नोएडा में ‘अर्बन नक्सल’ की एंट्री? 17 व्हाट्सएप ग्रुप और तबाही का खौफनाक प्लान

The CSR Journal Magazine

नोएडा प्रदर्शन का ‘अर्बन नक्सल’ से कनेक्शन!

अप्रैल 2026 के दूसरे सप्ताह में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ श्रमिक आंदोलन अचानक हिंसक हो गया। इस दौरान बड़े पैमाने पर आगजनी, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन ने इसे एक साधारण आंदोलन न मानकर एक “सुनियोजित साजिश” करार दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हिंसा के पीछे ‘अर्बन नक्सल’ संगठनों और बाहरी तत्वों की संलिप्तता की आशंका जताते हुए कड़ी जांच के आदेश दिए हैं।

उपद्रवियों पर एक्शन शुरू

नोएडा में हाल ही में मजदूरों के हुए हिंसक प्रदर्शन ने पूरे क्षेत्र में चिंता की लहर पैदा कर दी है। प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, अब तक लगभग 66 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से अधिकतर पर आरोप है कि उन्होंने दंगा, पत्थरबाजी और हिंसा को बढ़ावा दिया।

वामपंथी समूह की गिरफ्तारी

नोएडा पुलिस ने वामपंथी संगठनों के कई सदस्यों को भी हिरासत में लिया है। यह गिरफ्तारी उस समय की गई जब सरकारी एजेंसियों ने दंगों के पीछे की असली वजहों की तलाश शुरू की। पुलिस का मानना है कि कुछ अज्ञात तत्वों ने इन प्रदर्शनों को भड़काने का प्रयास किया। पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि हिंसक प्रदर्शनों के आरोप में गिरफ्तार किए गए 66 लोगों में से 45 व्यक्ति वास्तव में श्रमिक नहीं हैं। प्रशासन के अनुसार, ये “बाहरी तत्व” थे जिन्होंने मजदूरों के भेष में भीड़ को उकसाया और हिंसा को अंजाम दिया।

अर्बन नक्सल संगठनों की भूमिका

जांच एजेंसियों ने इस हिंसा का सीधा संबंध ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ (Mazdoor Bigul Dasta) और अन्य कथित वामपंथी उग्रवादी समूहों से जोड़ा है। आरोप है कि इन समूहों ने ‘अर्बन नक्सल’ नेटवर्क के माध्यम से मजदूरों को गुमराह किया। पुलिस ने ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ के नेता रूपेश राय को गिरफ्तार किया है, जिन पर हिंसा भड़काने का आरोप है।

WhatsApp ग्रुपों की जांच

पुलिस ने अब 17 WhatsApp ग्रुपों की भी जांच का निर्णय लिया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने लोगों को हिंसा के लिए उकसाने का कार्य किया। इन ग्रुपों के सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ये ग्रुप मुख्य रूप से संगठन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए थे। नोएडा पुलिस ने 17 ऐसे व्हाट्सएप ग्रुपों की पहचान की है जिनका उपयोग हिंसा के लिए भीड़ जुटाने और नफरत फैलाने वाले संदेश भेजने के लिए किया गया था। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, इन समूहों में श्रमिकों की समस्याओं के बजाय केवल तोड़फोड़ और अराजकता फैलाने पर चर्चा हो रही थी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

नोएडा प्रशासन ने हालात को नियंत्रण में रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अधिकारियों ने प्रदर्शनस्थलों पर सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी है। साथ ही, शांति बहाल करने के लिए निगरानी प्रणाली भी स्थापित की जा रही है। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे उत्तर प्रदेश की आर्थिक प्रगति को बाधित करने की कोशिश बताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आंदोलन की आड़ में हिंसा करने वाले गैर-मजदूरों की पहचान कर उनके पोस्टर सार्वजनिक किए जाएं। अशांति फैलाने वाले बाहरी संगठनों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और उनके वित्तीय स्रोतों की जांच की जाए।

हालात सामान्य करने की कोशिश

प्रशासन का उद्देश्य स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करना है। इसके लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि क्षेत्र की शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का अगले कदम क्या होगा, यह देखना बाकी है।

सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया

कई सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की है। उनका कहना है कि मजदूरों के मुद्दों को उठाने के लिए आक्रामक तरीकों को अपनाना गलत है। वे इस बात पर बल दे रहे हैं कि संवाद से ही समस्याओं का हल निकाला जा सकता है।

प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता

नोएडा में इस प्रकार की हिंसक घटनाओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं। प्रशासन को अब इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना होगा और उचित कदम उठाने होंगे। ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने और शहर की शांति भंग न हो। नोएडा का यह घटनाक्रम दर्शाता है कि किस प्रकार वास्तविक श्रमिक मांगों की आड़ में बाहरी विचारधारा वाले संगठन अपने निहित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लोकतांत्रिक आंदोलनों का उपयोग कर सकते हैं।

 न्यूनतम मजदूरी में ₹3000 की वृद्धि

जहाँ एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में लगभग ₹3000 तक की वृद्धि कर श्रमिकों को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर ‘अर्बन नक्सल’ लिंक की जांच यह सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि औद्योगिक शांति और निवेश के माहौल को भविष्य में कोई नुकसान न पहुँचे। पुलिस प्रशासन अब उन सभी संगठनों की वित्तीय मदद और अंतरराष्ट्रीय लिंक की भी पड़ताल कर रहा है जो इस हिंसा के पीछे सक्रिय थे।

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