रोजगार भी, सेवा भी: जन औषधि केंद्र खोलकर बनें आत्मनिर्भर

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जन औषधि केंद्र खोलकर रोजगार के साथ सेवा का अवसर, जानिए पात्रता, खर्च, कमाई और आवेदन की पूरी प्रक्रिया

देश में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत खोले जाने वाले प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र आम लोगों को कम कीमत पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने का माध्यम हैं। वहीं, फार्मासिस्ट, उद्यमी, महिला कारोबारी, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिक, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सहित कई वर्गों के लिए यह अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर भी देता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार देशभर में 16,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र संचालित हैं।

क्या है प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना?

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना का उद्देश्य लोगों को गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराना है। इन केंद्रों पर दवाओं के अलावा कई सर्जिकल उत्पाद और चिकित्सा संबंधी सामान भी उपलब्ध कराए जाते हैं। सरकार के अनुसार जनऔषधि केंद्रों पर उपलब्ध जेनेरिक दवाओं की औषधीय प्रभावशीलता ब्रांडेड दवाओं के समान होती है, जबकि उनकी कीमत अपेक्षाकृत कम रखी जाती है। इस व्यवस्था में दवाओं की खरीद और आपूर्ति के लिए फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया (PMBI) प्रमुख कार्यान्वयन संस्था है। PMBI निजी निर्माताओं और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की औषधि कंपनियों से दवाओं की खरीद करता है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक खरीदी गई दवाओं के बैचों की जांच मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराई जाती है और इसके बाद आपूर्ति केंद्रों तक की जाती है।

कौन खोल सकता है जनऔषधि केंद्र?

जनऔषधि केंद्र केवल किसी एक वर्ग के लोगों के लिए सीमित नहीं है। आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार व्यक्तिगत उद्यमी, प्रोपराइटर, साझेदारी संस्था, ट्रस्ट, सोसायटी, गैर-सरकारी संगठन, धर्मार्थ संस्था या अस्पताल जैसी संस्थाएं भी निर्धारित शर्तों के तहत इसके लिए आवेदन कर सकती हैं।व्यक्तिगत आवेदक के पास डी.फार्मा या बी.फार्मा की योग्यता हो सकती है। यदि आवेदक स्वयं फार्मासिस्ट नहीं है तो उसे निर्धारित योग्यता वाला फार्मासिस्ट नियुक्त करना होगा। आवेदन अथवा अंतिम स्वीकृति के समय फार्मासिस्ट की योग्यता और राज्य फार्मेसी परिषद का पंजीकरण प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक है। इसका अर्थ यह है कि केवल फार्मेसी की पढ़ाई करने वाले व्यक्ति ही केंद्र खोल सकते हैं, ऐसा नहीं है। कोई अन्य उद्यमी भी आवश्यक शर्तें पूरी करके योग्य पंजीकृत फार्मासिस्ट को नियुक्त कर सकता है।

दुकान के लिए कितनी जगह चाहिए?

जनऔषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदक के पास अपनी जगह या किराये की जगह होनी चाहिए। आधिकारिक दिशानिर्देशों में कम से कम 120 वर्ग फुट जगह की आवश्यकता बताई गई है। किराये की जगह होने पर उचित लीज समझौता या स्थान आवंटन संबंधी दस्तावेज देना होगा। दुकान की व्यवस्था और स्थान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आवेदक की होती है। स्थान चुनते समय आसपास पहले से संचालित जनऔषधि केंद्रों की दूरी का नियम भी महत्वपूर्ण है। वर्तमान दिशानिर्देशों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में नए केंद्र के लिए दूसरे केंद्र से कम से कम 1 किलोमीटर की दूरी का प्रावधान है। हालांकि जिला सरकारी अस्पताल, 100 या उससे अधिक बिस्तरों वाले निजी अस्पताल तथा मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों के आसपास 500 मीटर तक के क्षेत्र में इस दूरी नीति का अपवाद है। अंतिम स्थान की व्यवहार्यता का आकलन PMBI बाजार सर्वेक्षण के आधार पर करता है।

केंद्र खोलने पर कितनी कमाई हो सकती है?

जनऔषधि केंद्र को व्यवसाय के रूप में चलाने वाले संचालक को दवाओं की बिक्री पर निर्धारित मार्जिन मिलता है। आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक दवा के कर रहित अधिकतम खुदरा मूल्य पर 20 प्रतिशत ऑपरेटिंग मार्जिन दिया जाता है। इसके अलावा पात्र केंद्रों को प्रदर्शन आधारित मासिक प्रोत्साहन भी मिलता है। मौजूदा आधिकारिक दिशानिर्देशों में यह प्रोत्साहन PMBI से की गई मासिक खरीद के आधार पर 20 प्रतिशत तक, अधिकतम 20,000 रुपये प्रतिमाह बताया गया है। इसमें 10 प्रतिशत तक खरीद आधारित प्रोत्साहन और शेष 10 प्रतिशत तक प्रोत्साहन निर्धारित दवाओं का पर्याप्त भंडार बनाए रखने से जुड़ा है। दवाओं का पर्याप्त भंडार बनाए रखना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रोत्साहन का एक हिस्सा केंद्र में उपलब्ध उत्पादों की संख्या से जुड़ा है।

PMBI शर्तों मे बदलाव

दिशानिर्देशों में 180 से 200 उत्पादों के स्टॉक पर इस हिस्से का पूरा भुगतान, जबकि कम उत्पाद उपलब्ध होने पर निर्धारित अनुपात में भुगतान का प्रावधान बताया गया है। PMBI समय-समय पर स्टॉक संबंधी शर्तों में बदलाव कर सकता है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि 20 प्रतिशत मार्जिन का अर्थ निश्चित मासिक मुनाफा नहीं है। वास्तविक कमाई बिक्री की मात्रा, दुकान का किराया, फार्मासिस्ट का वेतन, बिजली, कर्मचारियों का खर्च, परिवहन, कर और अन्य परिचालन लागत पर निर्भर करेगी। इसलिए केंद्र खोलने से पहले स्थानीय बाजार, आसपास के अस्पतालों और चिकित्सकों, मरीजों की संख्या तथा पहले से मौजूद दवा दुकानों का अध्ययन करना जरूरी है।

विशेष वर्गों को मिल सकती है 2 लाख रुपये तक की सहायता

जनऔषधि केंद्र खोलने के इच्छुक कुछ विशेष वर्गों के लिए योजना में अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है। आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार महिला उद्यमी, दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पूर्व सैनिक, साथ ही नीति आयोग द्वारा अधिसूचित आकांक्षी जिलों तथा हिमालयी, द्वीपीय और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में केंद्र खोलने वाले पात्र उद्यमियों को सामान्य प्रोत्साहन के अतिरिक्त 2 लाख रुपये तक का एकमुश्त विशेष प्रोत्साहन मिल सकता है। यह राशि सीधे सामान्य नकद सब्सिडी के रूप में नहीं दी जाती। इसमें 1.50 लाख रुपये तक फर्नीचर और फिक्स्चर तथा 50,000 रुपये तक कंप्यूटर, इंटरनेट, प्रिंटर आदि के लिए वास्तविक खर्च के आधार पर प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। इसके लिए मूल बिल प्रस्तुत करने होते हैं और सहायता वास्तविक खर्च तक सीमित रहती है। इस विशेष प्रोत्साहन के लिए पात्र श्रेणी का प्रमाण देना आवश्यक है। दिशानिर्देशों में ‘वन फैमिली-वन ग्रांट’ की शर्त भी बताई गई है, यानी पात्र परिवार में विशेष प्रोत्साहन का लाभ निर्धारित नियमों के अनुसार एक बार ही दिया जाता है।

आवेदन शुल्क कितना है?

सामान्य आवेदकों के लिए जनऔषधि केंद्र खोलने की आवेदन प्रक्रिया में 5,000 रुपये का गैर-वापसी योग्य आवेदन शुल्क निर्धारित है। हालांकि महिला उद्यमी, दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पूर्व सैनिक तथा निर्धारित आकांक्षी जिलों, हिमालयी, द्वीपीय और पूर्वोत्तर क्षेत्रों से संबंधित पात्र आवेदकों को आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने पर इस शुल्क से छूट दी जाती है। इसलिए केवल सोशल मीडिया पर चल रहे ‘कुछ हजार रुपये में मेडिकल स्टोर शुरू करें’ जैसे दावों को देखकर आवेदन नहीं करना चाहिए। केंद्र खोलने के लिए दुकान, फार्मासिस्ट, दवा लाइसेंस, प्रारंभिक स्टॉक और अन्य परिचालन खर्च की भी आवश्यकता होती है।

आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?

आवेदन के दौरान आवेदक को कई दस्तावेज उपलब्ध कराने होते हैं। आधिकारिक दिशानिर्देशों में व्यक्तिगत आवेदकों के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, फार्मासिस्ट का पंजीकरण प्रमाणपत्र, पिछले दो वर्षों का आयकर रिटर्न, पिछले छह महीनों का बैंक स्टेटमेंट तथा अन्य आवश्यक घोषणाओं का उल्लेख है। विशेष श्रेणी में आवेदन करने वालों को संबंधित श्रेणी का प्रमाण भी देना होता है। आवेदक को स्थान से संबंधित दस्तावेज तथा दूरी नीति के पालन का स्व-घोषणा पत्र भी देना पड़ सकता है। व्यक्तिगत या प्रोपराइटर श्रेणी के आवेदन में आधार संबंधी आवश्यकताएं भी निर्धारित हैं।

जनऔषधि केंद्र खोलने की प्रक्रिया

जनऔषधि केंद्र के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जाता है। इसके लिए PMBI की आधिकारिक जनऔषधि वेबसाइट पर ‘Apply for Kendra’ विकल्प उपलब्ध है। आवेदन से पहले आवेदक को अपनी पात्रता, दुकान का स्थान, फार्मासिस्ट की उपलब्धता और आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए। आवेदन की सामान्य प्रक्रिया में पहले ऑनलाइन आवेदन करना, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना और निर्धारित आवेदन शुल्क जमा करना शामिल है। इसके बाद PMBI द्वारा आवेदन और प्रस्तावित स्थान की जांच की जाती है। स्वीकृति मिलने के बाद आवेदक को आवश्यक समझौते, दवा लाइसेंस और अन्य वैधानिक अनुमतियां पूरी करनी होती हैं। दवा की बिक्री के लिए PMBI का निर्धारित बिलिंग सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करना अनिवार्य है। दिशानिर्देशों के अनुसार PMBJK में होने वाली बिलिंग PMBI के सॉफ्टवेयर के माध्यम से की जानी है और बिना इस प्रणाली के दवा बिक्री की अनुमति नहीं है।

दवा लाइसेंस लेना जरूरी

जनऔषधि केंद्र सरकारी योजना के तहत संचालित होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि संचालक को सामान्य दवा दुकान के लिए जरूरी कानूनी औपचारिकताओं से छूट मिल जाती है। केंद्र संचालक को ‘प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र’ के नाम से ड्रग लाइसेंस तथा दवा कारोबार के लिए आवश्यक अन्य अनुमतियां प्राप्त करनी होती हैं। दवाओं के भंडारण से जुड़े सभी वैधानिक नियमों का पालन भी करना होता है। यानी आवेदन स्वीकृत होना ही अंतिम चरण नहीं है। केंद्र शुरू करने से पहले दवा लाइसेंस, प्रशिक्षित फार्मासिस्ट, उचित भंडारण व्यवस्था और अन्य नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करना आवश्यक है।

केंद्र खोलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

जनऔषधि केंद्र को सफल बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उसके स्थान की होती है। अस्पताल, चिकित्सालय, क्लीनिक, घनी आबादी वाले क्षेत्र या ऐसे स्थान जहां नियमित रूप से दवाओं की मांग रहती है, वहां व्यवसाय की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। हालांकि स्थान का चयन करते समय PMBI की दूरी नीति और व्यवहार्यता संबंधी नियमों का पालन जरूरी है।
दूसरी महत्वपूर्ण बात है पर्याप्त स्टॉक। मरीज जिस दवा के लिए दुकान पर आए और वह उपलब्ध न हो, तो ग्राहक दूसरे केंद्र या दवा दुकान का रुख कर सकता है। इसलिए मांग के अनुसार आवश्यक दवाओं का नियमित भंडार बनाए रखना व्यवसाय और प्रोत्साहन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
तीसरी बात यह है कि जनऔषधि केंद्र केवल व्यापार का माध्यम नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी जिम्मेदारी भी है। दवाओं को निर्धारित परिस्थितियों में रखना, सही बिल देना, वैध पर्चे और दवा संबंधी नियमों का पालन करना तथा मरीजों को गलत जानकारी न देना संचालक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मरीजों के लिए भी उपयोगी है जनऔषधि व्यवस्था

जनऔषधि केंद्रों का उद्देश्य केवल नए उद्यमी तैयार करना नहीं है। इसका बड़ा उद्देश्य दवाओं पर होने वाले लोगों के खर्च को कम करना भी है। सरकार की योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं को कम कीमत पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। दवाओं की खरीद PMBI के माध्यम से होती है और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था भी योजना का हिस्सा है। लोग अपने आसपास के जनऔषधि केंद्र की जानकारी जनऔषधि सुगम माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर राज्य, जिला, पिन कोड और केंद्र कोड के आधार पर नजदीकी केंद्र खोजने की सुविधा उपलब्ध है।

आवेदन कहां करें?

जनऔषधि केंद्र खोलने के इच्छुक लोगों को केवल आधिकारिक स्रोत से ही आवेदन करना चाहिए। PMBI की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘Apply for Kendra’ विकल्प उपलब्ध है और आवेदन की प्रक्रिया तथा दिशानिर्देश वहीं देखे जा सकते हैं।

जनऔषधि की आधिकारिक वेबसाइट और आवेदन पोर्टल

किसी अनधिकृत एजेंट, निजी वेबसाइट या सोशल मीडिया लिंक के माध्यम से आवेदन या भुगतान करने से बचना चाहिए। PMBI की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम दिशा-निर्देशों के आधार पर ही शुल्क, पात्रता, स्थान, प्रोत्साहन और अन्य शर्तों की पुष्टि करनी चाहिए।

रोजगार और जनसेवा का मेल

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना उन लोगों के लिए एक ऐसा अवसर प्रस्तुत करती है जो स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं और साथ ही समाज के लिए उपयोगी सेवा देना चाहते हैं। एक ओर केंद्र संचालक को दवा बिक्री पर निर्धारित मार्जिन और पात्रता के अनुसार प्रोत्साहन मिलता है, वहीं दूसरी ओर आसपास रहने वाले लोगों को अपेक्षाकृत कम कीमत पर आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने का माध्यम तैयार होता है।

आवेदन से पहले जानकारी जरूरी

हालांकि इसे ‘गारंटीड कमाई’ या बिना पूंजी का कारोबार समझना सही नहीं होगा। दुकान की स्थापना, शुरुआती स्टॉक, फार्मासिस्ट, लाइसेंस, किराया और रोजमर्रा के संचालन पर खर्च होता है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने क्षेत्र की दवा मांग, प्रतिस्पर्धा और संभावित बिक्री का व्यावहारिक आकलन करना जरूरी है। सही जानकारी, उचित स्थान, पर्याप्त दवा स्टॉक और नियमों के पालन के साथ जनऔषधि केंद्र रोजगार और जनसेवा—दोनों को जोड़ने वाला व्यवसाय बन सकता है।

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