राम मंदिर चढ़ावा चंदा चोरी मामले में बड़ा खुलासा, संगठित गिरोह का खेल

The CSR Journal Magazine
अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे में हुई चोरी के मामले में दिलचस्प जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान पता चला है कि यह मामला एक सुनियोजित संगठित गिरोह का था। हर आरोपी की भूमिका दिन की शुरुआत में ही तय कर ली जाती थी। CCTV फुटेज में विभिन्न आरोपी, जैसे कि अविनाश शुक्ला और मनीष, 70 बार चोरी करते हुए नजर आए हैं।

कैसे होती थी चोरी की प्लानिंग

सूत्रों के अनुसार, चोरियों की योजना सुबह ही फोन पर बना ली जाती थी। इसमें यह तय किया जाता था कि कौन कैमरे के सामने होगा और कितने नोट उड़ाए जाएंगे। इससे साबित होता है कि यह एक संगठित योजना थी जहां हर व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट रूप से निर्धारित थी।

CCTV फुटेज में खुलासा

CCTV फुटेज में देखा गया कि अविनाश शुक्ला और मनीष कई बार पैसों को छिपाते हुए नजर आए। अन्य आरोपी जैसे कि अनुकल्प, करुणेश और लवकुश इस दौरान कैमरे के सामने खड़े रहे ताकि उनकी हरकतों का रिकॉर्ड न हो सके। यह फुटेज आरोपियों के कबूलनामे को भी सही ठहराता है।

अविनाश की प्रमुखता

गिरोह के सदस्यों ने अविनाश शुक्ला को चोरी करने की जिम्मेदारी दी थी। वह CCTV में सबसे अधिक बार चोरी करते हुए देखने को मिला। अविनाश ने पूछताछ में बताया कि पैसों को पार करने की जिम्मेदारी भी उसी को दी जाती थी।

चोरी के पैसे का बंटवारा

जांच में पता चला कि चोरी के पैसों को सभी शामिल लोगों में बराबर बांटा जाता था। हालांकि, कभी-कभी अविनाश को ज्यादा हिस्सा मिला करता था। SIT की रिपोर्ट के अनुसार, मात्र 40 दिन में 70 बार चोरियां की गई थीं।

फुटेज डिलीट करने के आरोप

पुलिस को शक है कि आरोपियों का CCTV कंट्रोल रूम तक पहुंच था, जिसके चलते कुछ फुटेज डिलीट की गई। इसमें सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव भी चोरी के समय उपस्थित दिखाई देते हैं। ऐसे में उनसे पूछताछ की जाएगी कि उन्हें चोरी की जानकारी थी या नहीं।

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