‘जूस है या शराब?’ टेट्रा पैक पैकेजिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से किया मना

The CSR Journal Magazine

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: टेट्रा पैक में शराब बेचने की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में टेट्रा पैक में शराब बेचने की अनुमति देने वाली राज्य सरकार की नीति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 16 अप्रैल 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत इस तरह के प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगी।

राज्य सरकार की नीतियों पर अदालत का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में टेट्रा पैक शराब बिक्री के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता मीनाक्षी तिवारी ने इस मामले में अपनी चिंता व्यक्त की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि यह एक प्रशासनिक निर्णय है। कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई से मना करते हुए, संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देने का निर्देश दिया है। इससे पहले, राज्य सरकार ने फरवरी 2025 में टेट्रा पैक में शराब बेचने की अनुमति देने का फैसला किया था।

कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार राज्य की आबकारी नीति में ऐसी पैकेजिंग की कोई स्पष्ट मनाही नहीं है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि 4 फरवरी 2025 का एक प्रशासनिक निर्णय छोटे पैक में शराब की बिक्री की अनुमति देता प्रतीत होता है।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता मीनाक्षी श्री तिवारी की ओर से पेश वकील अशोक पांडे ने तर्क दिया कि टेट्रा पैक दिखने में फलों के रस (जूस) के पैकेट जैसे होते हैं। इस कारण बच्चे इन्हें आसानी से स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों में ले जा सकते हैं, जिससे समाज पर बुरा असर पड़ रहा है और अपराधों में भी वृद्धि हो सकती है।

अभिभावकों की चिंताएं: बच्चों की सुरक्षा का मामला

याचिकाकर्ता मीनाक्षी तिवारी ने कहा कि उनकी बेटी अहमदाबाद में रहती हैं और वहां उन्हें कोई समस्या नहीं दिखी। लेकिन उत्तर प्रदेश में बच्चे टेट्रा पैक शराब को स्कूल के कक्षाओं में ले जाते हैं, जिससे अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इन मामलों को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेट्रा पैक में शराब बेचने की नीति में कोई स्पष्ट अनुमति नहीं है।

कोर्ट का दृष्टिकोण: नीति का अभाव

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि नीति का अध्ययन करने पर टेट्रा पैक में शराब बेचने की कोई स्पष्ट अनुमति नहीं मिली। यह एक नीतिगत फैसला है जिसका कोर्ट पर सुझाव देना उचित नहीं है। हालांकि, याचिकाकर्ता को यह छूट दी गई कि वे अपने मुद्दे को उचित प्रशासनिक प्राधिकारी के समक्ष रख सकते हैं। इससे पहले भी इस मुद्दे पर चिंता जताई जा चुकी है।

अदालत का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को छूट दी कि वे अपनी आपत्तियों के साथ संबंधित राज्य अधिकारियों (State Authorities) के समक्ष अपना ज्ञापन (Representation) प्रस्तुत करें। कोर्ट ने कहा कि यह अधिकारियों का काम है कि वे इन चिंताओं पर विचार करें और निर्णय लें।

शैक्षणिक संस्थानों पर प्रभाव की आशंका

कोर्ट ने कहा कि टेट्रा पैक में शराब की बिक्री का प्रभाव शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों पर पड़ सकता है। यदि इस तरह की शराब स्कूलों में उपलब्ध होती है, तो यह छात्रों के लिए शिक्षा के वातावरण को प्रभावित कर सकती है। अदालत का यह निर्देश इस बात की पुष्टि करता है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।

याचिका का निपटारा: आगे का रास्ता

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश दिया कि वे संबंधित अधिकारियों को अपने ज्ञापन की एक कॉपी दें, ताकि उन पर विचार किया जा सके। इस प्रकार, कोर्ट ने जनहित के दृष्टिकोण से याचिका का निपटारा किया है, लेकिन भविष्य में किसी भी टिप्पणी से बचने की आवश्यकता भी बताई है। इस नीतिगत निर्णय से साफ है कि आगे क्या कदम उठाए जाने हैं।

अंतिम नोट: प्रशासनिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की राय देना ठीक नहीं होगा जब तक कि नीति दस्तावेज नहीं मिलते हैं। इस तरह का प्रशासनिक फैसला ही आगे की दिशा तय करेगा। इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए याचिकाकर्ता को उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा। इससे पहले भी इस विषय पर कई बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन अब प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में टेट्रा पैक में शराब की बिक्री फिलहाल जारी रहेगी, क्योंकि अदालत ने इसे सरकार का एक ‘नीतिगत निर्णय’ माना है। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के लिए प्रशासन के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराने का रास्ता खुला रखा है, जिससे भविष्य में इस पैकेजिंग पर पुनर्विचार की संभावना बनी हुई है।

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