वाराणसी की साड़ी से कन्नौज के इत्र तक… GI टैग में नंबर-1 बना उत्तर प्रदेश, 77 उत्पादों को मिली खास पहचान

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश ने पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों की पहचान को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब जीआई (Geographical Indication) टैग के मामले में उत्तर प्रदेश देश का नंबर-1 राज्य बन गया है। राज्य के नाम अब 77 GI टैग दर्ज हैं। इससे यूपी के हस्तशिल्प, कृषि और पारंपरिक उत्पादों को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में नई पहचान मिल रही है।

क्या होता है GI टैग?

जीआई टैग किसी ऐसे उत्पाद को दिया जाता है, जिसकी गुणवत्ता, पहचान या विशेषता किसी खास भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। यह टैग मिलने के बाद उस उत्पाद के नाम का इस्तेमाल केवल उसी क्षेत्र के अधिकृत उत्पादक कर सकते हैं। इससे नकली उत्पादों पर रोक लगती है और असली उत्पादों को बाजार में अलग पहचान मिलती है।

यूपी के इन उत्पादों को मिली खास पहचान

उत्तर प्रदेश के कई प्रसिद्ध उत्पाद पहले से ही जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं। इनमें वाराणसी की बनारसी साड़ी, कन्नौज का इत्र, लखनऊ की चिकनकारी, भदोही का कालीन, आगरा का पेठा, मलिहाबाद का दशहरी आम, प्रयागराज का सुरखा अमरूद, मुरादाबाद का ब्रास क्राफ्ट, सहारनपुर की वुड कार्विंग और फिरोजाबाद का ग्लास क्राफ्ट जैसे उत्पाद शामिल हैं।

वाराणसी बना सबसे बड़ा GI हब

जीआई टैग वाले उत्पादों के मामले में वाराणसी सबसे आगे है। यहां के कई हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। इससे शहर की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों को भी बड़ा फायदा मिल रहा है।

कारीगरों और किसानों को होगा सीधा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने से स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ती है। इससे कारीगरों और किसानों को बेहतर कीमत मिलती है, नकली उत्पादों पर रोक लगती है और निर्यात के नए अवसर खुलते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

‘वोकल फॉर लोकल’ को मिल रही ताकत

उत्तर प्रदेश सरकार पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। जीआई टैग मिलने से ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही, ओडीओपी (One District One Product) योजना के तहत स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बड़ा बाजार मिलने की संभावना है।

क्यों है यह उपलब्धि खास?

जीआई टैग के मामले में देश में पहला स्थान हासिल करना उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि राज्य के कारीगरों, किसानों और पारंपरिक उद्योगों की मेहनत की पहचान है। आने वाले समय में इससे यूपी के उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने और लाखों लोगों की आय में सुधार होने की उम्मीद है।

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