राम मंदिर चंदा चोरी: जीजा-साले का महापाप, महाकुंभ में उड़ाया राम मंदिर का चढ़ावा, ED ने कसा शिकंजा

The CSR Journal Magazine

राम मंदिर चंदा चोरी: महाकुंभ के दौरान हुई सबसे बड़ी चोरी, जीजा-साले की जोड़ी ने किया महापाप, अब ED भी करेगी जांच

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है कि मंदिर के काउंटिंग रूम में तैनात जीजा-साले की जोड़ी (लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा) ने मिलकर सबसे बड़ी चोरी को अंजाम दिया है। पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, चोरी की गई इस बड़ी रकम का एक बड़ा हिस्सा महाकुंभ के दौरान उड़ाया गया था, और अब इस पूरे वित्तीय हेरफेर के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

महाकुंभ के दौरान हुई चोरी का खुलासा

महाकुंभ के दौरान अयोध्या में राम मंदिर से बड़ी मात्रा में चंदा चोरी होने की घटना सामने आई है। यह जानकारी अयोध्या पुलिस की जांच में मिली है। पुलिस के अनुसार, जीजा-साले की जोड़ी लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा ने इस चोरी को अंजाम दिया। इन दोनों ने मिलकर बहुत सी संपत्तियां भी खरीदीं, जो चोरी के पैसों से हासिल की गई थीं। यह घटना एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।

जीजा-साले की मास्टरमाइंड जोड़ी

मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा और उसका साला अनुकल्प मिश्रा मंदिर के कैश काउंटिंग रूम से जुड़े थे। पुलिस का दावा है कि इस जोड़ी ने बाकी आरोपियों के साथ मिलकर सबसे ज्यादा रकम की चोरी की। जांच के दौरान सामने आया है कि चोरी के पैसों से इस जोड़ी ने कई बेनामी संपत्तियां खरीदीं। अब तक पुलिस को दोनों से जुड़ी आधा दर्जन से ज्यादा संपत्तियों की जानकारी मिल चुकी है। चोरी की गई रकम से बड़े पैमाने पर प्रॉपर्टी खरीदने और मनी लॉन्ड्रिंग के इनपुट मिलने के बाद, अब केंद्रीय एजेंसी ED भी इस मामले के वित्तीय ट्रेल को खंगालने की तैयारी में है।

आरोपियों की गिरफ्तारी और संपत्तियों की जांच

इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से कुछ आरोपी कुंभ के पहले भी चोरी के छोटे-मोटे मामलों में शामिल थे। लेकिन कुंभ के दौरान चढ़ावे और दान की रकम में भारी वृद्धि ने आरोपियों को मौका दिया और उन्होंने मिलकर बड़ी चोरी की योजना बनाई। पुलिस का कहना है कि यह संपूर्ण साजिश सभी 8 आरोपियों ने मिलकर तैयार की थी, जिसके चलते लवकुश और अनुकल्प का हाथ सबसे ज्यादा रहा।

चोरी के धन का इस्तेमाल और संपत्तियों की बढ़ती संख्या

पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि लवकुश और अनुकल्प मिश्रा ने चोरी की रकम का इस्तेमाल कर कई संपत्तियां खरीदीं। अयोध्या पुलिस के पास इन दोनों से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक संपत्तियों की जानकारी है। इस मामले की जांच में आयकर विभाग की मदद भी ली जाएगी, क्योंकि आरोपियों के वित्तीय लेन-देन की पूरी पड़ताल करना आवश्यक है।

बैंक कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका

जांच के दौरान अयोध्या पुलिस को यह भी संदेह है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। पुलिस अब इस मामले की गहराई तक पहुंचने के लिए सभी एंगल्स पर ध्यान दे रही है, ताकि स्पष्ट हो सके कि ये बड़े पैमाने पर चोरी कैसे हुई और किस-किस की इसमें भागीदारी रही।

मनी ट्रेल की खोज

अयोध्या पुलिस इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और उन्होंने ईडी को पत्र लिखकर इस मामले की गहन जांच शुरू करने का अनुरोध किया है। पुलिस का उद्देश्य मनी ट्रेल का पता लगाना और वित्तीय लेन-देन के सभी पहलुओं को समझना है। चोरों के पास से मिली नकदी का एक बड़ा हिस्सा अविनाश शुक्ला की निशानदेही पर बरामद हुआ है। इससे पुलिस को और भी सुराग मिले हैं।

ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल

इस चोरी की घटना ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। जांच की आंच चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे ट्रस्ट के अन्य सदस्यों तक भी पहुँच गई है। अयोध्या पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है ताकि सही तथ्य सामने आ सकें और सच्चाई का पर्दाफाश किया जा सके।

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