक्योरिटी (Cybersecurity)।

भारत में ही निवेश क्यों?

लागत में कमी (Cost Optimization)– पश्चिमी देशों में बढ़ती परिचालन लागत (Operational Costs) को देखते हुए वैश्विक कंपनियां भारत के कुशल और किफायती टैलेंट पूल का रुख कर रही हैं।
24/7 ऑपरेशन्स– फोर्ट वर्थ और फीनिक्स (अमेरिका) स्थित केंद्रों के साथ मिलकर हैदराबाद की टीम एयरलाइन के वैश्विक संचालन को बिना रुके चौबीसों घंटे तकनीकी सपोर्ट देती है।
प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण- यह टीम नए डिजिटल टूल्स और ऐप्स विकसित करती है, जिससे उड़ानों की री-बुकिंग, क्रू मैनेजमेंट और ग्राहकों के अनुभव को और बेहतर (Resilient) बनाया जा सके।

IT क्षेत्र में निवेश का महत्व

सोचने वाली बात यह है कि भारतीय टेक्नोलॉजी हब का विकास एयरलाइन के लिए कितना महत्वपूर्ण है। IT क्षेत्र में इस तरह के निवेश से एयरलाइन को नई टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर में विशेषज्ञता हासिल करने में मदद मिलेगी। यह न केवल विशेष परियोजनाओं को गति देने में सहायक होगा, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने का भी अवसर देगा।

ऑफिस में आधुनिक सुविधाओं का होगा समावेश

हैदराबाद हब में न केवल स्टाफ की संख्या बढ़ेगी, बल्कि एयरलाइन द्वारा आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। अगले कुछ महीनों में, कर्मचारियों के लिए बेहतर काम करने की जगह तैयार की जाएगी। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि एयरलाइन की टीम न केवल कुशल हो, बल्कि संतुष्ट भी रहे।

तकनीकी विकास के लिए दी जाएगी प्राथमिकता

आगामी वर्षों में, एयरलाइन अपने टेक्नोलॉजी हब में AI, मशीन लर्निंग और अन्य नवीनतम तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए, एयरलाइन प्रमोटर और टैलेंटेड पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए भी काम करेगी। इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

एविएशन सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

भारत में केवल अमेरिकन एयरलाइंस ही नहीं, बल्कि अन्य बड़ी विमानन कंपनियां भी अपनी तकनीकी क्षमताएं बढ़ा रही हैं।
साउथवेस्ट एयरलाइंस (Southwest Airlines)- इस अमेरिकी एयरलाइन ने भी हाल ही में हैदराबाद में अपने जीसीसी (GCC) स्टाफ को अगले कुछ वर्षों में बढ़ाकर 1,000 कर्मचारी करने की घोषणा की है।
वैश्विक ट्रेंड– Nasscom-Zinnov की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2,100 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) काम कर रहे हैं, जो करीब 23.6 लाख लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

ग्राहक अनुभव में होगा सुधार

एक मजबूत टेक्नोलॉजी हब ग्राहकों के अनुभव को भी बेहतर बनाने का काम करेगा। ग्राहकों को तेज, बेहतर और कुशल सर्विस प्रदान करने में यह हब न केवल लाभकारी होगा, बल्कि एयरलाइन के ब्रांड इमेज को भी मजबूती देगा। ऐसे में यह स्पष्ट है कि एयरलाइन ने अपने इंडिया टेक्नोलॉजी हब के लिए एक स्थायी और दूरदर्शी रणनीति बनायी है।

भविष्य के योजनाओं पर फोकस

इस पूरे विस्तार और निवेश के पीछे की योजना यह है कि एयरलाइन भविष्य की संभावनाओं के लिए खुद को तैयार कर सके। टेक्नोलॉजी हब के माध्यम से, कंपनी अपने डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को तेज करेगी और अपने व्यवसाय के सभी क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए आवश्यक कौशल और संसाधनों को बढ़ा सकेगी।

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