भारत बना अभेद्य किला! 5000 KM रेंज वाली मिसाइलों का काल बना नया बैलिस्टिक डिफेंस सिस्टम
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने जून 2026 में भारत के मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का लगातार सफल परीक्षण करके एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस सफल परीक्षण के बाद अब भारत 2,000 किलोमीटर से लेकर 5,000 किलोमीटर की दूरी (Intermediate-Range Ballistic Missiles – IRBM) से आने वाली दुश्मन की खतरनाक मिसाइलों को हवा और अंतरिक्ष में ही ट्रैक करके पूरी तरह नेस्तनाबूद करने में सक्षम हो गया है।
नई तकनीक से बढ़ी सुरक्षा क्षमता
भारत ने अब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना करने की तैयारी कर ली है। DRDO ने हाल में 10 और 11 जून को तीन बार फ्लाइट टेस्ट किए, जिसमें मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का प्रदर्शन किया गया। इस तकनीक ने भारत को इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) क्लास खतरों से निपटने की क्षमता दी है। यह प्रणाली दुश्मन की मिसाइलों को लक्ष्यों तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट करने में सक्षम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण की तस्वीरें X अकाउंट पर साझा की हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि भारत ने अपनी रक्षा तकनीक को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है।
DRDO successfully demonstrated a multi-layered Ballistic Missile Defence system and conducted the maiden flight-test of the Naval Anti-Ship Missile–Medium Range, marking a major boost to India’s defence capabilities.
The achievement places India among a select group of nations… pic.twitter.com/3B6GahEGhR
— Ministry of Defence, Government of India (@SpokespersonMoD) June 13, 2026
समुद्री सुरक्षा में भी शानदार प्रदर्शन
टेस्ट के साथ-साथ नेवल एंटी शिप मिसाइल-मीडियम रेंज का भी परीक्षण किया गया। इसे भारत की समुद्री स्ट्राइक और डिफेंस क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इस तकनीक से भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास ऑपरेशनल-लेवल की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता है। पहले ऐसे तकनीक केवल अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास थी, जिससे भारत की ताकत और बढ़ गई है।
ICBM के बारे में
आसान शब्दों में कहें तो इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) एक ऐसी मिसाइल है जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंच सकती है। यह आमतौर पर 5,500 किलोमीटर से लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम होती है और परमाणु हथियार भी ले जा सकती है। यह मिसाइल रॉकेट की तरह ऊपर अंतरिक्ष की ओर जाती है, फिर ऊंचाई से पृथ्वी पर लौटती है और तेज स्पीड से टारगेट पर हमला करती है। इसलिए इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक हथियारों में से एक माना जाता है।
भारतीय सेना की नई ताकत
भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए स्वदेशी रक्षा कंपनी SMPP ने हाल ही में सेना को 106 ‘कामिकाजे’ ड्रोन सौंपे हैं। इन ड्रोन को ‘पीसकीपर (अग्निवेग)’ नाम दिया गया है। ये ड्रोन 180 किलोमीटर की रेंज तक हमला कर सकते हैं और 450 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकते हैं। यह ड्रोन न तो जैमिंग से प्रभावित होते हैं और न ही टारगेट से भटकते हैं। ऐसे में यह भारत की सैन्य शक्ति में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले हैं।
समुद्री सुरक्षा में भी बड़ा धमाका
इस मल्टी-लेयर डिफेंस सिस्टम की जांच के साथ-साथ, भारत ने अपने पहले नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। इससे भारतीय नौसेना की समुद्री मारक और रक्षा क्षमता कई गुना मजबूत हो गई है।
‘एलीट क्लब’ में शामिल हुआ भारत
इस मील के पत्थर को पार करते ही भारत दुनिया के उन गिने-चुने चुनिंदा ‘एलीट’ देशों के क्लब (जैसे अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, और ब्रिटेन) में शामिल हो गया है जिनके पास पूरी तरह से ऑपरेशनल और स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली (BMD) मौजूद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए इसे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है।
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