NEET री-एग्जाम का पेपर दिलाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी, 1000 से ज्यादा छात्रों से लाखों वसूलने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने NEET UG री-एग्जाम (RE-NEET 2026) के नाम पर देश भर के 1,000 से अधिक छात्रों और अभिभावकों से लाखों रुपये ठगने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच के मुताबिक, यह कोई वास्तविक पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि छात्रों की मजबूरी का फायदा उठाकर की गई एक बड़ी ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी है।
साइबर क्राइम ब्रांच ने खोला बड़ा ठगी का मामला
अहमदाबाद की साइबर क्राइम ब्रांच ने नीट-यूजी के री-एग्जाम से पहले एक बड़े ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने राजस्थान और बिहार से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने 21 जून को होने वाले नीट री-एग्जाम और अन्य परीक्षाओं के पेपर दिलाने का झांसा देकर 1000 से ज्यादा स्टूडेंट्स और पेरेंट्स से लाखों रुपये वसूले।
गिरोह का पर्दाफाश और गिरफ्तारियां
पुलिस ने जयपुर से सुमेर सिंह भरतलाल मीणा और कोटा से आकाश पप्पूलाल मीणा को गिरफ्तार किया है। ये दोनों टेलीग्राम पर फर्जी चैनल्स चलाकर री-नीट का ‘असली पेपर’ देने का दावा करते थे। तीसरे आरोपी नवीन कुमार यादव (19 वर्ष) को पटना से गिरफ्तार किया गया है। वह छात्रों से लॉगिन आईडी और पासवर्ड लेकर नीट परीक्षा फीस रिफंड कराने के नाम पर अलग से ठगी कर रहा था। आरोपी टेलीग्राम पर ‘Raghav_singh_neet’ जैसे फर्जी नामों से ग्रुप चलाते थे। ग्रुप में 400 से अधिक सदस्य जुड़ने पर उनके ही साथी नकली छात्र बनकर मैसेज करते थे कि उन्हें असली पेपर मिल गया है, जिससे अन्य छात्र झांसे में आ जाएं।
झांसे में आए छात्र और पेरेंट्स
राजस्थान से गिरफ्तार आरोपियों में सुमेरसिंह मीना और आकाश मीना शामिल हैं। ये टेलीग्राम चैनलों और वेबसाइटों के जरिए पेपर दिलाने का दावा कर रहे थे। इसके लिए स्टूडेंट्स से 15,000 से 80,000 रुपये तक की वसूली की जाती थी। वहीं, बिहार से गिरफ्तार आरोपी नवीन यादव एग्जाम फीस रिफंड के नाम पर ठगी कर रहा था। उसने स्टूडेंट्स की लॉगिन जानकारी का उपयोग कर उनके अकाउंट का पासवर्ड बदल दिया और रिफंड राशि अपने खाते में ट्रांसफर कर ली।
फर्जी सबूतों से बनाते थे भरोसा
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने 44 वेबसाइट और 8 टेलीग्राम चैनल बनाकर फर्जी स्क्रीनशॉट और धन्यवाद संदेश पोस्ट किए। ये दावा किया जाता था कि पहले दिए गए पेपरों का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सही निकला था, जिससे छात्र और पेरेंट्स उनके झांसे में आ जाते थे। जांच में पता चला कि 1000 से ज्यादा लोगों ने पुराने या फर्जी प्रश्नपत्र खरीदने के लिए पैसे भेजे।
पैसों के लेन-देन को छिपाने की तरकीब
पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी पैसों के लेन-देन को छिपाने के लिए गेमिंग वेबसाइटों पर खाते खोलते थे। छात्रों से मिली रकम पहले इन खातों में जमा कराई जाती थी और फिर कई ट्रांजेक्शन के जरिए निकाली जाती थी। इस तरीके से बैंकिंग निगरानी से बचने की कोशिश की जाती थी।
₹1.5 करोड़ का वित्तीय लेन-देन
जांच एजेंसियों को आरोपियों के बैंक खातों में करीब 1.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले हैं। ठगी गई राशि को छिपाने के लिए आरोपी पैसे को गेमिंग और सट्टेबाजी (Betting) वेबसाइटों के खातों के जरिए ट्रांसफर करते थे। मुख्य आरोपी आकाश करीब 44 ऐसी अवैध वेबसाइटें ऑपरेट कर रहा था। पिछले एक महीने में आरोपियों ने 1,000 से ज्यादा मोबाइल नंबरों और टेलीग्राम चैनलों पर संपर्क साधा था
सच्चाई का हुआ खुलासा
पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि आरोपियों ने किसी भी परीक्षा का असली पेपर लीक नहीं किया। वे केवल पेपर लीक विवाद का फायदा उठाकर छात्रों और पेरेंट्स को ठग रहे थे। फिलहाल यह जांच जारी है कि इस नेटवर्क ने कुल कितनी रकम वसूली और कितने छात्र इसके शिकार बने हैं।
पुलिस और NTA की चेतावनी
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सभी छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि सोशल मीडिया या टेलीग्राम पर एडवांस पेपर या आंसर-की देने के दावों पर बिल्कुल भरोसा न करें। परीक्षा से जुड़ी किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें। ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की शिकायत तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर या साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराएं।
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