बंगाल बजट: मदरसों की फंडिंग आधे से कम, अल्पसंख्यक फंड पर चली कैंची

The CSR Journal Magazine

बंगाल बजट: मदरसों की फंडिंग आधी, महिलाओं को 33% आरक्षण

पश्चिम बंगाल की नवगठित भाजपा सरकार के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने सोमवार (22 जून 2026) को विधानसभा में राज्य का पहला पूर्ण बजट (वित्त वर्ष 2026-27) पेश किया है। इस बजट में सरकार ने मदरसों और अल्पसंख्यक मामलों के फंड में भारी कटौती की है और महिलाओं के लिए बड़े ऐलानों सहित कई अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।

पश्चिम बंगाल की नई सरकार का पहला बजट

पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने सोमवार को भाजपा सरकार का पहला बजट पेश किया। इस बजट में सरकार ने 1 लाख से अधिक सरकारी पदों को भरने की योजना बनाई है। प्रमुख बात यह है कि महिलाओं के लिए नौकरियों में 33% आरक्षण का ऐलान किया गया है।

मदरसा फंडिंग में कमी

अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा विभाग के लिए फंड को ₹5,713 करोड़ से घटाकर ₹2,165.42 करोड़ कर दिया गया है। यह कदम बजट में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जो शिक्षा और सामाजिक कल्याण के प्रति सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

मदरसा व अल्पसंख्यक बजट कटौती के मुख्य आंकड़े

पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार द्वारा फरवरी में पेश किए गए अंतरिम बजट में अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा शिक्षा के लिए ₹5,713.61 करोड़ का प्रावधान रखा गया था। नई सरकार ने इसे घटाकर अब केवल ₹2,165.42 करोड़ कर दिया है। इस कटौती के जरिए राज्य सरकार ने कुल ₹3,548.19 करोड़ रुपये के आवंटन को कम किया है, जिसका उपयोग अन्य विकास योजनाओं और सरकारी प्राथमिकताओं के लिए किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में लगभग 614 मान्यता प्राप्त सरकारी मदरसे हैं, जिनमें करीब 4.5 लाख छात्र शिक्षा प्राप्त करते हैं। इस कटौती का असर इन संस्थानों के बुनियादी ढांचे और अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं पर पड़ेगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक परिप्रेक्ष्य

भाजपा नेतृत्व ने पहले भी आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती सरकार का अल्पसंख्यक बजट साइंस और रिसर्च (मात्र ₹80-82 करोड़) के मुकाबले काफी असंतुलित था। इस कटौती को नई सरकार की “तुष्टिकरण विरोधी नीति” और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) की ओर एक कदम माना जा रहा है। फंड में कटौती के साथ-साथ, राज्य में बिना पंजीकरण (Unregistered) के चल रहे मदरसों के फंडिंग सोर्स और पाठ्यक्रम (Curriculum) पर भी उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कड़ी निगरानी रखने की तैयारी की जा रही है।

नए एयरपोर्ट की घोषणा

कोलकाता में एक नए एयरपोर्ट के निर्माण की भी घोषणा की गई है, जो राज्य की अवसंरचना को और मजबूत करने में मदद करेगा। इससे न केवल यात्रा सुविधा में वृद्धि होगी, बल्कि पर्यटन और व्यापार में भी तेजी आ सकती है।

पैसे का अन्य प्राथमिकताओं में डायवर्जन

मदरसा बजट से बचाए गए इस फंड और वित्तीय पुनर्गठन का असर बजट की अन्य लोक-कल्याणकारी योजनाओं में साफ दिख रहा है। महिलाओं को ₹3,000 मासिक सहायता देने के लिए ₹36,000 करोड़ का भारी बजट आवंटित किया गया। राज्य कर्मचारियों के DA को 20% बढ़ाकर 38% करने का बड़ा फैसला लिया गया। विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े 1 लाख पदों को तुरंत भरने की घोषणा की गई है।

मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य

राज्य सरकार ने मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाने को अनिवार्य कर दिया है। यह आदेश सरकारी मॉडल और सहायता प्राप्त मदरसों पर लागू होगा। पहले सुबह की प्रार्थना में ‘जन गण मन’ गाया जाता था, अब इसे बदलकर वंदे मातरम किया जाएगा।

सीमा पर बाड़ लगाने की योजना

भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 600 एकड़ जमीन दी जाएगी। यह कदम सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

जनगणना का काम शुरू

राज्य में लंबे समय से रुकी हुई जनगणना को तुरन्त शुरू करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए उठाया गया है।

CAA का लाभ

CAA के तहत आने वाले 7 समुदायों को नागरिकता का लाभ दिया जाएगा। इससे भारत आए लोगों को भी फायदा होगा, और पुलिस उन्हें हिरासत में नहीं ले सकेगी।

हिंसा पीड़ित बीजेपी कार्यकर्ताओं की सहायता

2021 की चुनावी हिंसा में मारे गए 321 बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों को सरकारी नौकरियों और आर्थिक सहायता की पेशकश की जाएगी। यह कदम सरकार की ओर से एक बड़ा सहारा होगा।

धर्म आधारित योजनाओं का बंद

मदरसा विभाग और अन्य धर्मों से जुड़ी वित्तीय सहायता वाली योजनाओं को जून महीने से बंद किया जाएगा। सरकार अब सबके लिए समान योजनाएं चलाएगी। यह निर्णय सभी समुदायों के कल्याण के लिए लंबे समय में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है।

गोहत्या पर सख्त कानून

सरकार ने गोहत्या से जुड़े 1950 के कानून को फिर से लागू करने का निर्णय लिया है। बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के मवेशियों की हत्या पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। यह कानून पशुपालन की सुरक्षा और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।

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