Ram Mandir First FIR Champat Rai: चंदा-चपत मामले में बड़ा मोड़, पहली FIR दर्ज, लेकिन चंपत राय का नाम नहीं

The CSR Journal Magazine
राम मंदिर के चढ़ावे और दानराशि में कथित अनियमितताओं को लेकर मचे राजनीतिक और धार्मिक विवाद के बीच अब पहली एफआईआर दर्ज हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि जिस मामले में कई दिनों से राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को विपक्ष निशाने पर ले रहा था, उस एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं है। पुलिस ने पांच लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जबकि जांच का दायरा अब वित्तीय रिकॉर्ड, दान प्रबंधन और ट्रस्ट के अकाउंट सिस्टम तक बढ़ता दिख रहा है।

कौन है वो 8 आरोपी, जिन्होंने राम मंदिर में डाला डाका

कृष्णमोहन की तहरीर पर दर्ज एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और मनीष यादव को आरोपी बनाया गया है। यह कार्रवाई एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

चंपत राय पर सियासी हमला, लेकिन FIR में नाम नहीं

इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लगातार चंपत राय की भूमिका पर सवाल उठाए थे। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी हाल ही में एसआईटी को कई दस्तावेज सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन अब तक दर्ज हुई पहली एफआईआर में चंपत राय का नाम नहीं है। यही कारण है कि मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। एक पक्ष इसे चंपत राय के खिलाफ लगाए गए आरोपों की कमजोरी बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कह रहा है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और अंतिम निष्कर्ष निकलना बाकी है।

Ram Mandir First FIR Champat Rai: SIT की नजर अब सिर्फ चोरी पर नहीं

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार एसआईटी केवल कथित चोरी या गबन की घटनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती। टीम अब दान पेटियों से लेकर बैंक खातों तक पूरे सिस्टम की जांच कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही थी, तब चढ़ावे की राशि में अपेक्षित बढ़ोतरी क्यों नहीं दिखी। यही बिंदु एसआईटी की जांच का केंद्र बन गया है। सूत्र बताते हैं कि अब ट्रस्ट के अकाउंट सिस्टम, आय-व्यय के रिकॉर्ड, दान संग्रहण प्रक्रिया और जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जाएगी। इससे साफ है कि जांच का दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो चुका है।

Ram Mandir First FIR Champat Rai: क्या कहती है पहली FIR?

एफआईआर से इतना जरूर स्पष्ट होता है कि जांच एजेंसियों को शुरुआती स्तर पर कुछ व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध लगी है। इसलिए कानूनी कार्रवाई की शुरुआत निचले स्तर के आरोपियों से हुई है। लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि जांच यहीं तक सीमित रहेगी। एसआईटी की टीम प्रारंभिक रिपोर्ट लेकर लखनऊ जा चुकी है और माना जा रहा है कि अगले चरण में फिर अयोध्या पहुंचकर पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और वित्तीय ऑडिट जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा निष्कर्ष यही है कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में पहली एफआईआर तो दर्ज हो गई है, लेकिन जिस चंपत राय के नाम पर सबसे ज्यादा राजनीतिक शोर था, उनका नाम अभी तक किसी एफआईआर में नहीं आया है। अब सबकी नजर एसआईटी की अगली रिपोर्ट और ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच पर टिकी हुई है।
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