राजनीति से तौबा, फिर भी तमिलनाडु की सियासत के केंद्र में तृषा कृष्णन

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तृषा कृष्णन: राजनीति से दूर रहने के बावजूद तमिलनाडु की सियासत में क्यों बनीं चर्चा का विषय?

दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री तृषा कृष्णन ने खुद को हमेशा राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और किसी भी दल की सदस्यता से पूरी तरह दूर रखा है, लेकिन इसके बावजूद वह लगातार तमिलनाडु की राजनीति और सत्ता के गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालिया दिनों में द्रमुक (DMK) के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी के बाद तृषा का नाम एक बार फिर राज्य के सबसे बड़े सियासी बवंडर के केंद्र में आ गया है। तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा और सियासत का रिश्ता दशकों पुराना है, मगर तृषा कृष्णन का मामला बिल्कुल अलग है। उन्होंने न तो कोई राजनीतिक दल बनाया है और न ही कभी सक्रिय रूप से वोट मांगे हैं, फिर भी विरोधी दलों की राजनीतिक जंग में उनका नाम एक अचूक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

ताजा विवाद: उदयनिधि स्टालिन की तृषा पर टिप्पणी

तमिलनाडु की राजनीति में ताजा भूचाल उस समय आया जब तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर बेहद आपत्तिजनक और ‘डबल मीनिंग’ (द्विअर्थी) टिप्पणी करने का संगीन आरोप है, जिसके बाद पुलिस ने उन पर छह गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह घटना तब घटी जब उदयनिधि स्टालिन जनसभा में तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री और ‘तमिलागा वेत्री कड़गम’ (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) पर राजनीतिक हमला बोल रहे थे। इसी दौरान रैली में मौजूद उत्साही भीड़ ने सुपरस्टार विजय की हिट ऑन-स्क्रीन पार्टनर “तृषा, तृषा” के नारे लगाने शुरू कर दिए।

उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी

भीड़ को शांत करने या राजनीतिक मुद्दे पर टिके रहने के बजाय उदयनिधि स्टालिन ने मर्यादा की सीमा लांघते हुए कहा, “पानी कहीं और पहुंचे या न पहुंचे, वहां जरूर पहुंचना चाहिए।” हालांकि, विवाद बढ़ने पर स्टालिन ने सफाई दी कि उनका इशारा केवल कावेरी नदी के पानी की ओर था, लेकिन राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों, महिला संगठनों और विपक्षी दलों ने इस टिप्पणी को घोर महिला विरोधी और अश्लील करार दिया। मद्रास हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत न मिल पाने के कारण पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।

सिनेमाई जोड़ी जो बनी राजनीतिक हमलों का केंद्र

तृषा कृष्णन के राजनीति में घसीटे जाने की सबसे बड़ी वजह सुपरस्टार और मुख्यमंत्री थलापति विजय के साथ उनका लंबा और बेहद सफल करियर है। विजय और तृषा ने तमिल सिनेमा इतिहास की कुछ सबसे ब्लॉकबस्टर फिल्मों जैसे ‘घिल्ली’, ‘थिरुपाची’, ‘आथि’, ‘कुरुवी’ और हालिया फिल्म ‘लियो’ में साथ काम किया है। बड़े पर्दे पर उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों का अगाध प्यार मिला है, लेकिन यही लोकप्रियता अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए कीचड़ उछालने का जरिया बन चुकी है। चूंकि विजय ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी (TVK) बनाकर सत्ता की बागडोर संभाली है, विरोधी दल लगातार विजय की व्यक्तिगत जिंदगी और तृषा कृष्णन के साथ उनके जुड़ाव को लेकर झूठी अफवाहों को तूल दे रहे हैं। हाल ही में विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ के रिलीज होने पर तृषा अपनी मां उमा कृष्णन के साथ चेन्नई के एक थिएटर में फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने पहुंची थीं, जिसे राजनीति से जोड़कर प्रचारित किया गया।

इतिहास खुद को दोहरा रहा है: एवी राजू और नैनार नागेंद्रन के विवाद

यह पहली बार नहीं है जब तृषा को तमिलनाडु के राजनेताओं ने अपने बयानों में निशाना बनाया हो। तृषा के खिलाफ राजनीतिक हमलों का एक लंबा और कड़वा इतिहास रहा है।

एवी राजू (पूर्व अन्नाद्रमुक नेता) विवाद (2024)

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) से निष्कासित नेता एवी राजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृषा के खिलाफ बेहद घटिया और मानहानिकारक दावा किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुवथुर रिज़ॉर्ट विवाद के दौरान विधायकों के मनोरंजन के लिए एक बड़ी रकम देकर तृषा को वहां बुलाया गया था। इस पर तृषा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कानूनी नोटिस भेजा और मानहानि का मुकदमा दायर किया, जिसके बाद राजू को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी।

नैनार नागेंद्रन (भाजपा नेता) विवाद (फरवरी 2026)

इस साल की शुरुआत में तमिलनाडु भाजपा के नेता नैनार नागेंद्रन ने भी विजय पर तंज कसते हुए कहा था कि विजय को राजनीति में सफल होने के लिए “अभिनेत्री तृषा के घर से बाहर निकलकर” जमीन पर काम करना चाहिए। इस पर भी राज्य में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था।राजनीतिक दलों के बीच सीटों और उपचुनावों को लेकर अफवाहेंतृषा का नाम राजनीतिक हलकों में केवल विवादों के लिए ही नहीं, बल्कि चुनावी अटकलों के लिए भी उछाला जाता है। कुछ महीने पहले जब मुख्यमंत्री विजय ने त्रिची ईस्ट (तिरुचिरापल्ली पूर्व) विधानसभा सीट खाली की थी, तब राजनीतिक गलियारों में यह झूठी अफवाह तेजी से फैली कि विजय की पार्टी TVK इस सीट से तृषा कृष्णन को उपचुनाव में उतारने जा रही है। इसके जवाब में सत्तारूढ़ खेमे में इतनी घबराहट फैल गई थी कि द्रमुक (DMK) ने आनन-फानन में प्रस्ताव पारित कर अपने शीर्ष नेतृत्व को वहां से चुनाव लड़ने का आग्रह तक कर डाला था। हालांकि, ये तमाम बातें महज सियासी अफवाहें साबित हुईं।

तृषा कृष्णन का सख्त रुख: “मुझे सिर्फ मेरे काम से जाना जाए”

लगातार राजनीति के दलदल में घसीटे जाने के बाद, तृषा कृष्णन ने अपने कानूनी सलाहकार नित्याश नटराज के माध्यम से एक बेहद सख्त और स्पष्ट आधिकारिक बयान जारी किया है। तृषा ने अपने संदेश में साफ किया है-
राजनीतिक तटस्थता: वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हैं और न ही भविष्य में किसी दल में शामिल होने की उनकी कोई योजना है। वह राजनीति में पूरी तरह से एक तटस्थ रुख रखती हैं।
कला को प्राथमिकता: तृषा ने कहा, “मैं चाहती हूं कि मुझे केवल मेरी कला (अभिनय) के लिए जाना और पहचाना जाए, न कि किसी काल्पनिक राजनीतिक जुड़ाव के लिए।”
निजता का सम्मान: उन्होंने राजनेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को अपनी भाषा में गरिमा बनाए रखनी चाहिए और किसी भी महिला के निजी जीवन को सार्वजनिक बहस या राजनीतिक लड़ाई का जरिया नहीं बनाना चाहिए।

फिल्म इंडस्ट्री और जनता का मिला भारी समर्थन

उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी और गिरफ्तारी के बाद पूरी साउथ फिल्म इंडस्ट्री तृषा के समर्थन में उतर आई है। मशहूर गायिका चिन्मयी श्रीपदा और वरिष्ठ अभिनेत्री खुशबू सुंदर सहित कई फिल्मी हस्तियों ने उदयनिधि के बयान की तीखी आलोचना की है। चिन्मयी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अपनी राजनीतिक लड़ाइयों और निजी कुंठाओं को निकालने के लिए उन महिलाओं को निशाना बनाना बेहद शर्मनाक है, जिनका राजनीति से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। वहीं, दक्षिण भारतीय फिल्म कर्मचारी संघ (FEFSI) ने भी सरकार और कानून व्यवस्था से मांग की है कि राजनीतिक मंचों से अभिनेत्रियों के चरित्र पर कीचड़ उछालने वाले नेताओं के खिलाफ कठोरतम कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए किसी महिला की गरिमा से खिलवाड़ न कर सके।

तमिलनाडु की सियासत में सिनेमा

तमिलनाडु की सियासत में तृषा कृष्णन का नाम बार-बार आना इस बात का सबूत है कि राज्य की राजनीति आज भी पूरी तरह से सिनेमा के इर्द-गिर्द घूम रही है। हालांकि, तृषा ने बार-बार कानूनी कदम उठाकर और कड़े बयान जारी कर यह साबित कर दिया है कि वह अपनी प्रतिष्ठा से समझौता नहीं करेंगी। राजनीति से उनकी यह दूरी और उनका बेबाक अंदाज ही उन्हें बिना किसी राजनैतिक पद के भी तमिलनाडु की राजनीति के सबसे प्रभावशाली और चर्चित चेहरों में से एक बनाए हुए है।

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