जंतर-मंतर पर एक्शन, सोनम वांगचुक अस्पताल भेजे गए, भड़का विपक्ष-देश में चल रही तानाशाही

The CSR Journal Magazine

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, विपक्ष ने कहा- कुचला गया लोकतंत्र

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह पर उनकी गिरती सेहत को देखते हुए की गई है, क्योंकि अनशन के कारण उनका वजन करीब 9 किलोग्राम से ज्यादा कम हो चुका था। इस घटना के बाद देश में राजनीतिक घमासान छिड़ गया है और विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर तानाशाही और लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया है।

जंतर मंतर से जबरन हटाए गए सोनम वांगचुक

नई दिल्ली में 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने अस्पताल पहुंचा दिया है। इस घटना के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने इस कार्रवाई को केंद्र सरकार के खिलाफ उठी आवाज़ों को दबाने का प्रयास बताया है। वांगचुक पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें जबरन अस्पताल ले जाने के साथ-साथ वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को भी हटाया। प्रदर्शनकारियों ने विरोध में जमकर नारेबाजी की।

आम आदमी पार्टी का कड़ा विरोध

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्विटर पर इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए लिखा कि यह एक प्रकार की गुंडागर्दी है। उन्होंने कहा, ‘मोदी जी, ये सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं चलता। यही युवा आपके तख़्त को उखाड़कर रख देगा।’ उनका कहना है कि वांगचुक की मांगों को सुनने के बजाय उन्हें जबरन गिरफ्तार कर लिया गया।

समाजवादी पार्टी ने लोकतंत्र पर किया हमला

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कहा कि वांगचुक को ज़बरदस्ती हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलने जैसा है। डिंपल यादव ने कहा कि “सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है। भाजपा सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं है, यह पूरी तरह तानाशाही है।” उन्होंने सरकार की तानाशाही पर भी सवाल उठाए। यादव ने कहा कि बीजेपी अब शांतिपूर्ण विरोध को भी बर्दाश्त नहीं कर सकती।

टीएमसी सांसद की नाराजगी

टीएमसी की सांसद सागरिका घोष ने भी पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह किस तरह की सरकारी हिंसा है? घोष ने मोदी सरकार को ‘नैतिक रूप से दिवालिया’ करार देते हुए इस कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया।

शिवसेना का बयान- दुनिया देख रही है

शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र को किस बेशर्मी से तोड़ा जा रहा है, यह दुनिया देख रही है। आदित्य ठाकरे ने इसे बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि पूरी दुनिया भारत में लोकतंत्र का चीरहरण होते हुए देख रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को बर्दाश्त नहीं करना शर्म की बात है।

संजय सिंह ने सरकार को घेरा

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि मोदी सरकार 20 जुलाई को होने वाले युवाओं और सांसदों के संसद मार्च से बुरी तरह घबरा गई है, इसीलिए सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरन उठाया गया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि छात्रों और युवाओं से जुड़े इस मुद्दे का समाधान नहीं हुआ, तो विपक्ष मानसून सत्र में 20 जुलाई के बाद संसद की कार्यवाही नहीं चलने देगा। शनिवार को दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद संजय सिंह ने सरकार को चौतरफा घेरा।

संसद कूच से डरी सरकार

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन देश के युवाओं, सांसदों और विधायकों से संसद की तरफ शांतिपूर्ण मार्च करने का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री को पता था कि यह आवाज बहुत बड़ी सुनामी बनने वाली है, इसलिए संसद मार्च को दबाने के लिए तड़के ही पुलिसिया कार्रवाई की गई।

युवाओं पर लाठीचार्ज की निंदा

उन्होंने दावा किया कि शनिवार सुबह अचानक भारी पुलिस बल ने जंतर-मंतर को चारों तरफ से घेर लिया। वहां शांतिपूर्ण ढंग से बैठे नौजवानों और आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और वांगचुक को जबरन खींचकर अस्पताल ले जाया गया, जो पूरी तरह गुंडागर्दी और सत्ता का अहंकार है।

पेपर लीक और युवाओं की आवाज

उन्होंने कहा कि 59 वर्षीय वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर थे। वे देश के उन करोड़ों युवाओं की आवाज उठा रहे हैं जिनका भविष्य NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई धांधली से बर्बाद हो चुका है। इतने दिनों में प्रधानमंत्री या सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बात करने तक नहीं आया। आप सांसद ने केंद्र को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा, “मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहता हूँ कि सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उठाए मुद्दों का जल्द समाधान करें, वरना 20 जुलाई के बाद देश की संसद को चलने नहीं दिया जाएगा.” आम आदमी पार्टी मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन में यह मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाएगी।

20 जुलाई को संसद मार्च की तैयारी

सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बावजूद आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने और पीटे जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने रिहा होने के बाद एलान किया कि वे खुद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं और 20 जुलाई का ‘चलो संसद’ मार्च हर हाल में अपने तय शेड्यूल के मुताबिक आगे बढ़ेगा। आम आदमी पार्टी ने न केवल दिल्ली में इस मार्च में शामिल होने का एलान किया है, बल्कि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में भी 20 जुलाई को सोनम वांगचुक के समर्थन में व्यापक प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

जंतर मंतर पर सुरक्षा कड़ी

दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। डीसीपी नई दिल्ली ने बताया कि सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत के कारण उन्हें अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से जगह खाली करें।

आंदोलन और आगे की रणनीति

सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पुलिस ने तड़के सिविल ड्रेस में आकर जंतर-मंतर को खाली कराने की कोशिश की और वॉलंटियर्स के साथ मारपीट भी की, जिसमें कुछ लोगों को चोटें आई हैं।

बढ़ी आंदोलन की आग

वांगचुक को हटाए जाने के विरोध में आंदोलन से जुड़े अन्य नेताओं ने भी अनशन शुरू करने का एलान किया है। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को पूर्व-निर्धारित संसद मार्च को हर हाल में आयोजित करने का संकल्प दोहराया है। दूसरी ओर, अस्पताल पहुंची वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने डॉक्टरों को चेतावनी दी है कि उनकी सहमति के बिना वांगचुक को मुंह या नस के जरिए कोई भी ट्रीटमेंट न दिया जाए।

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