Rajasthan में किशोर गर्भावस्था का बढ़ता संकट, बच्चों की सेहत पर गंभीर चिंता

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) की हालिया रिपोर्ट ने राजस्थान में स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में किशोर गर्भावस्था की बढ़ती दर, संस्थागत प्रसव में कमी, बच्चों की पोषण स्थिति में गिरावट और टीकाकरण में खतरनाक कमी को उजागर किया गया है। दल के अनुसार, राजस्थान में कम उम्र में गर्भवती होने वाली महिलाओं का आंकड़ा देश में सबसे ज्यादा है। यह चिंता की बात है, क्योंकि यह युवाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।

किशोर गर्भावस्था दर में वृद्धि

NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार, 15 से 19 साल की लड़कियों में किशोर गर्भावस्था दर 3.7% से बढ़कर 4.7% हो गई है। यह आंकड़ा पिछले सर्वे (NFHS-5) के दौरान 2019-21 में एकत्रित किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती किशोर गर्भावस्था दर केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह बाल विवाह और सामाजिक ताने-बाने की समझ की कमी से भी प्रभावित है।

गर्भनिरोधक के उपयोग में कमी

रिपोर्ट में गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग में गिरावट भी देखी गई है। जहां पहले 62.1% महिलाएं आधुनिक गर्भनिरोधक का प्रयोग कर रही थीं, अब यह घटकर 57.1% पर आ गई है। हालांकि, पारंपरिक विधियों का उपयोग बढ़ा है, जिससे कुल गर्भनिरोधक उपयोग में मामूली वृद्धि देखने को मिली है। यह स्थिति भी चिंताजनक है, क्योंकि यह संकेत देती है कि महिलाएं सुरक्षित स्वास्थ्य विकल्पों से दूर हो रही हैं।

सिजेरियन डिलीवरी में बढ़ोतरी

NFHS-6 की रिपोर्ट में संस्थागत प्रसव में भी गिरावट देखने को मिली है। अस्पतालों में होने वाले प्रसव का प्रतिशत 94.9% से घटकर 94.1% हो गया है, खासकर सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में। वहीं, सीजेरियन प्रसव के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जो 10.4% से बढ़कर 15.6% हो गई है। यह आंकड़ा स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में कमी की ओर इशारा करता है।

बच्चों के पोषण का बिगड़ता स्तर

बच्चों के पोषण स्तर को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में केवल स्तनपान की दर 70.4% से गिरकर 54.3% हो गई है। इसके अलावा, 5 साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण का स्तर भी गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। यह स्थिति बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकती है।

टीकाकरण में कमी

NFHS-6 के आंकड़ों में बच्चों के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की स्थिति भी चिंताजनक है। 12 से 23 महीने के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत 85.3% से घटकर 75.0% रह गया है। बीसीजी, पेंटावेलेंट वैक्सीन और खसरे के टीकों में भी गिरावट आई है। जन स्वास्थ्य अभियान ने इस गिरावट को स्वास्थ्य सेवा की पहुंच में गंभीर कमी के रूप में देखा है।

सुरक्षित भविष्य की मांग

इन चिंताजनक आंकड़ों के बाद, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री को 50 से अधिक सामाजिक संगठनों ने पत्र लिखा है। इन संगठनों ने सरकार से मांग की है कि NFHS-6 में सुधार के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए

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