दिल्ली छात्र प्रदर्शन और RAF: भीड़ नियंत्रण से लेकर हिंसक झड़पों के विवाद तक की पूरी कहानी

The CSR Journal Magazine

छात्रों के प्रदर्शन को नियंत्रित करने का जिम्मा, जानिए रैपिड एक्शन फोर्स का काम

दिल्ली में हाल ही में नीट-पेपर लीक के मामले में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF का नाम चर्चा में आया है। लोग जानना चाहते हैं कि नीली वर्दी पहने ये जवान आखिर कब, कहां और क्यों तैनात होते हैं। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच, जहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग हो रही है, वहीं RAF की निर्मम कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

क्या है रैपिड एक्शन फोर्स (RAF)?

RAF की तैनाती की प्रक्रियारैपिड एक्शन फोर्स (RAF) यानी ‘द्रुत कार्य बल’ भारत के केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की एक बेहद खास और संवेदनशील दंगा-रोधी विंग है, जिसे मुख्य रूप से देश में दंगों, सांप्रदायिक हिंसा और उग्र विरोध प्रदर्शनों जैसी भीड़-भाड़ वाली आपातकालीन स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। इस बल की स्थापना 11 दिसंबर 1991 को हुई थी, लेकिन यह पूरी तरह से 7 अक्टूबर 1992 को क्रियाशील (Operational) हुआ। इसकी खास पहचान इसके जवानों की नीली छलावरण (Camouflage) यूनिफॉर्म है, जो शांति का प्रतीक मानी जाती है।

रैपिड एक्शन फोर्स के मुख्य कार्य- भीड़ और दंगा नियंत्रण

RAF का प्राथमिक काम हिंसक भीड़, सांप्रदायिक दंगों और किसी भी बड़े नागरिक असंतोष को शांत करना है। चाहे वह छात्रों का उग्र प्रदर्शन हो या कोई राजनीतिक आंदोलन, आरएएफ कानून-व्यवस्था बहाल करने का मोर्चा संभालती है। इस बल का मुख्य सिद्धांत “कम से कम बल और अधिकतम संयम” है। ये भीड़ को बिना कोई स्थायी नुकसान पहुंचाए तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, रबर की गोलियां, वाटर कैनन (पानी की बौछार) और लाठी चार्ज जैसे गैर-घातक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

त्वरित कार्रवाई (Zero Response Force)

RAF को एक ‘क्विक रिएक्शन टीम’ की तर्ज पर तैयार रखा जाता है। संकट की सूचना मिलते ही यह बल न्यूनतम समय में मौके पर पहुंचकर स्थिति को काबू में ले लेता है। RAF की प्रत्येक कंपनी में महिला जवानों की एक विशेष टीम होती है, जो महिला प्रदर्शनकारियों या छात्रों के आंदोलन के दौरान स्थिति को संवेदनशीलता से संभालती है।

राहत एवं बचाव कार्य

सांप्रदायिक तनाव को रोकने के अलावा, प्राकृतिक आपदाओं (जैसे बाढ़, भूकंप या चक्रवात) के समय भी RAF मानवीय चेहरा पेश करते हुए तुरंत बचाव और राहत अभियान चलाती है। देश में बड़े त्योहारों, चुनावों या अति-संवेदनशील दौरों के समय सुरक्षा बनाए रखने और शांति सुनिश्चित करने के लिए भी इन्हें तैनात किया जाता है।

RAF की संगठनात्मक संरचना

वर्तमान में RAF के पास 15 बटालियनें हैं, जो देश के अलग-अलग संवेदनशील शहरों में रणनीतिक रूप से तैनात हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद भेजी जा सके। आरएएफ की कमान एक पुलिस महानिरीक्षक (IGP) के हाथों में होती है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में इनकी एक विशेष अकादमी भी है, जिसे ‘आरएएफ लोक व्यवस्था अकादमी’ (RAPO) कहा जाता है, जहां भीड़ मनोविज्ञान और दंगों से निपटने की खास ट्रेनिंग दी जाती है।

नीली वर्दी का महत्व

RAF के जवानों की पहचान उनकी नीली वर्दी से होती है, जिसे शांति का प्रतीक माना जाता है। RAF का टैगलाइन है ‘संवेदनशील पुलिसिंग के साथ मानवता की सेवा’। इस फोर्स का कार्य सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि जरूरत पर आम लोगों की मदद करना भी होता है। ये जवान कभी भी किसी स्थिति में फुर्ती से काम करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं।

दिल्ली में RAF की तैनाती

दिल्ली में RAF के जवानों की तैनाती सबसे अधिक क्यों होती है? इसकी वजह राजधानी का होना है, जहां अक्सर विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं। यहां संवेदनशील स्थलों की संख्या अधिक है, जैसे कि संसद, राष्ट्रपति भवन, और विदेशी दूतावास। ऐसे में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए RAF की तैनाती की जाती है।

दिल्ली छात्र आंदोलन में RAF पर आरोप

दिल्ली छात्र आंदोलन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की भारी चर्चा मुख्य रूप से NEET परीक्षा लीक विवाद के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के “संसद चलो” मार्च के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तीखी हिंसक झड़पों और वायरल वीडियो के कारण हो रही है। जंतर-मंतर, मंडी हाउस और कनॉट प्लेस जैसे इलाकों में बिगड़ी स्थिति को काबू करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ RAF को तैनात किया गया था।

RAF जवानों पर हिंसक हमला (Mob Assault)

सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और खबरें वायरल हुईं जिनमें प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ द्वारा कनॉट प्लेस और टॉल्स्टॉय मार्ग पर RAF के जवानों को घेरकर, दौड़ाकर पीटने और तलवार व लाठियों से हमला करने के आरोप लगे। इस हमले में RAF के कई कर्मी और असिस्टेंट कमांडेंट घायल हुए, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने जानलेवा हमले और दंगे की धाराओं में कई FIR दर्ज की हैं।

भारी लाठीचार्ज और बल प्रयोग के आरोप

दूसरी तरफ, छात्र प्रदर्शनकारियों और विपक्षी संगठनों का आरोप है कि RAF और पुलिस ने शांतिपूर्ण मार्च पर अंधाधुंध लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस झड़प में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

तंज भरे ताली बजाने का वीडियो

सोशल मीडिया पर एक खास वीडियो तेजी से ट्रेंड हुआ, जिसमें लाठीचार्ज के बाद वापस लौट रहे RAF के जवानों को देखकर प्रदर्शनकारी छात्र तंज कसते हुए तालियां बजाते दिखे। छात्रों का कहना था कि वे बल प्रयोग करने के लिए जवानों का मजाक उड़ा रहे थे।

बिना नेम बैज (Name Badges) के तैनाती पर विवाद

प्रदर्शन के दौरान कई वीडियो में कुछ RAF जवान बिना नेम प्लेट या पहचान बैज के दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर यूजर्स और छात्रों ने इस पर गंभीर सवाल उठाए कि बिना पहचान के जवानों को कानून-व्यवस्था संभालने के लिए क्यों तैनात किया गया। संसद के मानसून सत्र के दौरान इस छात्र आंदोलन ने राजनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद उग्र रूप ले लिया, जिसके चलते इस पूरे घटनाक्रम में RAF की भूमिका और उन पर हुए हमले दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चर्चा का विषय बन गए हैं।

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