सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप में बच्चों के इस्तेमाल पर रोक की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (25 मई, 2026) को ऑर्केस्ट्रा, डांस ग्रुप, स्पा और मसाज पार्लर में बच्चों व किशोरों के काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।कोर्ट ने इस मामले को “बेहद गंभीर” माना है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस याचिका पर केंद्र सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से भी जवाब मांगा है।
बाल अधिकारों की सुरक्षा का सख्त कदम
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ऑर्केस्ट्रा, डांस ग्रुप और स्पा में बच्चों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई की। इस मामले में आरोप लगाया गया है कि इन क्षेत्रों में नाबालिग लड़कियों का तस्करी, यौन शोषण और जबरदस्ती मजदूरी के लिए का इस्तेमाल हो रहा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
छिपे हुए ठिकाने बन गए हैं ये क्षेत्रों
याचिका में कहा गया है कि ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप जैसे पेशे नाबालिग लड़कियों के लिए “छिपे हुए ठिकानों” में बदल गए हैं। वकील एच.एस. फूलका ने कोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 10 और 11 साल की नाबालिग लड़कियों को इन क्षेत्रों में काम पर रखा जा रहा है, जबकि मसाज पार्लर और स्पा के लिए कुछ राज्यों में न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई है।
मामले की मुख्य बातें और मांगें
बाल अधिकार संगठन ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ (JRCA) द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता एच. एस. फुल्का के माध्यम से दायर इस याचिका में निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं-
कानूनी खामी (Enforcement Vacuum): वर्तमान ‘बाल और किशोर श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986’ (CALPRA) के तहत 14 से 18 वर्ष के किशोरों के लिए स्पा और मसाज पार्लर जैसी जगहों पर काम केवल ‘विनियमित’ (Regulated) है, प्रतिबंधित नहीं। इसके अलावा, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सक्रिय ‘ऑर्केस्ट्रा’ और ‘डांस ग्रुप’ को इस कानून की प्रतिबंधित सूची (Schedule Part A) में शामिल ही नहीं किया गया है।
तस्करी और शोषण का खेल: याचिका में आरोप लगाया गया है कि मानव तस्कर इस कानूनी खामी का फायदा उठाते हैं। वे गरीब और आदिवासी समुदायों से 10 से 16 वर्ष के बच्चों को ग्लैमर, डांस ट्रेनिंग या नौकरी का झांसा देकर फंसाते हैं। बाद में उनसे अश्लील और शोषणकारी तरीके से डांस कराया जाता है और उनका शारीरिक व यौन शोषण होता है।
पूर्ण प्रतिबंध की मांग: याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार कानून की धारा 4 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करे। इसके जरिए 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के ऑर्केस्ट्रा, डांस बार, नौटंकी, स्पा, और सैलून में काम करने को पूरी तरह से प्रतिबंधित (Hazardous Classification) घोषित किया जाए।
बचाव और पुनर्वास के लिए SOP: बच्चों को इन दलदलों से सुरक्षित निकालने और उनके पुनर्वास के लिए एक देशव्यापी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की भी मांग की गई है।
केंद्र को जारी हुए नोटिस
इस गंभीर मामले पर सुनवाई करते हुए तीन जजों की बेंच ने यह कदम उठाया। याचिका में केंद्र से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह ‘बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986’ की धारा 4 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करे। इससे 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए काम पर प्रतिबंध लगाने की उम्मीद है।
शोषण की गंभीर तस्वीर
याचिका में यह भी बताया गया है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुप से बड़ी संख्या में नाबालिगों को बचाया गया है। मार्च 2025 से मई 2026 के बीच चलाए गए अभियान में 212 नाबालिगों को बचाया गया, जिनमें कुछ केवल 12 साल के थे। यह तथ्य बेहद चिंताजनक है, क्योंकि कई बच्चे ऑपरेटरों को 10,000 से 50,000 रुपये में बेचे गए हैं।
कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठा रहे तस्कर
याचिका में यह भी कहा गया है कि तस्कर कानून की अस्पष्टता का फायदा उठाकर बच्चों के लिए कमर्शियल यौन शोषण को कानूनी रोजगार का रूप दे रहे हैं। इन पेशों में बच्चों को काम पर रखने की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और समाज के हर हिस्से को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
संरक्षण का उचित दौर
सीधे तौर पर कहा जाए तो इन पेशों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, यह जरूरी है कि सरकार और संबंधित संगठन मिलकर नाबालिगों के संरक्षण के लिए सख्त कदम उठाएं। बिना सही नियमों के यह आवश्यक है कि इन क्षेत्रों में बच्चों का उपयोग पूरी तरह से बंद किया जाए। वर्तमान समय में यह एक आवश्यक मुद्दा है जिस पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।
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