चेन्नई में इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, बाल-बाल बचे 224 यात्री

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चेन्नई एयरपोर्ट पर इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग: इंजन में आई खराबी, 224 यात्रियों की जान बची

कोलकाता से चेन्नई आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E-723 का बायां इंजन लैंडिंग से ठीक पहले फेल हो जाने के कारण चेन्नई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर फुल इमरजेंसी के बीच विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई, जिससे विमान में सवार सभी 224 यात्रियों और क्रू मेंबर्स की जान बाल-बाल बच गई। यह घटना 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) की देर रात घटित हुई। पायलट की त्वरित सूझबूझ और चेन्नई एयरपोर्ट प्रशासन की मुस्तैदी से एक बड़ा हवाई हादसा टल गया।

आसमान में थमी धड़कनें: चेन्नई एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान का इंजन फेल, सुरक्षित लैंडिंग

मंगलवार देर रात चेन्नई के आसमान में उस समय एक बड़ा विमान हादसा होते-होते रह गया, जब कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरकर चेन्नई आ रहे इंडिगो एयरलाइंस के एक यात्री विमान का बायां इंजन हवा में ही पूरी तरह बंद हो गया। जिस समय यह तकनीकी खराबी आई, विमान चेन्नई हवाई अड्डे पर उतरने के बेहद करीब था। इंजन फेल होने और संभावित तेल रिसाव (ऑयल लीक) की आहट मिलते ही कॉकपिट में चेतावनी के अलार्म गूंज उठे। विमान में सवार चालक दल सहित सभी 224 यात्रियों की सांसें अटक गईं। हालांकि, मुख्य पायलट ने अत्यंत ठंडे दिमाग से काम लिया और तुरंत चेन्नई एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को ‘फुल इमरजेंसी’ का संदेश भेजा। एयरपोर्ट पर तुरंत आपातकालीन रिस्पॉन्स सिस्टम को सक्रिय किया गया और विमान को रात 11:37 बजे रनवे-25 पर सुरक्षित उतार लिया गया। हवाई अड्डा प्रबंधन ने पुष्टि की है कि इस घटना में किसी भी यात्री को खरोंच तक नहीं आई है।

घटनाक्रम: मिनट दर मिनट क्या हुआ?

विमानन अधिकारियों और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, घटना का समयबद्ध ब्यौरा इस प्रकार है। इंडिगो की फ्लाइट 6E-723 ने अपने निर्धारित समय (शाम 09:15 बजे) से लगभग 24 मिनट की देरी से कोलकाता से चेन्नई के लिए उड़ान भरी। शुरुआती सफर पूरी तरह सामान्य रहा। रात 11.25 पर विमान चेन्नई हवाई अड्डे के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ और लैंडिंग एप्रोच (उतरने की प्रक्रिया) शुरू की। विमान अपने तय समय (रात 11:30 बजे) पर पहुंचने ही वाला था। रात 11:28 बजे जब विमान रनवे से कुछ ही मील दूर था, तब पायलट को डैशबोर्ड पर बाएं इंजन (इंजन नंबर 1) के निष्क्रिय (‘Inoperative’) होने और तेल रिसाव का अलर्ट मिला। रात 11:29 बजे पायलट ने बिना एक पल गंवाए ATC को सूचित किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हवाई अड्डे पर तुरंत ‘फुल इमरजेंसी’ (पूर्ण आपातकाल) घोषित कर दिया गया। रात 11:37 बजे फायर टेंडर्स और एम्बुलेंस के घेरे के बीच, विमान ने चेन्नई एयरपोर्ट के रनवे संख्या 25 पर सफलतापूर्वक टचडाउन किया। विमान के सुरक्षित रूप से टैक्सी कर जाने और सभी यात्रियों के पूरी तरह सुरक्षित होने की पुष्टि के बाद फुल इमरजेंसी को वापस ले लिया गया।

एयरपोर्ट पर मची अफरा-तफरी, रनवे के किनारे तैनात हुईं दमकल गाड़ियां

जैसे ही रात 11:29 बजे चेन्नई हवाई अड्डे पर फुल इमरजेंसी का सायरन बजा, पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के तहत हवाई अड्डे के सभी सुरक्षा तंत्रों को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया। विमानन सुरक्षा नियमों के अनुसार, सिंगल इंजन फेलियर के मामले में लैंडिंग के समय विमान के असंतुलित होने या रनवे पर घिसटने से आग लगने का सबसे बड़ा खतरा होता है। चेन्नई एयरपोर्ट अथॉरिटी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आधे दर्जन से अधिक फोम-ब्लास्टिंग फायर टेंडर्स (दमकल गाड़ियां), त्वरित प्रतिक्रिया बल (QRT) और डॉक्टरों की टीमों के साथ कई एम्बुलेंस को रनवे-25 के समानांतर तैनात कर दिया। हवाई अड्डे के नजदीकी अस्पतालों को भी आपातकालीन स्थिति के लिए अलर्ट भेजा गया था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

‘थ्री-ग्रीन’ और पायलट की कुशल तकनीक

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक यात्री विमान (जैसे एयरबस A320/A321, जिसका उपयोग इंडिगो करती है) को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे एक इंजन के पूरी तरह बंद होने पर भी लंबी दूरी तय कर सकते हैं और सुरक्षित लैंड कर सकते हैं। लेकिन, यह सब पायलट के कौशल पर निर्भर करता है। इस घटना में, जब बायां इंजन बंद हुआ, तो विमान लैंडिंग फेज में था, जहां गति और ऊंचाई दोनों कम होती हैं। ऐसी स्थिति में सिंगल-इंजन लैंडिंग सबसे चुनौतीपूर्ण मानी जाती है क्योंकि पायलट को विमान के थ्रस्ट (गति) और एलाइनमेंट (दिशा) को केवल दाहिने इंजन के भरोसे संतुलित करना होता है। पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान की गति को नियंत्रित रखा और बिना किसी बड़े झटके के विमान को रनवे पर लैंड करा दिया, जिसे विमानन क्षेत्र में एक आदर्श ‘इमरजेंसी रिकवरी’ माना जा रहा है।

यात्रियों ने बयां किया आंखों देखा खौफ

विमान से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद यात्रियों के चेहरों पर खौफ साफ देखा जा सकता था। चेन्नई आ रहे एक व्यवसायी यात्री ने बताया, “लैंडिंग से करीब 10 मिनट पहले विमान में अचानक एक तेज झटका महसूस हुआ और केबिन की लाइटें कुछ पलों के लिए टिमटिमाईं। इसके बाद एयरहोस्टेस ने सभी को अपनी सीट बेल्ट कसकर बांधने और आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहने (ब्रेस पोजीशन) का निर्देश दिया। हम सब भगवान का नाम ले रहे थे। जब विमान रनवे पर उतरा और बाहर दमकल गाड़ियों की कतारें देखीं, तब समझ आया कि हम मौत के मुंह से निकलकर आए हैं।” इंडिगो के ग्राउंड स्टाफ ने टर्मिनल पर उतरने के बाद सभी यात्रियों को पानी और जलपान उपलब्ध कराया तथा उनके सामान को प्राथमिकता के आधार पर डिलीवर किया। हवाई अड्डा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस पूरी घटना के दौरान चेन्नई हवाई अड्डे का सामान्य परिचालन बाधित नहीं हुआ और अन्य उड़ानें अपने निर्धारित समय से संचालित होती रहीं।

DGCA ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

इस गंभीर तकनीकी चूक को लेकर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ा रुख अपनाया है। विमान को फिलहाल चेन्नई हवाई अड्डे के आइसोलेशन बे में खड़ा कर दिया गया है और इंडिगो की इंजीनियरिंग टीम के साथ-साथ डीजीसीए के अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। जांच के मुख्य बिंदु निम्नलिखित होंगे-
इंजन इनऑपरेटिव होने का कारण: क्या इंजन में यह खराबी किसी तकनीकी पुर्जे के टूटने से हुई या इसके पीछे ईंधन प्रणाली (फ्यूल सिस्टम) में आई खराबी थी?
ऑयल लीकेज की थ्योरी: शुरुआती रिपोर्टों में आ रहे तेल रिसाव के दावों की सत्यता जांची जाएगी, क्योंकि तेल खत्म होने से इंजन बीच हवा में जाम (Seize) हो सकता है।
रखरखाव (Maintenance) का इतिहास: क्या इस विमान के इंजन की नियमित पीरियोडिक जांच (AOR/C-Check) सही ढंग से की गई थी?

IndiGo ने मानी तकनीकी खराबी की बात

इंडिगो एयरलाइंस ने भी इस संबंध में एक संक्षिप्त बयान जारी कर कहा है कि, “फ्लाइट 6E-723 में चेन्नई एप्रोच के दौरान एक तकनीकी खराबी आई थी। पायलटों ने स्थापित प्रक्रियाओं का पालन करते हुए विमान को सुरक्षित उतारा। हमारे लिए यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। हम नियामक संस्थाओं के साथ जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।” यह घटना देश में विमानन सुरक्षा और एयरलाइंस के परिचालन मानकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसका जवाब DGCA की विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही मिल पाएगा।

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