कक्षा 9 के NCERT सिलेबस में अब छात्र पढ़ेंगे 1975 की इमरजेंसी का इतिहास

The CSR Journal Magazine

अब स्कूली बच्चे भी पढ़ेंगे इमरजेंसी का इतिहास, NCERT ने क्लास 9 के सिलेबस में जोड़ा आपातकाल

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने इतिहास में पहली बार कक्षा 9वीं की सोशल साइंस (सामाजिक विज्ञान) की पाठ्यपुस्तक में 1975 के ‘आपातकाल’ (Emergency) का पूरा इतिहास शामिल किया है। देश में आपातकाल लागू होने के लगभग 50 साल पूरे होने पर यह बड़ा नीतिगत बदलाव किया गया है।नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत तैयार की गई सोशल साइंस की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (Understanding Society: India and Beyond) में इसे ‘भारतीय लोकतंत्र की प्रमुख चुनौतियों’ के रूप में पढ़ाया जाएगा।

NCERT का बड़ा फैसला: 51 साल बाद आपातकाल शामिल

इमरजेंसी का इतिहास अब स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गया है। NCERT ने अपनी क्लास 9 की किताब में इस विषय को जोड़ने का फैसला किया है। 1975 से 1977 के बीच लागू हुए आपातकाल को 51 साल बाद पहली बार विस्तृत रूप से पढ़ाया जा रहा है। यह अध्याय ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉंड’ नामक किताब में शामिल किया गया है, जहां इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बताया गया है।

आपातकाल का सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि

किताब के अनुसार, 1970 के दशक की शुरुआत में बेरोजगारी, महंगाई और सरकार के खिलाफ असंतोष के कारण देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होने लगे थे। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में कई आंदोलन उठे। इसी स्थिति में, 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू किया।

आपातकाल के दौरान क्या हुआ?

NCERT की किताब में बताया गया है कि आपातकाल के समय में अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और कई विपक्षी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। यह अवधि भारतीय लोकतंत्र की संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गई।

अध्याय में शामिल प्रमुख विषय

इस अध्याय में आपातकाल की राजनीतिक पृष्ठभूमि, जयप्रकाश नारायण के आंदोलन, लोकतंत्र पर प्रभाव, और 1977 के आम चुनावों के बाद लोकतंत्र की बहाली जैसे विषयों का विस्तार में उल्लेख किया गया है। NCERT के अनुसार, यह पहली बार है जब कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में आपातकाल को इतनी गहराई से शामिल किया गया है।

पाठ्यक्रम में शामिल मुख्य बातें

1970 के दशक की शुरुआत में देश में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, जेपी आंदोलन (बिहार आंदोलन) और तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ जनता के बढ़ते असंतोष का जिक्र है। जून 1975 में ‘आंतरिक अशांति’ के आधार पर लगाए गए राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) को निलंबित किए जाने की पूरी जानकारी दी गई है। मीडिया की स्वतंत्रता पर लगी पाबंदियों और प्रमुख राजनीतिक नेताओं तथा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों के बारे में बताया गया है। अध्याय में बताया गया है कि इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाएं किस तरह अत्यधिक दबाव में आ गई थीं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: सचिन पायलट का बयान

NCERT की कक्षा 9 की किताब में आपातकाल को शामिल किए जाने पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकारें हमेशा से इतिहास को अपनी मर्जी के अनुसार पेश करने की कोशिश करती हैं। आज लोकतंत्र के सामने जो चुनौतियां हैं, वैसी आजाद भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गईं।

आवाजों को दबाने का प्रयास

सचिन पायलट ने कहा कि सोशल मीडिया, मीडिया, न्यायपालिका, नौकरशाही और चुनाव आयोग का गलत इस्तेमाल करने के तरीके इस बात का संकेत हैं कि सरकारें दमन की नीति अपना रही हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार हो रहा है कि कोई सरकार अपने हित के लिए इन संस्थाओं का गलत उपयोग कर रही है।

लोकतंत्र की अन्य चुनौतियाँ भी शामिल

इमरजेंसी के अलावा इस अध्याय में लोकतंत्र के सामने आने वाली कई अन्य समकालीन चुनौतियों को भी जोड़ा गया है। फेक न्यूज और भ्रामक जानकारियां (Misinformation), सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, गरीबी, क्षेत्रीयता और लैंगिक असमानता (Gender Inequality)। इसके साथ ही, छात्रों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए ‘डेमोक्रेसी एंड यू’ (Democracy and You) नाम से एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। इसमें मीडिया को लोकतंत्र का ‘चौथा स्तंभ’ बताते हुए इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया है।

NCERT की पहल का महत्व

NCERT के इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा के माध्यम से महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को बताना एक आवश्यक कदम है। यह विद्यार्थियों को इतिहास के गहरी समझ देने में मदद करेगा, जिससे वे आज के लोकतांत्रिक परिदृश्य को भी बेहतर समझ सकें। आपको याद दिला दें कि यह परिवर्तन पिछले 51 सालों में महत्वपूर्ण आंकड़े बन चुका है।

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