बंगाल में सीमा सुरक्षा तेज: शुभेंदु सरकार ने BSF को सौंपी 142.79 एकड़ भूमि

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बंगाल सरकार ने BSF को सौंपी 142.79 एकड़ जमीन, शुभेंदु बोले- सीमा सुरक्षा में तेजी जरूरी

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 142.79 एकड़ जमीन सौंप दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सीमा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने और अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए पूरी तेजी से काम कर रही है।

सीमाओं की सुरक्षा में नया कदम

पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को फेंसिंग के लिए 142.79 एकड़ जमीन सौंप दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि राज्य सरकार सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेजी से कार्यरत है। इस पहल के तहत BSF चौकियों और तार फेंसिंग के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

कैबिनेट बैठक में लिया गया निर्णय

मुख्यमंत्री के अनुसार, बंगाल सरकार ने 11 मई को हुई पहली कैबिनेट बैठक में 600 एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए BSF को देने का निर्णय लिया था। पहले चरण में 20 मई को पांच जिलों में 43 एकड़ जमीन और 31.9 एकड़ वेस्टेड लैंड की स्वीकृति BSF को दी गई थी।

बंगाल की लंबी सीमा

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,217 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो किसी भी भारतीय राज्य में सबसे लंबी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस जमीन का उपयोग सीमा पर कांटेदार तार की बाड़ (बाड़बंदी) लगाने और नई बीएसएफ सीमा चौकियां (Outposts) बनाने के लिए किया जाएगा। राज्य में अब तक करीब 1,600 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग हो चुकी है, जबकि लगभग 600 किलोमीटर हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है।

फैसले का महत्व और पृष्ठभूमि

सुरक्षा अंतर को भरना– पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,217 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। इसमें से लगभग 1,600 किलोमीटर पर पहले से बाड़ लगी है, लेकिन करीब 600 किलोमीटर हिस्सा बिना बाड़ के (Open Border) था।
अपराधों पर लगाम– मुख्यमंत्री के अनुसार, इस कदम से सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ेगी। इससे मानव तस्करी, मवेशी तस्करी, अवैध घुसपैठ और अन्य सीमा पार अपराधों पर कड़ा नियंत्रण पाया जा सकेगा।
नीति में बदलाव- शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति के कारण जमीन हस्तांतरण रोकने का आरोप लगाया था। नई सरकार ने इसे अपनी शीर्ष प्राथमिकता बनाकर काम शुरू कर दिया है।

डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट

भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संचालन और घुसपैठ नियंत्रण को लेकर कई महत्वपूर्ण कानूनी और सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” (Detect, Delete and Deport) नीति के बाद इन नियमों में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए गए हैं। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के अनुसार सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा ढांचा इस प्रकार काम करता है। पहले पकड़े गए अवैध प्रवासियों को स्थानीय पुलिस थानों और अदालतों में भेजा जाता था, जिससे कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचती थी। अब पुलिस द्वारा पकड़े गए संदिग्ध प्रवासियों को सीधे बीएसएफ (BSF) को सौंप दिया जाता है। BSF इन प्रवासियों को हिरासत में लेकर बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बल (Border Guards Bangladesh – BGB) के साथ समन्वय स्थापित करती है और उन्हें आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सीधे वापस भेजती है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)

इस नीति के तहत केवल उन अवैध प्रवासियों को देश से बाहर किया जा रहा है जो नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के सुरक्षा दायरे या मानदंडों में फिट नहीं बैठते हैं। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के नियमों के तहत पश्चिम बंगाल में बीएसएफ की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए विशेष शक्तियां दी गई हैं। सीमा सुरक्षा बल अधिनियम, 1968 की धारा 139 के तहत बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर भीतर तक लागू है। इस 50 किमी के दायरे के भीतर बीएसएफ को संदिग्धों की तलाशी लेने, अवैध सामग्री जब्त करने और घुसपैठियों को गिरफ्तार करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

अधिनियमों का प्रवर्तन

बीएसएफ मुख्य रूप से पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम 1920, पासपोर्ट अधिनियम 1967, सीमा शुल्क अधिनियम (Customs Act) और एनडीपीएस (NDPS) कानून के तहत सीमा पार अपराधों पर कार्रवाई करती है। संवेदनशील क्षेत्रों, नदीय और दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (Comprehensive Integrated Border Management System) का उपयोग किया जाता है, जिसमें थर्मल इमेजर, रडार और लेजर फेंसिंग शामिल हैं। भूमिगत सुरंगों के जरिए होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए बीएसएफ नियमित रूप से ‘एंटी-टनलिंग अभ्यास’ करती है और ड्रोन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हवाई सर्विलांस नियम लागू हैं। राज्य में नई सरकार के गठन के बाद बीएसएफ और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच संयुक्त सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए नियमित समन्वय बैठकें फिर से शुरू की गई हैं।

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