केरल में निपाह का खौफ: कोझिकोड में एक मरीज वेंटिलेटर पर, 3 संदिग्ध भर्ती

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केरल में फिर लौटा निपाह वायरस, जानिए प्रभावित क्षेत्र, सरकार के मेडिकल प्रोटोकॉल और बचाव के उपाय

केरल के कोझिकोड जिले में निपाह वायरस के तीन और संदिग्ध मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के मुरलीधरन ने इसकी जानकारी दी और कहा कि उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। वर्तमान में जिले में निपाह का कोई नया मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी और संपर्क ट्रेसिंग का काम जारी है।

केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस की वापसी

केरल में एक बार फिर जानलेवा निपाह वायरस की दस्तक ने स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। कोझिकोड जिले के रामनट्टूकारा (Feroke) के रहने वाले एक 43 वर्षीय व्यवसायी में निपाह संक्रमण की पुष्टि हुई है। शुरुआती जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद, पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) ने भी मामले की पुष्टि कर दी है। मरीज की हालत फिलहाल गंभीर बनी हुई है और उसे कोझिकोड मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (MCH) के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। इसी बीच, जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 3 नए संदिग्ध मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया है। इन संदिग्धों में निपाह जैसे शुरुआती लक्षण दिखने के बाद इन्हें निगरानी (Observation) में रखा गया है और इनके सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं।

गोदाम की सफाई के दौरान संक्रमण की आशंका

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, संक्रमित व्यवसायी ने हाल ही में इलाके में एक पुराना गोदाम (Warehouse) किराए पर लिया था। वह इस घने पेड़ों वाले क्षेत्र में स्थित गोदाम की खुद सफाई कर रहा था, जहां बड़ी संख्या में फ्रूट बैट्स (फल खाने वाले चमगादड़) मौजूद थे। आशंका जताई जा रही है कि सफाई के दौरान वह चमगादड़ों के मल-मूत्र या लार के सीधे संपर्क में आया और संक्रमित हो गया। इसके तुरंत बाद उसे तेज बुखार आया। शुरुआत में उसने निजी अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन दिमागी सूजन (Encephalitis) के लक्षण दिखने पर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

77 लोगों की कांटेक्ट लिस्ट तैयार, 15 ‘हाई रिस्क’ पर

मरीज के पॉजिटिव आने के बाद जिला प्रशासन ने युद्ध स्तर पर कांटेक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ने मरीज का विस्तृत रूट मैप जारी किया है। मरीज के संपर्क में आए 77 लोगों की पहचान की जा चुकी है। इन संपर्कों में 58 स्वास्थ्य कर्मी, 14 परिवार के सदस्य और 5 दोस्त/सहकर्मी शामिल हैं। इनमें से 15 लोगों को ‘हाई-रिस्क’ (उच्च जोखिम) श्रेणी में रखकर सख्त आइसोलेशन (Quarantine) में भेज दिया गया है। राहत की बात यह है कि प्राथमिक संपर्कों में अभी तक बीमारी के गंभीर लक्षण नहीं देखे गए हैं।

प्रशासन की तैयारियां और गाइडलाइंस

स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने स्थिति की समीक्षा के लिए हाई-लेवल बैठक बुलाई है और रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) को सक्रिय कर दिया है। मेडिकल कॉलेज में दवाओं, पीपीई (PPE) किट और विशेष आइसोलेशन वार्डों की पूरी व्यवस्था की गई है। सरकार ने जनता से पैनिक (घबराने) न होने की अपील की है। प्रशासन ने सहायता के लिए विशेष कंट्रोल रूम नंबर्स भी जारी किए हैं-  0495-2373901, 9072007767
क्या है निपाह वायरस और इसके लक्षण?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह एक खतरनाक जूनोटिक वायरस (Zoonotic Virus) है जो जानवरों (मुख्यतः फ्रूट बैट्स) से इंसानों में फैलता है। भारत और बांग्लादेश में पाया जाने वाला इसका स्ट्रेन काफी घातक माना जाता है, जिसकी मृत्यु दर (Mortality Rate) 70% से 90% तक हो सकती है। केरल में इससे पहले 2018, 2019, 2021, 2023 और 2024 में भी निपाह का प्रकोप देखा जा चुका है। अचानक तेज बुखार और सिरदर्द, मांसपेशियों में तेज दर्द और गले में खराश, सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ या खांसी, गंभीर मामलों में दिमागी सूजन (Encephalitis), मानसिक भ्रम या बेहोशी इसके मुख्य लक्षण हैं।

प्रभावित प्रमुख इलाके

केरल सरकार ने कोझिकोड के रामनट्टूकारा और फेरोके (Feroke) के प्रभावित क्षेत्रों में सख्त सर्विलांस शुरू कर दिया है, जबकि पड़ोसी जिले मलप्पुरम के थिरुवली (Thiruvaly) और मम्पैड (Mampad) पंचायतों के 5 वार्डों को आधिकारिक तौर पर कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए व्यापक मेडिकल और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिए हैं। इस संकट से निपटने के लिए घोषित क्षेत्रों और चिकित्सा दिशानिर्देशों का पूरा विवरण नीचे दिया गया है।

घोषित कंटेनमेंट जोन (Containment Zones) की सूची

संक्रमित मरीज के रूट मैप और संपर्कों के आधार पर प्रशासन ने निम्नलिखित क्षेत्रों में सख्त प्रतिबंध लगाए हैं-
मलप्पुरम जिला: थिरुवली (Thiruvaly) और मम्पैड (Mampad) ग्राम पंचायतों के 5 विशिष्ट वार्डों को पूरी तरह सील कर कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है।
कोझिकोड (फेरोके/रामनट्टूकारा): मरीज के प्राथमिक निवास और कार्यस्थल (चमगादड़ प्रभावित पुराना गोदाम) के आस-पास के रेडियस को कड़े सर्विलांस और बफर जोन में रखा गया है। मरीज के रूट मैप के आधार पर फारूक कॉलेज पोस्ट ऑफिस और चुंगम फेरोके के आसपास के क्षेत्रों में विशेष नजर रखी जा रही है।

कंटेनमेंट जोन में लागू पाबंदियां

इन वार्डों में केवल आवश्यक वस्तुओं (दवा और राशन) की दुकानें सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक ही खुल सकेंगी। आंगनवाड़ी केंद्र, बैंक, स्कूल और सरकारी कार्यालय अस्थायी रूप से बंद रहेंगे। बिना आपातकालीन स्थिति के इन क्षेत्रों में आने-जाने (Inward/Outward movement) पर पूर्ण रोक है।

निपाह वायरस से बचाव के मेडिकल प्रोटोकॉल

केरल स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (NCDC टीम) द्वारा जारी आधिकारिक चिकित्सा प्रोटोकॉल इस प्रकार हैं-
कांटेक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटाइन वर्गीकरण: मरीज के संपर्क में आए लोगों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- सर्वोच्च जोखिम (Highest Risk), उच्च जोखिम (High Risk), और निम्न जोखिम (Low Risk)।
आइसोलेशन: उच्च और सर्वोच्च जोखिम वाले संपर्कों के लिए 21 दिनों का अनिवार्य संस्थागत या होम क्वारंटाइन लागू किया गया है।
अस्पताल प्रोटोकॉल: कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में विशेष बायोसेफ्टी लेवल (BSL) आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं, जहां संदिग्धों को सामान्य मरीजों से पूरी तरह अलग रखा जा रहा है।

स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षा निर्देश

संदिग्ध या पुष्ट मरीजों का इलाज करते समय डॉक्टरों और नर्सों के लिए फुल-बॉडी पीपीई (PPE) किट, डबल मास्क (N95) और फेस शील्ड पहनना अनिवार्य है। मरीज के फ्लूइड्स (लार, खून, मूत्र) के सैंपल केवल BSL-4 सुरक्षा मानकों के तहत ही कलेक्ट और ट्रांसपोर्ट किए जा रहे हैं।

डोर-टू-डोर सर्वे और रूट मैप

स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की 50 सदस्यीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों में डोर-टू-डोर सर्वे कर रही हैं ताकि बुखार या फ्लू के लक्षणों वाले किसी भी नए मरीज की तुरंत पहचान की जा सके।

आम जनता के लिए क्लिनिकल एडवाइजरी

मास्क अनिवार्य: कोझिकोड और मलप्पुरम के प्रभावित इलाकों और सभी अस्पतालों में हर व्यक्ति के लिए मास्क पहनना अनिवार्य (Mandatory) कर दिया गया है।
अस्पताल जाने से बचें: बिना किसी गंभीर इमरजेंसी के स्थानीय लोग अस्पतालों में मरीजों से मिलने या भीड़ लगाने से बचें।
चमगादड़ वाले स्थानों से दूरी: पुरानी, बंद पड़ी इमारतों, कुओं या घने पेड़ों वाले क्षेत्रों (जहां चमगादड़ रहते हों) की सफाई बिना सुरक्षात्मक गियर (मास्क, ग्लव्स) के बिल्कुल न करें।

विशेषज्ञों की टीम की मौजूदगी

मंत्री ने बताया कि नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के विशेषज्ञों की एक टीम शनिवार को कोझिकोड पहुंचने वाली है। यह टीम जिले की स्थिति का आकलन करेगी और रोकथाम के लिए किए गए इंतजामों की समीक्षा भी करेगी। यह कदम निपाह वायरस के प्रसार को रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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