आदि कैलाश यात्रा अब सालभर: 550 नए होमस्टे तैयार, पीएम मोदी का संकल्प लाया महापरिवर्तन

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आदि कैलाश यात्रा सालभर चलेगी: 550 नए होमस्टे तैयार, PM मोदी ने किया था बड़ा ऐलान

उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में स्थित पवित्र आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा अब साल के बारह महीने यानी सालभर चलेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष निर्देशों के बाद उत्तराखंड प्रशासन ने इस महत्वकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं। इस ऐतिहासिक कदम के तहत उच्च हिमालयी सीमावर्ती गांवों में 550 से अधिक नए होमस्टे तैयार कर लिए गए हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले शिव भक्तों को बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के दिनों में भी ठहरने की उत्तम और सुरक्षित सुविधा मिल सके। यह पूरा बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बड़े ऐलान और विजन का हिस्सा है, जो उन्होंने अक्टूबर 2023 में अपनी आदि कैलाश यात्रा के दौरान किया था। पीएम मोदी ने तब भविष्यवाणी की थी कि आने वाले समय में इस पावन भूमि पर इतनी भारी संख्या में श्रद्धालु आएंगे कि भीड़ को संभालना मुश्किल हो जाएगा। आज उनकी यह बात सच साबित हो रही है और सीमांत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की कायापलट हो चुकी है।

शिवधाम का महापरिवर्तन

परियोजना का नाम – आदि कैलाश एवं ओम पर्वत बारहमासी यात्रा
नया इंफ्रास्ट्रक्चर – वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत 550+ नए होमस्टे का निर्माण
प्रधानमंत्री का ऐलान – अक्टूबर 2023 में आदि कैलाश (जोलिंगकोंग) में ध्यान लगाने के बाद घोषणा
बदलाव का दायरा – पहले 100 किमी पैदल ट्रैकिंग, अब सड़क मार्ग से सीधे एक दिन में दर्शन
रिकॉर्ड तीर्थयात्री – वर्ष 2026 में मात्र 34 दिनों के भीतर 30,000 से अधिक इनर लाइन परमिट जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अक्टूबर 2023 में जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन सीमा पर स्थित पिथौरागढ़ के जोलिंगकोंग पहुंचकर आदि कैलाश के दर्शन किए और वहां डमरू बजाकर ध्यान लगाया, तो उन्होंने सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बदलने का एक नया संकल्प लिया था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि उत्तराखंड का यह क्षेत्र न केवल देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सनातन संस्कृति का एक ऐसा अनुपम केंद्र है जो दुनिया भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचेगा।

पीएम के दौरे से बदला मिजाज

प्रधानमंत्री के इस दौरे के बाद आदि कैलाश (जिसे छोटा कैलाश या बाबा कैलाश भी कहा जाता है) की लोकप्रियता में अप्रत्याशित उछाल आया। पहले जहां इस यात्रा के लिए बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में श्रद्धालुओं को लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती थी, वहीं अब सीमा सड़क संगठन (BRO) और सरकार के प्रयासों से सड़कों का जाल बिछ चुका है। अब श्रद्धालु गाड़ी में बैठकर बेहद कम समय में सीधे भगवान शिव के इस प्रतिरूप के दर्शन कर पा रहे हैं।

‘वाइब्रेंट विलेज’ के तहत 550 होमस्टे: स्थानीय रोजगार को नई उड़ान

यात्रा को सालभर जारी रखने के लिए सबसे बड़ी चुनौती उच्च हिमालयी क्षेत्रों की अत्यधिक ठंड और सर्दियों में होने वाली भारी बर्फबारी थी। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए उत्तराखंड पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन ने केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट विलेज योजना’ के तहत स्थानीय गांवों का विकास किया है।

गुंजी, नाभी, कुटी और नेपालचू गांवों का कायाकल्प

इन सीमावर्ती गांवों में 550 से अधिक पारंपरिक और आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस होमस्टे विकसित किए गए हैं। सर्दियों में तापमान शून्य से काफी नीचे जाने पर भी यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए इन होमस्टे में विशेष हीटिंग सिस्टम और इंसुलेशन की व्यवस्था की जा रही है।

स्थानीय रोजगार का सृजन

होमस्टे संस्कृति से न केवल कुमाऊं की पारंपरिक जीवनशैली, स्थानीय भोजन और संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि पहाड़ों से होने वाले पलायन पर भी पूरी तरह रोक लग रही है। अब स्थानीय ग्रामीण अपने ही घरों में प्रति यात्री बेहतर कमाई कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

रिकॉर्ड तोड़ती श्रद्धालुओं की संख्या

पूर्व में यह यात्रा केवल मई से अक्टूबर के सीमित महीनों के लिए ही खुलती थी। लेकिन हालिया वर्षों में बुनियादी ढांचे में हुए सुधार के कारण श्रद्धालुओं की संख्या ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में यात्रा सीजन के शुरुआती महज 34 दिनों के भीतर ही प्रशासन द्वारा 30,000 से अधिक इनर लाइन परमिट (ILP) जारी किए जा चुके थे। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1,000 से अधिक परमिट जारी किए जा रहे हैं, जो इस मार्ग पर बढ़ते भरोसे और सुरक्षा को दर्शाता है।

चीन पर निर्भरता खत्म: स्वदेशी कैलाश यात्रा का उदय

पारंपरिक रूप से भारतीय श्रद्धालुओं को भगवान शिव के निवास स्थान कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत क्षेत्र पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें कठिन वीजा प्रक्रिया, भारी-भरकम खर्च और कूटनीतिक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता था। आदि कैलाश पूरी तरह से भारतीय भूभाग (उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले) में स्थित है। इसके सालभर खुलने से अब शिव भक्तों को बिना किसी चीनी वीजा या अंतरराष्ट्रीय औपचारिकता के, देश के भीतर ही कैलाश पर्वत के साक्षात दिव्य दर्शन की सुविधा 12 महीने मिल सकेगी।

सर्दियों की यात्रा के लिए प्रशासन की विशेष तैयारियां

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सर्दियों के महीनों में भारी बर्फबारी के दौरान भी सड़कों को तुरंत साफ करने के लिए भारी मशीनरी (स्नो कटर्स) को रणनीतिक स्थानों पर तैनात रखा जाए। इसके अलावा उच्च तुंगता (High Altitude) वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और ठंड जनित बीमारियों से निपटने के लिए धारचूला, गुंजी और जोलिंगकोंग में विशेष स्वास्थ्य केंद्र और मोबाइल मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी।

सुरक्षा बल की तैनाती

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस संवेदनशील सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और यात्रियों की ट्रैकिंग की कमान संभालेंगे। खराब मौसम या आपातकालीन स्थितियों में यात्रियों के त्वरित रेस्क्यू और यात्रा को सुगम बनाने के लिए पिथौरागढ़ और धारचूला से विशेष हेलीकॉप्टर उड़ानों का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है।

धार्मिक पर्यटन से चमकेगी सीमांत की किस्मत

आदि कैलाश और ओम पर्वत की यह बारहमासी यात्रा उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है। इससे न केवल पिथौरागढ़ बल्कि पूरे कुमाऊं क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी। काठगोदाम, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, बागेश्वर और जागेश्वर धाम जैसे पर्यटन पड़ाव भी इस विकास से सीधे लाभान्वित होंगे।

देवभूमि उत्तराखंड का नया सवेरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम है कि आज भारत का अंतिम छोर कहा जाने वाला यह क्षेत्र देश का मुख्य ‘प्रथम क्षेत्र’ बनकर उभरा है। 550 होमस्टे का तैयार होना और यात्रा का सालभर चलना इस बात का प्रमाण है कि विकास जब विरासत के साथ मिलता है, तो प्रगति के नए द्वार खुलते हैं। अब शिव भक्तों के लिए आदि कैलाश के द्वार सदैव खुले रहेंगे, जिससे हिमालय की गोद में बसी इस देवभूमि की दिव्यता पूरी दुनिया में फैलेगी।

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