पवई की धरती के नीचे दबी करोड़ों की मशीन, BMC ने बदला रास्ता – 419 करोड़ का बढ़ा बोझ

The CSR Journal Magazine

 2019 से फंसी जर्मन टनल बोरिंग मशीन को निकालना हुआ नामुमकिन, अब नए सिरे से होगा काम

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक ओर जहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की रफ्तार तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर एक महत्वाकांक्षी जल सुरंग परियोजना तकनीकी चुनौतियों के चलते अधर में लटक गई है। पवई इलाके में करोड़ों रुपये की लागत से लाई गई एक अत्याधुनिक जर्मन टनल बोरिंग मशीन (TBM) पिछले करीब सात वर्षों से जमीन के नीचे फंसी हुई है। अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने इसे वहीं छोड़कर नए सिरे से परियोजना शुरू करने का फैसला किया है।

कैसे फंसी मशीन?

यह मामला अगस्त 2019 का है, जब पवई से घाटकोपर तक जल आपूर्ति के लिए एक भूमिगत सुरंग बनाने का कार्य शुरू किया गया था। परियोजना के तहत लगभग 1.2 किलोमीटर तक खुदाई सफलतापूर्वक की जा चुकी थी। लेकिन इसके बाद मशीन एक ऐसे भू-भाग में पहुंच गई, जहां जमीन की संरचना सामान्य से बिल्कुल अलग थी। आमतौर पर मुंबई के अधिकांश हिस्सों में मजबूत बेसाल्ट चट्टानें पाई जाती हैं, जो सुरंग निर्माण के लिए अनुकूल मानी जाती हैं।

Volcanic Ash में फँसी मशीन

पवई के इस विशेष क्षेत्र में मशीन ज्वालामुखीय राख (volcanic ash) और दलदली, कीचड़युक्त मिट्टी में फंस गई। यह मिट्टी इतनी नरम थी कि मशीन की पकड़ पूरी तरह खत्म हो गई और वह धीरे-धीरे धंसती चली गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मशीन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा जमीन के अंदर समा गया। इसके साथ ही सुरंग में पानी का रिसाव भी शुरू हो गया, जिससे काम और अधिक जोखिमपूर्ण हो गया।

तकनीकी विशेषज्ञ भी नहीं निकाल पाए हल

मशीन को निकालने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए। देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बॉम्बे सहित कई तकनीकी विशेषज्ञों से सलाह ली गई। विशेषज्ञों ने विभिन्न विकल्प सुझाए, लेकिन सभी प्रयास असफल साबित हुए। मशीन को बाहर निकालना न केवल तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल था, बल्कि इससे आसपास की जमीन और संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचने का खतरा था। आखिरकार BMC ने यह निष्कर्ष निकाला कि मशीन को निकालने का प्रयास करना आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से व्यावहारिक नहीं है।

बढ़ी लागत और नया टेंडर

इस परियोजना में आई रुकावट के चलते BMC को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। पुराने कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त करते हुए वर्ष 2022 में नया टेंडर जारी किया गया। परियोजना की देरी, तकनीकी बदलाव और नए सिरे से कार्य शुरू करने के कारण कुल लागत में लगभग 419 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।अब नई योजना के तहत सुरंग निर्माण के लिए अलग मार्ग और उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न आए।

क्या होगा आगे?

BMC अधिकारियों के अनुसार, फंसी हुई मशीन को जमीन के अंदर ही स्थायी रूप से छोड़ दिया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि इसे निकालने की लागत और जोखिम, दोनों ही अत्यधिक हैं। नई सुरंग का निर्माण पुराने मार्ग से हटकर किया जाएगा और इसके लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण को अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।

विशेषज्ञों की राय

इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना शहरी परियोजनाओं में विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन की अहमियत को दर्शाती है। खासकर समुद्र तटीय और ज्वालामुखीय संरचना वाले शहरों में ऐसी चुनौतियां आम हो सकती हैं। पवई में फंसी यह मशीन अब एक “भूमिगत स्मारक” की तरह बन चुकी है, जो आधुनिक तकनीक के बावजूद प्रकृति की जटिलताओं के आगे इंसानी सीमाओं को दर्शाती है।यह घटना न केवल आर्थिक नुकसान का उदाहरण है, बल्कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी है कि योजना और सर्वेक्षण में किसी भी तरह की कमी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

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