जगन्नाथ रथयात्रा 2026: पुरी और अहमदाबाद में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

The CSR Journal Magazine
ओडिशा के पुरी और गुजरात के अहमदाबाद में आज भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। दोनों शहरों में लगभग 15-15 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। पुरी में अनुष्ठान सुबह 3 बजे से शुरू होंगे। मंगला आरती का आयोजन सुबह 6 बजे होगा। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर तीन भव्य रथों पर स्थापित किया जाएगा।

रथों की साज-सज्जा: पुरी के गजपति महाराजा की भूमिका

पुरी के राजा गजपति महाराजा रथों को सोने की झाड़ू से साफ करेंगे, जो इस रथयात्रा की एक विशेषता है। इस अनूठी परंपरा का उद्देश्य श्रद्धा और पवित्रता को दर्शाना है। रथयात्रा का मुख्य आकर्षण दोपहर 4 बजे से शुरू होने वाला है, जब श्रद्धालु तीनों रथों को खींचते हुए जगन्नाथ मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर की ओर रवाना होंगे।

अहमदाबाद में रथयात्रा: अमित शाह की उपस्थिति

अहमदाबाद में रथयात्रा की शुरुआत सुबह 4 बजे मंगला आरती से होगी। इस मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। इस साल की रथयात्रा विशेष रूप से सुरक्षा के मामले में महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने माता-पिता से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों की जेब में नाम, पता और मोबाइल नंबर की पर्ची रखवाने का ध्यान रखें। यह कदम सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

हाथियों की विशेष परेड: ‘बाबू’ की वापसी

इस रथयात्रा में कुल 17 हाथियों की भागीदारी होगी। इनमें से एक हाथी है ‘बाबू’, जो पिछले साल की रथयात्रा के दौरान पर्यटकों के बीच चर्चा का विषय बना रहा था। इन हाथियों का रथयात्रा का हिस्सा बनना उत्सव को और रंगीन बना देगा। ऐसे में श्रद्धालुओं को इन हाथियों को देखने का खास मौका मिलेगा।

पंडितों का महत्व: रथयात्रा से जुड़ी सभी रिवाज

जगन्नाथ रथयात्रा में पंडितों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके द्वारा आयोजित धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चारण रथयात्रा की पवित्रता को सुनिश्चित करते हैं। इस दौरान सभी श्रद्धालु भक्ति भाव से जुड़े रहते हैं, जो रथयात्रा के उत्सव का असली आनंद है। भक्तों की आस्था और प्रेम इस धार्मिक आयोजन को हर साल खास बनाता है।

जगन्नाथ रथयात्रा का जादू: श्रद्धा और समर्पण का संगम

रथयात्रा का यह उत्सव न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक संजीवनी का भी प्रतीक है। यह एक मौका है जब लोग अपने धर्म से जुड़ते हैं और एकता का संदेश फैलाते हैं। श्रद्धालुओं की भव्यता और रंग-बिरंगे परिधान इस आयोजन की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। देशभर से आने वाले भक्तों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी इसमें भाग लेते हैं, जिससे यह आयोजन हर वर्ष यादगार बन जाता है।

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