जेल में बंद आजम खान, यूपी चुनाव में हर बार क्यों बन जाते हैं हॉट टॉपिक?

The CSR Journal Magazine
जौहर यूनिवर्सिटी के 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश अब आजम खान की सियासी चर्चा का नया विषय बन गया है। उत्तर प्रदेश में चुनावी मौसम में जब भी आजम का नाम आता है, वह सुर्खियों में आ जाते हैं। समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता आजम खान का यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब विवादों में नजर आ रहा है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की कई इमारतों को बिना मान्यता प्राप्त नक्शे के बनवाने का आरोप लगाते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया है। उनके मुताबिक केवल दो इमारतों का ही नक्शा वैध है।

आजम खान का सियासी सफर

आजम खान ने 1970 के दशक में राजनीति में कदम रखा और 1980 में पहली बार विधायक बने। वह समाजवादी पार्टी में शामिल होकर कई बार महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार संभाल चुके हैं। रामपुर से विधायक रह चुके आजम खान ने पिछले कई चुनावों में सस्ती लोकप्रियता हासिल की है। उनकी राजनीति का सफर चुनावी माहौल में ही अटका हुआ है।

चुनावों में नया मोड़

आजम खान की सियासी स्थिति पिछले लोकसभा चुनावों के बाद से कुछ हद तक कमजोर हुई है। 2019 में उनके द्वारा अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों ने उन्हें विवाद में डाल दिया था। फिर भी, 2022 में उन्होंने जेल में रहकर चुनाव लड़ा और रामपुर से विधायक बने। अब उनके ऊपर गैरकानूनी निर्माण के आरोप लग रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति फिर से चर्चा का विषय बनी है।

जेल में रहते हुए भी प्रभाव

आजम खान अभी रामपुर जेल में दोहरे पैन कार्ड रखने के आरोप में सजा काट रहे हैं। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम भी यह सजा भोग रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में भी आजम खान का असर यूपी की राजनीति पर बरकरार है। रामपुर जिले की पांच विधानसभा सीटों पर उनका सीधा प्रभाव है, और मुस्लिम मतों पर उनकी पकड़ अब भी मजबूत है।

जौहर यूनिवर्सिटी पर सरकार की कार्रवाई

जौहर यूनिवर्सिटी पर सरकार की कार्रवाई का उद्देश्य यह साबित करना है कि सभी कानूनों का पालन होना चाहिए। इसके पीछे की सोच यह है कि अवैध निर्माणों को नकारा जाए। इस कार्रवाई से समाजवादी पार्टी और आजम खान पर क्या असर होगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

सियासत में आजम खान का स्थान

आजम खान की मुस्लिम समुदाय में गहरी पैठ है। हालाँकि, पिछले मामलों के चलते उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर पड़ी है, फिर भी उनका प्रभाव खत्म नहीं हुआ है। यूपी विधानसभा चुनावों में आजम खान की लोकप्रियता उन्हें फिर से हॉट टॉपिक बना रही है। उनके खिलाफ की गई कार्रवाइयों का असर भाजपा को भी दिख सकता है।

मतदाता समर्थन की संभावना

यदि जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई होती है, तो समाजवादी पार्टी इसे एक और मुद्दा बनाएगी। पार्टी मुस्लिम समुदाय में सहानुभूति जगाने की कोशिश कर सकती है। इससे BJP को संभावित नुकसान हो सकता है। चुनावी मौसम में आजम खान का नाम अभी भी सियासी चर्चा में गरमागरम है।

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