रसोई से औषधि तक: करी पत्ता केवल स्वाद नहीं, स्वास्थ्य का भी खजाना; आयुष मंत्रालय ने बताए इसके चमत्कारी औषधीय गुण
भारतीय रसोई में तड़के की सुगंध बढ़ाने वाला करी पत्ता (Murraya koenigii) अब केवल स्वाद का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण का एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोत भी माना जा रहा है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) ने अपने अभियान “आज का औषधीय पादप” के तहत करी पत्ते को विशेष रूप से प्रस्तुत करते हुए इसके औषधीय, पोषणीय और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डाला है।
आयुष मंत्रालय का संदेश: करी पत्ता अपनाएं, प्राकृतिक स्वास्थ्य और बेहतर जीवन पाएं
आयुष मंत्रालय का उद्देश्य देश में औषधीय पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा लोगों को प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इसी दिशा में करी पत्ते को एक ऐसे औषधीय पौधे के रूप में सामने लाया गया है जो भारतीय रसोई में सहज उपलब्ध होने के साथ-साथ अनेक स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है।
क्या है करी पत्ता?
करी पत्ता, जिसका वैज्ञानिक नाम Murraya koenigii है, एक बारहमासी (Perennial) सुगंधित वृक्ष है। यह मुख्यतः भारत, श्रीलंका तथा दक्षिण एशिया के अन्य क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी पत्तियों में विशिष्ट सुगंध होती है, जिसके कारण यह भारतीय व्यंजनों, विशेषकर दक्षिण भारतीय भोजन में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर पौधा माना गया है। इसकी पत्तियों में अनेक जैव सक्रिय तत्व (Bioactive Compounds), एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, खनिज और आवश्यक तेल पाए जाते हैं जो शरीर के विभिन्न अंगों के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
आयुष मंत्रालय ने बताए प्रमुख औषधीय उपयोग
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड द्वारा जारी जानकारी के अनुसार करी पत्ते का पारंपरिक चिकित्सा में निम्नलिखित समस्याओं के लिए उपयोग किया जाता रहा है—
1. भूख बढ़ाने और पाचन सुधारने में सहायक– करी पत्ता पाचन तंत्र को सक्रिय करने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह भूख बढ़ाने, गैस, अपच तथा पेट की सामान्य समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
2. त्वचा रोगों में पारंपरिक उपयोग– करी पत्ते का उपयोग कई पारंपरिक उपचारों में त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है। इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक यौगिक त्वचा की देखभाल में सहायक माने जाते हैं।
3. कृमि रोग (पेट के कीड़ों) में उपयोग– आयुर्वेदिक ग्रंथों में करी पत्ते का उपयोग आंतों के कृमियों की समस्या में भी वर्णित है। हालांकि किसी भी चिकित्सकीय उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।
4. जलन की अनुभूति कम करने में सहायक– शरीर में होने वाली जलन या गर्मी की अनुभूति को कम करने के लिए भी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में करी पत्ते का उपयोग किया जाता रहा है।
उपयोगी भाग – केवल पत्तियाँ
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के अनुसार इस पौधे का सबसे अधिक उपयोग इसकी पत्तियों का किया जाता है। इन्हें ताजा या सुखाकर विभिन्न प्रकार से उपयोग में लाया जाता है।
पोषण का भी उत्कृष्ट स्रोत
करी पत्ते में अनेक महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
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विटामिन A
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विटामिन B समूह
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विटामिन C
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विटामिन E
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कैल्शियम
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आयरन
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फॉस्फोरस
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मैग्नीशियम
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फाइबर
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प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट
इन्हीं कारणों से इसे संतुलित आहार का एक उपयोगी हिस्सा माना जाता है।
आयुर्वेद में विशेष महत्व
आयुर्वेद में करी पत्ते को शरीर के दोषों के संतुलन में सहायक माना गया है। इसका उपयोग विभिन्न पारंपरिक औषधीय तैयारियों में किया जाता है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा के विकल्प के रूप में इसका उपयोग बिना विशेषज्ञ सलाह के नहीं करना चाहिए।
घर में आसानी से उगाया जा सकता है
राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपने घर, रसोई बगीचे या छत पर करी पत्ते का पौधा लगाना चाहता है तो मई और जून का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। खेती के लिए आवश्यक बातें-
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अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी।
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पर्याप्त धूप।
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नियमित लेकिन सीमित सिंचाई।
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जैविक खाद का उपयोग।
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समय-समय पर छंटाई।
एक बार पौधा स्थापित हो जाने के बाद कई वर्षों तक लगातार पत्तियाँ प्राप्त होती रहती हैं।
रसोई में उपयोग
भारतीय भोजन में करी पत्ते का उपयोग अनेक प्रकार से किया जाता है—
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दाल
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सांभर
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रसम
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उपमा
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पोहा
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चटनी
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कढ़ी
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सब्जियाँ
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मसाला तड़का
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नारियल आधारित व्यंजन

