प्रियंका गांधी के बयान पर बढ़ा बवाल, विरोध में 14,000 से अधिक लोगों ने किए हस्ताक्षर

The CSR Journal Magazine

प्रियंका गांधी के बयान के खिलाफ जमकर बही बयानों की लहर, 14,000 से अधिक हस्ताक्षर

IIT Madras के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि के खिलाफ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा संसद में की गई एक टिप्पणी को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान प्रोफेसर कामकोटि को कथित तौर पर ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहे जाने के खिलाफ अकादमिक और वैज्ञानिक समुदाय ने मोर्चा खोल दिया है। इस विवादित संदर्भ की निंदा करने वाली एक ऑनलाइन याचिका (Change.org) पर अब तक 14,000 से अधिक सत्यापित हस्ताक्षर एकत्र किए जा चुके हैं।

संसद से शुरू हुआ था विवाद

यह पूरा मामला 28 जुलाई, 2026 का है, जब लोकसभा में ‘पब्लिक एक्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल 2026’ (एंटी-पेपर लीक बिल) पर चर्चा चल रही थी। चर्चा में भाग लेते हुए वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार द्वारा गठित परीक्षा सुधार पैनल में प्रोफेसर कामकोटि की मौजूदगी पर तंज कसा था। उन्होंने कथित रूप से कहा था कि नई कमेटी में एक ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ शामिल है, जिसे शिक्षा व्यवस्था के बारे में कुछ नहीं पता।

वैज्ञानिक और अकादमिक जगत में भारी आक्रोश

1 अगस्त से शुरू हुई इस याचिका को देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। दुनिया के लगभग 38 से अधिक देशों में कार्यरत भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने भी इस अभियान पर अपने हस्ताक्षर कर प्रियंका गांधी के बयान पर आपत्ति जताई है। हस्ताक्षरकर्ताओं और शिक्षाविदों का तर्क है कि प्रोफेसर वी. कामकोटि का कंप्यूटर आर्किटेक्चर, साइबर सुरक्षा और ‘शक्ति’ (SHAKTI) प्रोजेक्ट के तहत स्वदेशी प्रोसेसर विकसित करने में उत्कृष्ट राष्ट्रीय योगदान रहा है। याचिका में कहा गया है कि किसी सम्मानित वैज्ञानिक और शिक्षक को तार्किक बहस के बजाय इस तरह के अपमानजनक लेबल देकर उनका उपहास उड़ाना संसदीय गरिमा और देश के वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) को कमजोर करता है। इससे पहले, देश भर के 215 वर्तमान और पूर्व कुलपतियों तथा प्रख्यात शिक्षाविदों ने भी प्रियंका गांधी को एक खुला पत्र लिखकर इस व्यक्तिगत टिप्पणी पर गहरी निराशा व्यक्त की थी।

लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित इस याचिका में दो मुख्य मांगें की गई हैं-
लोकसभा अध्यक्ष अकादमिक और वैज्ञानिक समुदाय की इस गंभीर चिंता का संज्ञान लें।
संबंधित महिला सांसद अपने इस अपमानजनक शब्द को वापस लें और गरिमापूर्ण संसदीय संवाद की मर्यादा को बहाल करने के लिए खेद प्रकट करें।

प्रतिक्रिया का इंतजार

याचिकाकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल, सरकार या विचारधारा के बचाव में नहीं है, बल्कि भारत के शिक्षकों, वैज्ञानिकों और अकादमिक संस्थानों की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए एक नागरिक अपील है। समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस पार्टी या प्रियंका गांधी की ओर से इस हस्ताक्षर अभियान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos