DGCA Safety for Airstrips: सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने हाल ही में बारामती प्लेन क्रैश के बाद देशभर में लगभग 400 अनियंत्रित हवाई पट्टियों का गहन निरीक्षण शुरू किया है। इस कदम का उद्देश्य उड़ान सुरक्षा मानकों को मजबूती देना और एक समान निगरानी प्रणाली स्थापित करना है। डायरक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और राज्य सरकारें मिलकर इन एयरफील्ड्स की इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करेंगी।
राज्य के पास रखरखाव, DGCA निगरानी से दूर
इस इंस्पेक्शन ड्राइव में यह देखा जाएगा कि की फ्रंटलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन सुविधाएं, आग बुझाने की तैयारी और स्थानीय अधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेशन को कैसे बेहतर किया जा सकता है। वर्तमान में, इनमें से अधिकांश एयरपोर्ट संबंधित राज्यों के स्वामित्व में हैं और उनकी निगरानी नियमित रूप से DGCA द्वारा नहीं की जा रही, जिससे सुरक्षा में कमी आ रही है।
DGCA Safety for Airstrips: बारामती घटना से जागरूकता बढ़ी
यह विशेष जांच और गाइडलाइन्स की व्यवस्था बारामती प्लेन क्रैश के बाद की जा रही है, जिसमें महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोग Tragically निधन हो गए थे। DGCA की टीमों ने कैटेगरी A एयरपोर्ट्स पर सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स की जांच शुरू कर दी है। ये एयरपोर्ट्स ऐसे हैं जहां कोई एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सर्विस नहीं संचालित होती।
DGCA Safety for Airstrips: रेगुलेटरी गैप का समाधान
भारत में लगभग 400 ऐसी एयरपट्टियां हैं जो वर्तमान में DGCA के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर हैं। इनमें से कई एयरफील्ड्स का उपयोग चार्टर एयरक्राफ्ट, राजनीतिक पार्टियों, और फ्लाइट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन्स (FTOs) द्वारा किया जाता है। हालाँकि, इन सेवाओं में बचाव सेवाओं, रनवे के रखरखाव और आवाजाही के तालमेल के लिए मानकीकृत प्रक्रियाएं पूरी तरह से अनुपस्थित हैं।
बदलते समय की मांग
इन अनियंत्रित एयरस्ट्रिप्स में प्रमुख रूप से महाराष्ट्र के बारामती, कराड, और चंद्रपुर, मध्य प्रदेश के उज्जैन और छिंदवाड़ा, बिहार के भागलपुर और बेगूसराय, राजस्थान के अलवर, उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर और सैफई, और कर्नाटक के हसन शामिल हैं। इन सभी एयरपोर्ट्स का प्रयोग राजनीतिक और व्यावसायिक जेट फ्लाइट्स के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि बेसिक सुविधाओं को बनाए रखना कोई महंगा कार्य नहीं है।
आगे का रास्ता
सरकार और DGCA द्वारा उठाए गए इस कदम से सुरक्षा मानकों में सुधार होने की उम्मीद है। हवाई यातायात सुरक्षा को बढ़ावा देना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना मौजूदा परिस्थितियों की मांग है। इन प्रयासों से अनियंत्रित एयरफील्ड्स को लेकर स्थिति में बदलाव होने की संभावना है।
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