Bengal में आज विधानसभा में पेश होगा UCC बिल: BJP ने 6 महीने में लागू करने का किया था वादा

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार आज विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर सकती है। भाजपा ने वादा किया था कि राज्य में UCC को सरकार बनने के छह महीने के अंदर लागू किया जाएगा। नयी सरकार का गठन 9 मई को हुआ था। इस विधेयक के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू किया जाएगा, जो धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों की जगह लेगा।

UCC का इतिहास

असम विधानसभा में मई में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पारित हो चुका है, जिससे असम देश का तीसरा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात भी इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। ये राज्य पहले से ही UCC को लागू कर चुके हैं। यह कानून सभी धर्मों के नागरिकों पर लागू होगा, लेकिन अनुसूचित जनजातियों को इस मामले में विशेष छूट मिल सकती है।

सवाल-जवाब का दौर

UCC से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों का जवाब इस प्रकार है: क्या UCC सभी धर्मों पर लागू होगा? इसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों को कुछ विशेष छूट मिल सकती है। क्या धार्मिक रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे? UCC मुख्य रूप से नागरिक मामलों से जुड़ा है, धार्मिक आस्था पर इसका कोई सीधा असर नहीं होगा।

उदाहरण और प्रभाव

UCC लागू होने के लिए विधेयक का विधानसभा से पारित होना जरूरी है, उसके बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी और अधिसूचना के बाद लागू किया जाएगा। उत्तराखंड ने 2025 में UCC लागू करने की तैयारी कर ली है। 6 फरवरी 2024 को इसके विधेयक को विधानसभा में पेश किया गया और उपस्थिति में पारित हुआ। इसके बाद राष्ट्रपति ने 11 मार्च 2024 को इसे मंजूरी दी।

गुजरात और असम की स्थिति

गुजरात नें मार्च 2026 में UCC बिल को पास किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधानसभा में इस विधेयक को पेश किया। कांग्रेस ने मतदान के दौरान वॉकआउट किया, लेकिन बिल को बहुमत से पारित किया गया। असम ने इस कानून को 27 मई 2026 को पारित किया और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि अनुसूचित जनजातियों को UCC से बाहर रखा जाएगा।

यूसीसी की पूर्व पृष्ठभूमि

आजाद भारत से पहले गोवा में UCC लागू था, जब इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था। ब्रिटिश सरकार ने भी सन् 1835 में समान कानून बनाने का आह्वान किया था, परंतु धर्म के आधार पर हिंदू और मुस्लिम कानूनों को अलग रखा गया। इससे समान नागरिक संहिता की मांग ने जन्म लिया। 1941 में बीएन राव समिति का गठन हुआ था जिसने हिंदुओं के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने का सुझाव दिया था।

चुनौतियां और अपेक्षाएं

उम्मीद है कि UCC का विधेयक पारित होते ही इसके प्रभावी कार्यान्वयन की राह पहले से बनाई जाएगी। इससे समाज में एकरूपता लाने और न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनकी चुनावी नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अब विधानसभा के कामकाज से देखने की बारी है कि यह विधेयक कब तक वास्तविकता बन पाएगा।

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