एचआईवी रिएक्टिव प्लाज्मा मामले में हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, जांच की मांग जारी

The CSR Journal Magazine
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने ह्यूमन प्लाज्मा से बने मेडिकल प्रोडक्ट में एचआईवी रिएक्टिव पाए जाने से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कृष्ण शरण कौरव ने पक्ष रखा, जिसमें उन्होंने कहा कि अब हाईकोर्ट के फैसले का सभी को इंतजार है।

अवश्यक जांच का आग्रह

महामारी के इस गंभीर माहौल में मानव एलब्यूमिन 20 प्रतिशत (AlbuRel-OS) के शेष सीलबंद सैंपल की साइंटिफिक टेस्टिंग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने अपने तर्क दिए। यह जनहित याचिका नरसिंहपुर के सामाजिक कार्यकर्ता शुभम कौरव द्वारा दायर की गई है।

महेश कुमार वर्मा का मामला

याचिका में उल्लेख है कि नरसिंहपुर निवासी महेश कुमार वर्मा के इलाज के लिए 2024 में रिलायंस लाइफ साइंसेज का ह्यूमन एल्बुमिन 20 प्रतिशत प्रोडक्ट खरीदा गया था। एक सैंपल की जांच में एचआईवी रिएक्टिव रिजल्ट सामने आया, जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं। प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर इसे एंटी-एचआईवी के लिए नॉन-रिएक्टिव दर्शाया गया था, लेकिन जांच में एचआईवी रिएक्टिव परिणाम सामने आया।

चिकित्सा प्रक्रिया पर असर

महेश कुमार वर्मा का इलाज जबलपुर के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज असाटी द्वारा किया जा रहा था। इस दौरान खरीदी गई तीन बोतलों में से एक का सैंपल जांच में एचआईवी रिएक्टिव निकला। याचिकाकर्ता का कहना है कि पुनः जांच में भी समान परिणाम प्राप्त हुआ है। इससे संबंधित सभी अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दी गई है।

किसी कार्रवाई का ना होना चिंता का विषय

याचिकाकर्ता द्वारा बताया गया कि संबंधित विभागों को सूचित करने के बावजूद उन बोतलों की जांच नहीं की गई है। जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जन स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उचित कार्रवाई की जा रही है।

कोर्ट से की गई मांगें

इस मामले में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि संबंधित बैच की बची हुई बोतलों के सैंपल लेकर राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में उनकी वैज्ञानिक और कन्फर्मेटरी जांच कराई जाए। इसके साथ ही प्रोडक्ट के निर्माण, वितरण और बिक्री से जुड़े सभी पक्षों की जांच की मांग की गई है।

जन स्वास्थ्य का गंभीर मुद्दा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि यह मामला जन स्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसके परिणाम व्यापक और गंभीर हो सकते हैं। इसीलिए पूरी स्वतंत्रता से वैज्ञानिक जांच कराना आवश्यक है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos