सम्राट चौधरी: बिहार के 24वें मुख्यमंत्री, जानें उनकी कहानी
बिहार की राजनीति में ‘सम्राट’ का उदय कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि दशकों के संघर्ष और सही समय पर सही फैसलों का परिणाम है। 14 अप्रैल, 2026 को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में चर्चा में आए सम्राट चौधरी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वह चेहरे हैं जिन्होंने राज्य में पार्टी को ‘बड़े भाई’ की भूमिका में ला खड़ा किया। एक कद्दावर राजनीतिक विरासत से आने वाले सम्राट ने अपनी पहचान केवल अपने पिता के नाम से नहीं, बल्कि अपने आक्रामक तेवर और कुशल संगठन क्षमता से बनाई है।
शुरुआत RJD से, अब बन गए सीएम
सम्राट चौधरी को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है। उन्होंने अपने सियासी करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की थी। 1999 में वह राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्रियों में से एक बने। सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी बिहार के प्रमुख नेताओं में से एक माने जाते हैं। सम्राट ने RJD में रहते हुए राजनीतिक कुशलता सीखी, बाद में वह नीतीश कुमार के साथ आए और JD-U में शामिल होकर मंत्री पद संभाला। सम्राट चौधरी के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 2017 में आया जब उन्होंने BJP का दामन थामा। भाजपा ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी सौंपी। यह बदलाव उनके लिए नया अवसर लेकर आया है और अब बिहार को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है।
राजनीति में कम उम्र में प्रवेश
सम्राट चौधरी ने मात्र 19 वर्ष की उम्र में पहली बार मंत्री पद संभाला था। कानूनी विवाद के चलते उन्हें उस समय मंत्री पद से हटा दिया गया। इस घटना ने उनकी राजनीति में एक नया मोड़ दिया। सम्राट पूर्व में आरजेडी के कृषि राज्य मंत्री थे, लेकिन उम्र को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के कारण उन्हें बर्खास्त किया गया।
शिक्षा और परिवार का योगदान
16 नवंबर 1968 को बिहार के मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में जन्मे सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी बिहार की राजनीति के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। सम्राट को राजनीति विरासत में मिली थी, लेकिन उनकी राह आसान नहीं थी। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति की बारीकियों को सीखना शुरू कर दिया था। सम्राट के पिता शकुनी चौधरी समाजवादी नेता माने जाते थे। सम्राट की पढ़ाई और शिक्षा को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने पिता के मार्गदर्शन को सर्वोत्तम माना। उनकी पत्नी का नाम ममता कुमारी है और उनके दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी।
नए राज्यपाल का निर्णय और बर्खास्तगी
सम्राट चौधरी की बर्खास्तगी का निर्णय तब लिया गया जब राज्यपाल सूरजभान ने उनके उम्र से जुड़ी जानकारी की जाँच करने का आदेश दिया था। उनके दस्तावेज़ में उम्र को लेकर जितनी विसंगतियाँ थीं, वे सभी समय-समय पर विवाद का कारण बनीं। उनकी उम्र को लेकर उठे सवालों ने उनके राजनीतिक जीवन पर जोरदार प्रभाव डाला।
नए मिथकों को तोड़ते हुए
सम्राट चौधरी पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो मंत्री पद से हटने के बाद फिर से इस ऊँचाई तक पहुँचे हैं। उनके लिए यह सफर आश्चर्यजनक रहा है। बिहार में सिर्फ कर्पूरी ठाकुर ही एक ऐसे नेता थे जिन्होंने पहले उपमुख्यमंत्री रहते हुए बाद में सीएम बनने का गौरव पाया, अब उस सूची में सम्राट चौधरी का नाम भी जुड़ गया है।
पगड़ी’ का संकल्प और संघर्ष
सम्राट चौधरी हाल के वर्षों में अपनी ‘मुरैठा’ (पगड़ी) के लिए प्रसिद्ध हुए। उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक वह नीतीश कुमार की सरकार को उखाड़ नहीं फेंकेंगे, तब तक अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे। हालांकि, बदलते राजनीतिक समीकरणों में वह पहले उपमुख्यमंत्री बने और अब अप्रैल 2026 में, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद, वह मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे निकलकर उभरे।
जातीय समीकरण और नेतृत्व
सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोइरी) समुदाय से आते हैं। बिहार की राजनीति में ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कोइरी) समीकरण हमेशा से सत्ता की चाबी रहा है। भाजपा ने सम्राट को आगे कर इस बड़े वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित किया, जिससे वह राज्य के सर्वमान्य नेता बनकर उभरे।
कई दलों का अनुभव
सम्राट चौधरी का राजनीतिक जीवन कई दलों में घूमता रहा है। वे पहले राष्ट्रीय जनता दल में, फिर जनता दल (यूनाइटेड) में और अंत में बीजेपी में शामिल हुए। उनके अनुभव ने उन्हें राजनीतिक परिपक्वता दी है। इस दौरान, उन्होंने कई विवादों का सामना किया लेकिन अंततः उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत किया।
भविष्य की चुनौतियाँ
सम्राट चौधरी के लिए अब नई चुनौतियाँ सामने हैं। उनके नेतृत्व में बिहार को विकास की नई दिशा मिल सकती है, लेकिन उनसे जुड़े विवाद और मुद्दे उनके लिए चुनौती बने रहेंगे। आगामी विधानसभा चुनावों में उनकी पेशेवर छवि को लेकर भी कई सवाल उठाए जाएंगे। यही नहीं, उनकी डिग्री और अन्य शैक्षणिक पहलुओं पर भी उंगली उठाई जाएगी। सम्राट चौधरी की कहानी एक ऐसे नेता की कहानी है जिसने सत्ता के गलियारों में अपनी जगह खुद बनाई। राजद और जदयू जैसे क्षेत्रीय दलों से होते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचना उनकी राजनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल न केवल भाजपा के लिए एक नई परीक्षा होगी, बल्कि यह भी तय करेगा कि बिहार विकास और सुशासन के पथ पर कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।
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