Carpet Area, Built-up Area और Super Built-up Area का अंतर समझना क्यों है जरूरी?

The CSR Journal Magazine

घर खरीदने जा रहे हैं? जानें Carpet Area, Built-up Area और Super Built-up Area का अंतर!

अपना खुद का घर खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा सपना और निवेश होता है। लेकिन रियल एस्टेट मार्केट में कदम रखते ही आम खरीदार ‘स्क्वायर फीट’ के एक ऐसे मायाजाल में फंस जाता है, जिसे समझे बिना सही डील करना नामुमकिन है। अक्सर लोग अखबारों या ब्रोशर में ‘1000 वर्ग फुट का फ्लैट’ देखकर खुश हो जाते हैं, लेकिन जब कब्जा (Possession) मिलता है, तो घर उम्मीद से काफी छोटा निकलता है।

घर खरीदते समय स्क्वायर फीट का मायाजाल

इस भ्रम की मुख्य वजह Carpet Area, Built-up Area और Super Built-up Area के बीच का अंतर है। अगर आप भी नया घर या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन तीनों टर्म्स को विस्तार से समझना आपके लिए बेहद जरूरी है ताकि आप धोखाधड़ी से बच सकें।

Carpet Area (कार्पेट एरिया): जो सच में आपका है

साधारण शब्दों में कहें तो यह आपके घर का वह वास्तविक क्षेत्र है जहां आप सचमुच रह सकते हैं या फर्श पर कार्पेट (कालीन) बिछा सकते हैं। यह आपके फ्लैट का Net Usable Area होता है जिसमे शामिल होता है बेडरूम, लिविंग रूम, डाइनिंग रूम, किचन, टॉयलेट और फ्लैट के अंदर के स्टोर रूम। इसमे घर की बाहरी और आंतरिक दीवारों की मोटाई, छतों के खंभे (Pillars), और पूरी सोसाइटी का कॉमन एरिया शामिल नहीं होते। RERA (Real Estate Regulatory Authority) कानून के आने के बाद अब डेवलपर्स के लिए विज्ञापन और बिक्री समझौते में सिर्फ और सिर्फ ‘कार्पेट एरिया’ को ही आधार बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। आपको इसी एरिया के पैसे देने चाहिए।

Built-up Area (बिल्ट-अप एरिया): कार्पेट एरिया और दीवारों का जोड़

बिल्ट-अप एरिया वह क्षेत्र है जो कार्पेट एरिया और दीवारों की मोटाई को मिलाकर बनता है। यदि आप अपने फ्लैट की बाहरी दीवारों को चारों तरफ से मापें, तो वह बिल्ट-अप एरिया कहलाएगा। जैसे Carpet Area + दीवारों की मोटाई (Internal & External Walls) + बालकनी + यूटिलिटी स्पेस। यह आमतौर पर कार्पेट एरिया से 10% से 15% तक अधिक होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी फ्लैट का कार्पेट एरिया 800 स्क्वायर फीट है, तो उसका बिल्ट-अप एरिया लगभग 900 से 920 स्क्वायर फीट हो सकता है।

Super Built-up Area (सुपर बिल्ट-अप एरिया): बिल्डर्स का सेल टूल

यह वह शब्द है जो खरीदारों को सबसे ज्यादा भ्रमित करता है। इसे Saleable Area (बिक्री योग्य क्षेत्र) भी कहा जाता है। बिल्डर्स इसी एरिया को ब्रोशर में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखते हैं और पहले इसी के आधार पर फ्लैट की कीमत वसूलते थे। इसमे शामिल होता है आपके फ्लैट का Built-up Area + पूरी सोसाइटी की साझा संपत्तियां (Common Amenities) जैसे लिफ्ट, सीढ़ियां, मुख्य लॉबी, कॉरिडोर, क्लब हाउस, स्विमिंग पूल, सिक्योरिटी रूम और जनरेटर रूम। बिल्डर पूरी सोसाइटी के कॉमन एरिया को सभी फ्लैट्स के आकार के अनुपात में बांटकर आपके फ्लैट के एरिया में जोड़ देते हैं। यह कार्पेट एरिया से 25% से लेकर 40% तक ज्यादा हो सकता है। यानी, अगर सुपर बिल्ट-अप एरिया 1200 स्क्वायर फीट है, तो वास्तविक रहने के लिए आपको केवल 800 से 850 स्क्वायर फीट का कार्पेट एरिया ही मिलेगा।

‘लोडिंग फैक्टर’ क्या है और यह आपकी जेब कैसे काटता है?

सुपर बिल्ट-अप एरिया और कार्पेट एरिया के बीच के इसी अंतर को रियल एस्टेट की भाषा में ‘Loading Factor’ (लोडिंग फैक्टर) कहा जाता है। उदाहरण से समझें: अगर किसी फ्लैट का कार्पेट एरिया 1000 स्क्वायर फीट है और बिल्डर उस पर 30% की लोडिंग लगाता है, तो वह आपको 1300 स्क्वायर फीट का सुपर बिल्ट-अप एरिया बताएगा। यदि लोडिंग 40% से अधिक है, तो इसका मतलब है कि आप साझा सुविधाओं के लिए बहुत ज्यादा पैसा चुका रहे हैं, जबकि आपके अपने फ्लैट के अंदर की जगह कम है।

खरीदारों के लिए RERA गाइडलाइंस और सुरक्षा कवच

बिल्डरों द्वारा सुपर बिल्ट-अप एरिया के नाम पर की जाने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार ने RERA एक्ट लागू किया था। इसके तहत नियम कड़े हैं-
कार्पेट एरिया पर बुकिंग: बिल्डर के लिए अब अनिवार्य है कि वह फ्लैट की कीमत कार्पेट एरिया के आधार पर ही तय करे।
अंतर होने पर रिफंड: यदि कंस्ट्रक्शन के दौरान कार्पेट एरिया में कोई कमी आती है, तो बिल्डर को खरीदार को ब्याज सहित पैसा वापस करना होगा। यदि एरिया बढ़ता है (अधिकतम 3% तक), तो खरीदार को आनुपातिक रूप से अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

घर खरीदते समय इन 4 बातों का रखें खास ध्यान

लिखित में लें कार्पेट एरिया: ब्रोशर के बहकावे में न आएं। बिल्डर से एग्रीमेंट फॉर सेल (Agreement for Sale) में स्पष्ट रूप से कार्पेट एरिया लिखवाएं।
परचेज प्राइस बनाम पर स्क्वायर फीट रेट: हमेशा यह गणना करें कि कार्पेट एरिया के हिसाब से आपको प्रति स्क्वायर फीट क्या रेट पड़ रहा है, न कि सुपर बिल्ट-अप एरिया के हिसाब से।
मेंटेनेंस चार्ज की जांच: कई बार बिल्डर मेंटेनेंस चार्ज सुपर बिल्ट-अप एरिया पर वसूलते हैं। यह पहले ही स्पष्ट कर लें कि हर महीने दी जाने वाली यह राशि किस एरिया पर कैलकुलेट होगी।
साइट विजिट पर खुद नापें: यदि प्रोजेक्ट रेडी-टू-मूव (Ready-to-move) है, तो एक इंच टेप लेकर खुद कमरे की दीवारों के अंदरूनी हिस्से को मापें ताकि आप आश्वस्त हो सकें।

खरीदारी में सावधानी बरतें

घर खरीदते समय हमेशा ध्यान रखें कि आप सिर्फ बड़े आंकड़ों पर न जाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि आपको यह देखना चाहिए कि कौन-सा एरिया आपको वास्तव में रहने के लिए मिल रहा है। घर की खरीदारी एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी है, और सही निर्णय लेना अत्यंत आवश्यक है।

RERA का महत्व और इसके फायदे

RERA कानून की वजह से अब बिल्डरों को कार्पेट एरिया के बारे में सटीक जानकारी देनी होती है, जिससे खरीदार सही निर्णय ले सकें। यह कानून रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता लाने में मदद करता है। ग्राहक जब बिल्डर्स से जानकारी प्राप्त करते हैं, तो उन्हें यह जांचना चाहिए कि दी गई जानकारी सही है या नहीं।

सही चुनाव के लिए सोच-समझकर आगे बढ़ें

घर खरीदना केवल एक निवेश नहीं, बल्कि आपके भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है। सही जानकारी और समझदारी से ही आप एक अच्छे घर में कदम रख पाएंगे। इसलिए, जब आप रियल एस्टेट की मार्केट में कदम रखें, तो पूरी सतर्कता बरतें। सही निर्णय आपके जीवन को खुशहाल बना सकता है।

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