संसद भवन बना अभेद्य किला: CISF और QRT की मुस्तैदी से परिंदा भी मार नहीं सकता पर

The CSR Journal Magazine

संसद की सुरक्षा: कौन और कैसे रखता है सुरक्षा का ख्याल? सुरक्षा में कड़ी चेकिंग और हाई अलर्ट

हाल ही में जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान संसद की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जब प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च की कोशिश की, तो सुरक्षा कर्मी तुरंत कार्रवाई में जुट गए। संसद के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए और क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) सक्रिय हो गई। संसद की सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत सुदृढ़ और अभेद्य बनाने के लिए CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल), तकनीकी निगरानी, और QRT (क्विक रिएक्शन टीम) की चौबीसों घंटे तैनाती सुनिश्चित की गई है। हाल ही में हुए प्रदर्शनों और सुरक्षा चुनौतियों के दौरान सुरक्षाबलों ने उत्कृष्ट सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का परिचय दिया है।

अभेद्य किले में तब्दील हुआ देश का लोकतंत्र मंदिर, आधुनिक तकनीक और जांबाज कमांडो का त्रिशूल सुरक्षा घेरा

संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही देश की सबसे संवेदनशील इमारत यानी संसद भवन परिसर (PHC) की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से अभेद्य बना दिया गया है। सोमवार को सत्र के पहले ही दिन जंतर-मंतर से निकले CJP प्रदर्शनकारियों और छात्रों के भारी हुजूम ने जब विजय चौक की तरफ से संसद भवन के प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो वहां तैनात सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित मुस्तैदी ने किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति को पूरी तरह नाकाम कर दिया। सुरक्षा के लिहाज से एहतियातन संसद के कुछ मुख्य द्वारों को तुरंत बंद कर दिया गया और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जांबाज जवानों तथा क्विक रिएक्शन टीम (QRT) ने मोर्चा संभाल लिया।

दिसंबर 2023 की सुरक्षा चूक से सबक

यह हालिया घटनाक्रम इस बात का जीवंत प्रमाण है कि दिसंबर 2023 की सुरक्षा चूक की घटना के बाद से संसद भवन की सुरक्षा में जो आमूल-चूल बदलाव किए गए हैं, वे पूरी तरह से जमीन पर उतर चुके हैं। अब देश की संसद की सुरक्षा पारंपरिक पहरेदारी से आगे बढ़कर त्रि-स्तरीय सुरक्षा चक्र (CISF, अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी, और QRT) पर टिकी है, जो परिंदे को भी पर मारने की इजाजत नहीं देती।

संसद की सुरक्षा का नया पहरेदार: CISF का सुरक्षा तंत्र

वर्ष 2024 के मई महीने में एक ऐतिहासिक नीतिगत फैसले के तहत संसद की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की पूरी कमान पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस (PSS) से लेकर CISF को सौंप दी गई थी। वर्तमान में संसद परिसर की सुरक्षा में CISF के 3,300 से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित जवान और अधिकारी चौबीसों घंटे मुस्तैद हैं।संसद में तैनात होने वाले प्रत्येक CISF जवान को बेहद कड़े और विशिष्ट प्रशिक्षण दौर से गुजरना पड़ता है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन जवानों की तैनाती से पहले उनका चार-स्तरीय कड़ा स्क्रीन टेस्ट होता है।
मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन: तनावपूर्ण परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता की जांच।
बैटल फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (BPET): शारीरिक रूप से अत्यधिक चुस्त-दुरुस्त होने का पैमाना।
कठिन इंडक्शन ट्रेनिंग: संसद परिसर की भौगोलिक स्थिति और विशिष्ट प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण।
सर्वोच्च सुरक्षा क्लीयरेंस: बेदाग सर्विस रिकॉर्ड और चिकित्सा क्षेत्र में SHAPE-I श्रेणी की अनिवार्यता।

कार्यकाल में बढ़ोत्तरी

सुरक्षा व्यवस्था को अधिक निरंतरता प्रदान करने और सांसदों के साथ सुरक्षाकर्मियों के समन्वय को बेहतर बनाने के लिए हाल ही में तैनाती नीति में बदलाव कर जवानों का कार्यकाल 3 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दिया गया है। इससे सुरक्षा बल के जवान सांसदों और वहां काम करने वाले स्टाफ के चेहरों तथा उनके आवागमन के पैटर्न से पूरी तरह वाकिफ रहते हैं, जिससे त्रुटि की गुंजाइश शून्य हो जाती है।

डिजिटल अभेद्य दीवार: अत्याधुनिक तकनीकी निगरानी

संसद भवन के नए और पुराने परिसर को मिलाकर अब इसे एक डिजिटल सर्विलांस जोन में बदल दिया गया है। सुरक्षाबलों के भौतिक घेरे को तकनीकी रूप से आधुनिकतम प्रणालियों का पूरा बैकअप हासिल है। तकनीकी निगरानी के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं।

फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS)

संसद के सभी प्रवेश द्वारों पर अत्याधुनिक चेहरा पहचानने वाले कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे डेटाबेस में फीड किए गए चेहरों से मिलान करते हैं। कोई भी अनधिकृत व्यक्ति यदि जाली पहचान पत्र के सहारे भी घुसने की कोशिश करे, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।

एयरपोर्ट-स्टाइल फ्रिस्किंग

परिसर के भीतर प्रवेश करने वाले हर बैग, उपकरण और सामग्री की जांच अत्याधुनिक एक्स-रे बागेज स्कैनर्स (X-BIS) के जरिए की जाती है।

एंटी-ड्रोन सिस्टम

आसमान से होने वाले किसी भी संभावित खतरे या रिमोट-कंट्रोल गैजेट्स को नाकाम करने के लिए संसद की छतों पर विशेष ड्रोन रोधी प्रणालियां सक्रिय हैं, जो किसी भी उड़ने वाली संदिग्ध वस्तु को हवा में ही जाम (Jam) कर सकती हैं।

CBRN डिफेंस यूनिट

आधुनिक युग के अदृश्य खतरों यानी केमिकल (रासायनिक), बायोलॉजिकल (जैविक), रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर हमलों से निपटने के लिए CISF की एक विशेष विंग को 200 से अधिक विशेषज्ञों के साथ तैनात किया गया है।

संकट का तत्काल समाधान: Quick Reaction Team  (QRT)

यदि कोई खतरा तकनीकी निगरानी और शुरुआती सुरक्षा घेरे को भेदकर आगे बढ़ने का दुस्साहस करता है, तो उसे नेस्तनाबूद करने की जिम्मेदारी क्विक रिएक्शन टीम (QRT) की होती है। संसद परिसर के रणनीतिक मोर्चों पर QRT के कमांडो अत्याधुनिक स्वचालित हथियारों, बुलेटप्रूफ वाहनों और विशेष संचार उपकरणों के साथ तैनात रहते हैं। इन QRT कमांडोज को भारतीय सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के विशिष्ट कैंपों में बैटल-इनोक्यूलेशन का कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। आज प्रदर्शन के दौरान जब भीड़ संसद के मुख्य द्वारों की ओर बढ़ने लगी, तो QRT की बख्तरबंद गाड़ियों ने महज कुछ ही सेकंडों में पोजीशन संभाल ली। इनका रिस्पॉन्स टाइम (कार्रवाई का समय) इतना कम है कि ये किसी भी आकस्मिक संकट की स्थिति में एक मिनट से भी कम समय में जवाबी मोर्चा खोलने में सक्षम हैं।

सुरक्षा बलों का महा-अभ्यास: मानसून सत्र से पहले मॉक ड्रिल

संसद के मानसून सत्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए रविवार को ही संसद परिसर में एक मल्टी-एजेंसी सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। इस महा-अभ्यास में CISF के महानिदेशक (DG) प्रवीर रंजन स्वयं मौजूद थे। इस संयुक्त अभ्यास में CISF, दिल्ली पुलिस, CRPF, NSG और संसद के आंतरिक सुरक्षा स्टाफ ने हिस्सा लिया। इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल को परखना और आपात स्थिति में एक-दूसरे को तुरंत बैकअप देना था। महानिदेशक ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद लोकसभा अध्यक्ष और लोकसभा के महासचिव से भी मुलाकात की थी, ताकि सुरक्षा की तैयारियों में कोई कसर न रह जाए।

आज के प्रदर्शन में दिखी सजगता की बानगी

सोमवार दोपहर जब जंतर-मंतर से मार्च करते हुए सीजेपी के प्रदर्शनकारी छात्र और कार्यकर्ता निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर संसद के करीब पहुंच गए, तो सुरक्षा का नया खाका पूरी तरह कसौटी पर खरा उतरा। तकनीकी सर्विलांस और दिल्ली पुलिस के खुफिया इनपुट के आधार पर प्रदर्शनकारियों के विजय चौक की ओर बढ़ने की सूचना संसद नियंत्रण कक्ष को पहले ही मिल गई थी।

द्वारों को किया गया लॉक

बिना किसी अफरा-तफरी के संसद के उन प्रवेश द्वारों को तुरंत बंद कर दिया गया, जहां से प्रदर्शनकारियों के आने की आशंका थी। CISF के जवानों ने लाठियों और दंगा-रोधी उपकरणों के साथ अंदरूनी घेरा बनाया, जबकि QRT की गाड़ियां संसद के बाहरी पेरीमीटर पर मुस्तैद हो गईं। सांसदों के वाहनों की आवाजाही को भी कुछ मिनटों के लिए रोक दिया गया ताकि सुरक्षा प्रोटोकॉल में कोई व्यवधान न आए। इस पूरी मुस्तैदी का परिणाम यह रहा कि प्रदर्शनकारी संसद की बाहरी सीमा के आसपास ही रोक दिए गए और कोई भी अप्रिय घटना या सुरक्षा में सेंधमारी नहीं हो सकी। दिल्ली पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और इलाके को पूरी तरह खाली कराकर हाई अलर्ट पर रखा है।

 शून्य-त्रुटि (Zero-Error) नीति पर काम कर रही सरकार

संसद भवन सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और लोकतांत्रिक गौरव का प्रतीक है। आज के सफल सुरक्षा संचालन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय संसद परिसर के भीतर ‘शून्य-त्रुटि’ नीति पर काम कर रहा है। मानवीय सूझबूझ (CISF), त्वरित मारक क्षमता (QRT) और आधुनिकतम मशीनी बुद्धिमत्ता (तकनीकी निगरानी) के इस त्रिकोणीय समागम ने देश की संसद को एक ऐसे सुरक्षित दुर्ग में तब्दील कर दिया है, जिसकी सुरक्षा व्यवस्था को भेद पाना किसी भी राष्ट्रविरोधी तत्व या अनियंत्रित भीड़ के लिए पूरी तरह असंभव है।

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