बिहार, यूपी या राजस्थान: पेपरलीक के सबसे ज्यादा मास्टरमाइंड किस राज्य के हैं?

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र की TET परीक्षा में पेपर लीक ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ सालों में NEET, TET, पुलिस भर्ती और अन्य प्रमुख परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं आम होती जा रही हैं। इन घटनाओं में सबसे अधिक मास्टरमाइंड किन राज्यों से जुड़े हैं? आइए जानते हैं आंकड़ों के आधार पर।

कौन हैं पेपर लीक के मास्टरमाइंड?

भारत में जब भी कोई बड़ी परीक्षा आयोजित होती है, लाखों युवाओं की उम्मीदें उस पर टिकी होती हैं। किन्तु, पिछले कुछ समय में पेपर लीक ने उन उम्मीदों को चूर-चूर किया है। NEET से लेकर टीईटी तक, हर बार चर्चा मास्टरमाइंड पर ही होती है। महाराष्ट्र की टीईटी परीक्षा, जो 28 जून को होनी थी, के लीक होने का मामला अब सबके सामने है।

बिहार: मॉस्टरमाइंड की सूची में सबसे पहले

बिहार का नाम पेपर लीक मामलों में बार-बार सामने आता रहा है। 2023 में टीईटी पेपर लीक के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया रहे हैं। 2024 NEET-UG पेपर लीक में भी उनका नेटवर्क संदिग्ध पाया गया है। 2026 में महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में भी समस्तीपुर का बिजेंद्र गुप्ता जुड़ा है।

यूपी: भर्ती घोटालों का गढ़

उत्तर प्रदेश में भी पेपर लीक की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। 2023-24 में यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा और UPPSC RO/ARO परीक्षा में बड़े घोटाले सामने आए हैं। प्रयागराज निवासी राजीव नयन मिश्रा को इन मामलों का मुख्य आरोपी माना गया है।

राजस्थान: परीक्षाओं का बड़ा नेटवर्क

राजस्थान लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के लिए सुर्खियों में रहा है। 2022 में फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा के लीक मामले में जाबरा राम जाट को मास्टरमाइंड लिया गया। REET और सेकेंड ग्रेड शिक्षक भर्ती जैसे अनेक मामलों में बड़े गिरोहों का पर्दाफाश हो चुका है।

अन्य राज्य: क्या सिर्फ यही हैं मास्टरमाइंड?

यह कहना गलत होगा कि सिर्फ बिहार, यूपी और राजस्थान के लोग पेपर लीक में शामिल हैं। अन्य राज्यों में भी कई आरोपी सामने आए हैं। जैसे, 2018 में हिमाचल प्रदेश का राकेश कुमार और 2023 में ओडिशा का विशाल कुमार चौरसिया।

डेटा क्या कहता है?

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में 100 से ज्यादा बड़े पेपर लीक हुए हैं, जिनसे 5 करोड़ से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। 2019 के बाद ये घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में।

असली समस्या क्या है?

जांच एजेंसियों के अनुसार पेपर लीक अब स्थानीय अपराध नहीं है, बल्कि यह एक इंटर-स्टेट नेटवर्क बन चुका है। एक राज्य में प्रश्नपत्र को लीक किया जाता है, दूसरे राज्य में एजेंट बनते हैं, और फिर तीसरे राज्य में उसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाया जाता है। इसमें प्रिंटिंग प्रेस से लेकर सॉल्वर गैंग तक शामिल हो सकते हैं।

सरकार के कदम: क्या बदलेगा हालात?

महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक के बाद सरकार

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