दिल्ली में खुली Ayurvedic OPD, आयुर्वेदिक चिकित्सा की नई शुरुआत

The CSR Journal Magazine

दिल्ली में आयुर्वेदिक चिकित्सा की नई शुरुआत: रोहिणी में खुली नई सरकारी Ayurvedic OPD, मरीजों को मिलेगा मुफ्त और साक्ष्य-आधारित इलाज का लाभ

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आम जनमानस तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत प्रमुख अनुसंधान निकाय, केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के अधीन केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), नई दिल्ली ने शहर में अपनी एक नई एक्सटेंशन ओपीडी (Extension OPD) सेवा का भव्य शुभारंभ किया है। इस नई सुविधा का उद्घाटन कल, 11 अगस्त 2026 को, रोहिणी में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान किया गया, जिससे दिल्ली के नागरिकों, विशेष रूप से उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के निवासियों के लिए सरकारी और विश्वसनीय आयुर्वेदिक उपचार का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

सस्ती सुलभ चिकित्सा सुविधा का वादा

यह पहल केंद्र सरकार और आयुष मंत्रालय के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत देश के प्रत्येक नागरिक तक सस्ती, सुलभ, समावेशी और साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने का संकल्प लिया गया है। इस नई ओपीडी के खुलने से न केवल रोहिणी बल्कि इसके आस-पास के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोगों को भी इलाज के लिए दिल्ली के दूरदराज के अस्पतालों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।

उद्घाटन और मुख्य अतिथि का संबोधन: साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पर जोर

रोहिणी के सेक्टर-28, ब्लॉक-A, FC-5 में स्थित इस नए एक्सटेंशन ओपीडी केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) के महानिदेशक प्रो. (वैद्य) रबीनारायण आचार्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर चिकित्सा जगत के कई वरिष्ठ अधिकारी, शोधकर्ता और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. रबीनारायण आचार्य ने साक्ष्य-आधारित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने के प्रति CCRAS की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा, “आयुर्वेद केवल एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि यह आधुनिक वैज्ञानिक मापदंडों पर खरी उतरने वाली एक संपूर्ण जीवन शैली और उपचार विज्ञान है। इस नई एक्सटेंशन ओपीडी का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधानों पर आधारित (Evidence-based) आयुर्वेद को सीधे समुदायों के करीब लाना है, ताकि आम मरीजों को उनके घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण और मरीज-केंद्रित नैदानिक सेवाएं (Patient-centric clinical services) मिल सकें।”

पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को मुख्यधारा में लाना

प्रो. आचार्य ने यह भी रेखांकित किया कि आयुष मंत्रालय का मुख्य विजन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को देश की मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकृत करना है। यह नया केंद्र इसी दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जहां रोगियों को न केवल पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर आधारित उपचार मिलेगा, बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों से प्रमाणित चिकित्सा परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा।

विशिष्ट जनों की गरिमामयी उपस्थिति और प्रशासनिक सहयोग

इस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान CCRAS के उप महानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर साक्ष्य-आधारित आयुर्वेदिक नैदानिक सेवाओं के विस्तार के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों का वास्तविक लाभ तभी है जब उनके शोध और दवाओं के निष्कर्ष आम जनता के उपचार में उपयोग किए जा सकें। यह एक्सटेंशन ओपीडी CARI (सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट) की नैदानिक पहुंच को व्यापक बनाएगी।

प्रशासनिक और ढांचागत पहलुओं की जानकारी

इसके अलावा, CCRAS के उप निदेशक (प्रशासन) श्री दीपक कोचर और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के अधीक्षक अभियंता श्री एम. शिवकुमार रेड्डी ने इस केंद्र के प्रशासनिक और ढांचागत पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आश्वस्त किया कि मरीजों की सुविधा के लिए इस केंद्र में सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं, दवा वितरण काउंटर और सुव्यवस्थित परामर्श कक्ष तैयार किए गए हैं, ताकि आने वाले समय में मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

नई OPD की मुख्य विशेषताएं और मरीजों को मिलने वाले लाभ

रोहिणी में शुरू की गई यह नई सरकारी ओपीडी कई मायनों में आम जनता के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होने वाली है। इसके प्रमुख लाभ और विशेषताएं निम्नलिखित हैं।

मुफ्त और किफायती परामर्श व दवाएं

एक सरकारी और स्वायत्त संस्थान के विस्तार के रूप में, इस ओपीडी में आने वाले मरीजों को विशेषज्ञों द्वारा निःशुल्क अथवा बेहद मामूली पंजीकरण शुल्क पर परामर्श दिया जाएगा। इसके साथ ही, आयुष मंत्रालय के मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली और प्रामाणिक आयुर्वेदिक दवाएं मरीजों को उपलब्ध कराई जाएंगी।

अनुसंधान-आधारित उपचार (Research-oriented Treatment)

चूंकि यह केंद्र CARI और CCRAS के प्रत्यक्ष नियंत्रण में कार्य करेगा, इसलिए यहां दी जाने वाली चिकित्सा पूरी तरह से वैज्ञानिक अनुसंधानों और परीक्षणों पर आधारित होगी। पुरानी और जटिल बीमारियों (जैसे गठिया, मधुमेह, त्वचा रोग, और पाचन तंत्र की समस्याएं) के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।

स्थानीय सुलभता (Localized Accessibility)

अब तक रोहिणी और बाहरी दिल्ली के निवासियों को गुणवत्तापूर्ण सरकारी आयुर्वेदिक उपचार के लिए पंजाबी बाग स्थित सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI) या सरिता विहार स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) जाना पड़ता था। इस एक्सटेंशन ओपीडी के खुलने से उन्हें अपने ही क्षेत्र में यह सुविधा मिल जाएगी, जिससे उनके समय और यात्रा व्यय दोनों की बचत होगी।

जीवनशैली और आहार परामर्श (Lifestyle & Dietary Consultation)

इस केंद्र पर केवल शारीरिक रोगों की दवाएं ही नहीं दी जाएंगी, बल्कि आयुर्वेद के मूल सिद्धांत “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं आतुरस्य विकार प्रशमनं च” (अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के रोग को दूर करना) के तहत मरीजों को उचित खान-पान, ऋतुचर्या (मौसमी जीवनशैली) और योग संबंधी परामर्श भी प्रदान किया जाएगा।

दिल्ली में मजबूत होता आयुष (AYUSH) नेटवर्क

पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विकास देखा गया है। दिल्ली में पहले से ही कई बड़े संस्थान कार्यरत हैं, जिनके साथ यह नया केंद्र मिलकर काम करेगा।

सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI), पंजाबी बाग

यह संस्थान 1979 से आयुर्वेद के क्षेत्र में नैदानिक अनुसंधान कर रहा है। 50 बिस्तरों वाले अस्पताल, पंचकर्म अनुभाग, क्षारसूत्र चिकित्सा (अर्श-भगंदर इकाई) और आधुनिक प्रयोगशालाओं से लैस यह संस्थान इस नई रोहिणी ओपीडी का मातृ संस्थान है।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), सरिता विहार

वर्ष 2017 में स्थापित यह संस्थान आयुर्वेद का ‘एम्स’ माना जाता है। 200 बिस्तरों वाले इस टर्शरी केयर अस्पताल में देश-विदेश से मरीज आते हैं और यहां पंचकर्म, क्रियाकल्प (नेत्र चिकित्सा की विशेष पद्धति जिसमें तर्पण, पुटपाक आदि शामिल हैं) जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

चौधरी ब्रह्म प्रकाश आयुर्वेद चरक संस्थान (CBPACS), नजफगढ़

दिल्ली सरकार के अधीन 95 एकड़ में फैला यह एशिया का सबसे बड़ा आयुर्वेदिक अस्पताल माना जाता है, जहां 210 बिस्तर हैं और रोजाना 1,000 से अधिक मरीजों की ओपीडी संभाली जाती है। हाल ही में मई 2026 में यहां एकीकृत आयुष सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए होम्योपैथी और यूनानी ओपीडी क्लीनिक भी शुरू किए गए हैं।

आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बिया कॉलेज, करोल बाग

यह ऐतिहासिक संस्थान दिल्ली सरकार के तहत आयुर्वेद और यूनानी दोनों पद्धतियों में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ-साथ उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। इस प्रकार, रोहिणी में खुली यह नई एक्सटेंशन ओपीडी दिल्ली के इस विशाल आयुष नेटवर्क की एक और महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है, जो प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य स्तर पर लोगों को पारंपरिक चिकित्सा से जोड़ेगी।

जनभावना और आयुर्वेद के प्रति बढ़ता विश्वास

आज के समय में जब आधुनिक जीवनशैली के कारण गैर-संचारी और पुरानी बीमारियां (जैसे उच्च रक्तचाप, मोटापा, मानसिक तनाव और जोड़ों का दर्द) तेजी से बढ़ रही हैं, लोग उपचार के प्राकृतिक और समग्र (Holistic) विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) जहां आपातकालीन स्थितियों और तात्कालिक राहत के लिए बेहतरीन है, वहीं आयुर्वेद रोगों को जड़ से समाप्त करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में बेजोड़ माना जाता है।

आम जनता ने किया स्वागत

रोहिणी के स्थानीय निवासियों ने सरकार के इस कदम का पुरजोर स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि निजी आयुर्वेदिक क्लीनिकों में परामर्श और पंचकर्म थेरेपी का खर्च काफी अधिक होता है, जो हर वर्ग के लिए वहन करना संभव नहीं है। ऐसे में इस सरकारी सुविधा के शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग के परिवारों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।

भविष्य की राह

रोहिणी में CARI-CCRAS की इस नई एक्सटेंशन ओपीडी का खुलना चिकित्सा के लोकतंत्रीकरण की ओर एक सराहनीय कदम है। यह केंद्र आने वाले दिनों में न केवल मरीजों को राहत देगा, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य पर पारंपरिक चिकित्सा के प्रभाव को मापने के लिए डेटा एकत्र करने में भी शोधकर्ताओं की मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे इस केंद्र पर मरीजों की संख्या बढ़ेगी, भविष्य में यहां पंचकर्म और अन्य डे-केयर थेरेपी (Day-care therapies) जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा सकता है। आयुष मंत्रालय की यह पहल निश्चित रूप से पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने और देश के प्रत्येक नागरिक को एक स्वस्थ, संतुलित और रोगमुक्त जीवन प्रदान करने के बड़े राष्ट्रीय संकल्प को गति देगी।

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