बहुड़ा यात्रा 2026 शुरू: क्यों मानी जाती है उलटी रथ यात्रा सबसे पुण्यदायी? जानिए इसके पीछे की मान्यताएं

The CSR Journal Magazine
ओडिशा के पवित्र धाम पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण बहुड़ा यात्रा शुक्रवार को धार्मिक उत्साह और भक्ति के वातावरण में शुरू हो गया। नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहने के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा अब अपने मूल धाम श्री जगन्नाथ मंदिर की ओर लौट रहे हैं। पारंपरिक वैदिक विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम किए हैं।

क्या है बहुड़ा यात्रा का धार्मिक महत्व?

बहुड़ा यात्रा भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का वापसी पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह केवल देवताओं की घर वापसी नहीं, बल्कि जीवात्मा के अपने मूल आध्यात्मिक धाम की ओर लौटने का प्रतीक भी है। शास्त्रों में बहुड़ा यात्रा के दर्शन को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान के रथ के दर्शन करने और श्रद्धापूर्वक रथ खींचने वाले भक्त को सौ यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

रथ यात्रा की प्रमुख परंपराएं

जगन्नाथ रथ यात्रा कई धार्मिक अनुष्ठानों का संगम है। हर वर्ष भगवान के तीनों रथ विशेष दारु (नीम) की लकड़ी से नए बनाए जाते हैं और इनके निर्माण में लोहे की कीलों का प्रयोग नहीं किया जाता। स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान के ‘अनसर’ काल, गजपति महाराज द्वारा निभाई जाने वाली ‘छेरा पहरा’ परंपरा, गुंडिचा मंदिर की विशेष सफाई तथा हेरा पंचमी जैसे अनुष्ठान इस महोत्सव का अभिन्न हिस्सा हैं। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू हुई यात्रा के बाद भगवान कुछ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहते हैं और फिर बहुड़ा यात्रा के माध्यम से श्रीमंदिर लौटते हैं।

सुना बेष से होगा महोत्सव का समापन

बहुड़ा यात्रा के बाद भगवान की प्रतिमाएं तुरंत गर्भगृह में स्थापित नहीं की जातीं। पहले रथों पर उनका प्रसिद्ध ‘सुना बेष’ (स्वर्ण श्रृंगार) किया जाता है। इसके बाद ‘अधर पाना’ और अंत में ‘नीलाद्री बीजे’ की परंपरा संपन्न होती है, जिसके साथ भगवान पुनः श्रीमंदिर के रत्न सिंहासन पर विराजमान होते हैं। इसी धार्मिक प्रक्रिया के साथ नौ दिवसीय जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव का विधिवत समापन माना जाता है।

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