AYUSH: भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपराओं का आधुनिक स्वास्थ्य मॉडल

The CSR Journal Magazine

AYUSH: परंपरा विज्ञान और समग्र स्वास्थ्य का अद्भुत संगम- बीमारी का ईलाज नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली पर जोर

आयुष (AYUSH) भारत की समृद्ध पारंपरिक चिकित्सा विरासत का ऐसा व्यापक मंच है, जिसके अंतर्गत आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) और सोवा-रिग्पा जैसी स्वास्थ्य प्रणालियों को एक साथ लाया गया है। इन सभी चिकित्सा पद्धतियों का मूल उद्देश्य केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, रोगों की रोकथाम, मानसिक एवं शारीरिक संतुलन तथा समग्र (Holistic) स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय इन सभी प्रणालियों के विकास, शिक्षा, अनुसंधान, गुणवत्ता सुधार तथा वैश्विक स्तर पर इनके प्रचार-प्रसार का कार्य करता है। मंत्रालय का गठन वर्ष 2014 में किया गया था, जबकि इसकी शुरुआत 1995 में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों एवं होम्योपैथी विभाग के रूप में हुई थी।

AYUSH का अर्थ क्या है?

AYUSH एक संक्षिप्त रूप (Acronym) है, जिसमें शामिल हैं—
A – Ayurveda (आयुर्वेद): लगभग पाँच हजार वर्ष पुरानी भारतीय चिकित्सा प्रणाली, जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है। इसमें आहार, दिनचर्या, औषधीय पौधों, पंचकर्म तथा प्राकृतिक उपायों के माध्यम से स्वास्थ्य बनाए रखने पर विशेष बल दिया जाता है।
Y – Yoga (योग): योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि जीवन जीने की एक वैज्ञानिक पद्धति है। इसमें आसन, प्राणायाम, ध्यान और मानसिक अनुशासन के माध्यम से शरीर एवं मन को स्वस्थ रखने का प्रयास किया जाता है। तनाव, मोटापा, मधुमेह तथा जीवनशैली से जुड़ी अनेक समस्याओं के प्रबंधन में योग की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
U – Unani (यूनानी): यूनानी चिकित्सा शरीर के प्राकृतिक संतुलन और चार मूल द्रवों (Humours) के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें औषधियों, आहार और जीवनशैली सुधार के माध्यम से उपचार किया जाता है।
S – Siddha (सिद्ध): दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में विकसित यह प्राचीन चिकित्सा प्रणाली औषधीय जड़ी-बूटियों, खनिजों तथा योग पर आधारित है और संपूर्ण स्वास्थ्य पर बल देती है।
H – Homoeopathy (होम्योपैथी): यह चिकित्सा प्रणाली “समरूप समरूप का उपचार करता है” (Like Cures Like) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में औषधियों का उपयोग किया जाता है।
Naturopathy (प्राकृतिक चिकित्सा): प्राकृतिक चिकित्सा में शरीर की स्वयं स्वस्थ होने की क्षमता को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक आहार, जल चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, व्यायाम तथा जीवनशैली सुधार का उपयोग किया जाता है।
Sowa-Rigpa (सोवा-रिग्पा): हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलित यह पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली तिब्बती चिकित्सा ज्ञान पर आधारित है और औषधीय पौधों, आहार तथा प्राकृतिक उपचारों का समन्वय करती है।

आयुष का उद्देश्य

आयुष का प्रमुख उद्देश्य लोगों को केवल बीमारी होने पर उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। यह प्रणाली रोकथाम (Preventive Healthcare), स्वास्थ्य संवर्धन (Promotive Healthcare), प्राकृतिक जीवनशैली, संतुलित भोजन, नियमित योग, मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण पर विशेष बल देती है। सरकार आयुष के माध्यम से आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वित स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा दे रही है।

अनुसंधान और शिक्षा पर विशेष ध्यान

आयुष मंत्रालय देशभर में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा तथा सोवा-रिग्पा से संबंधित शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान परिषदों, अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से इन चिकित्सा प्रणालियों को मजबूत बना रहा है। औषधियों की गुणवत्ता, मानकीकरण, वैज्ञानिक अध्ययन तथा नई पीढ़ी तक पारंपरिक ज्ञान पहुंचाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की सफलता के बाद विश्वभर में योग और आयुर्वेद के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ी है। भारत सरकार आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में उचित स्थान दिलाने के लिए विभिन्न देशों एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग कर रही है। पारंपरिक चिकित्सा के मानकीकरण और वैश्विक स्वीकार्यता की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।

संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली, योग, व्यायाम और कुछ पारंपरिक उपाय कई लोगों के लिए लाभदायक हो सकते हैं। वहीं, गंभीर या आपातकालीन बीमारियों के उपचार के लिए प्रमाण-आधारित आधुनिक चिकित्सा (Evidence-based Medicine) आवश्यक रहती है। आयुष संबंधी कई उपचारों पर वैज्ञानिक अनुसंधान जारी है और विभिन्न प्रणालियों के लिए उपलब्ध साक्ष्य का स्तर अलग-अलग है। इसलिए किसी भी चिकित्सा पद्धति या औषधि को अपनाने से पहले योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक की सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

परंपरा, विज्ञान और समग्र स्वास्थ्य का अद्भुत संगम

आयुष भारत की हजारों वर्षों पुरानी चिकित्सा परंपरा और आधुनिक स्वास्थ्य सोच का संगम है। आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा-रिग्पा जैसी प्रणालियां लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों की रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सरकार का उद्देश्य इन पारंपरिक प्रणालियों को वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता और शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना तथा “स्वस्थ भारत” के निर्माण में उनकी उपयोगिता को बढ़ाना है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos