केजरीवाल ने शुरू किया स्टॉप E20 पेट्रोल अभियान, पीएम मोदी को लिखा पत्र

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‘स्टॉप E20 पेट्रोल’… अरविंद केजरीवाल ने शुरू किया ऑनलाइन सिग्नेचर अभियान, सरकार से की अपील

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने देश में जबरन लागू किए जा रहे E20 पेट्रोल के खिलाफ एक देशव्यापी ऑनलाइन सिग्नेचर अभियान “स्टॉप E20 पेट्रोल” (StopE20petrol.com) शुरू किया है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा है और उनसे मिलने का समय मांगा है।

अरविंद केजरीवाल का नया अभियान

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आज “स्टॉप E20 पेट्रोल” ऑनलाइन सिग्नेचर अभियान का ऐलान किया। यह अभियान StopE20petrol.com पर चलाया जा रहा है, जहां लोग अपनी समस्याएं व्यक्त कर सकते हैं। केजरीवाल ने कहा कि सरकार को लोगों की चिंताओं का सम्मान करना चाहिए और उन्हें विकल्प प्रदान करना चाहिए। उनके अनुसार, E20 पेट्रोल को लेकर जनहित में उठाए गए इस कदम का उद्देश्य सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।

E20 पेट्रोल पर उठे सवाल

केजरीवाल ने कहा कि बिना किसी तैयारी के E20 पेट्रोल को लागू करना सही नहीं है। हाल ही में कई वाहन मालिकों ने शिकायत की है कि E20 पेट्रोल के कारण उनके वाहनों का माइलेज घट रहा है और इंजन में खराबी आ रही है। इसके बावजूद सरकार सिर्फ सामान्य स्थिति को बताने में लगी हुई है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

ईंधन के विकल्प की मांग

सरकार से अपील की गई है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को केवल E20 पेट्रोल खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए। इसके बजाय, वाहन मालिकों को शुद्ध पेट्रोल (E0), E10 और E20 तीनों तरह के ईंधन चुनने का पूरा विकल्प मिलना चाहिए।

कीमतें कम करने की अपील

केजरीवाल का तर्क है कि एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल की ऊर्जा क्षमता कम होती है, जिससे वाहनों का माइलेज घट जाता है। इसलिए, उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले दोहरे वित्तीय बोझ को कम करने के लिए E20 पेट्रोल की कीमतें सामान्य पेट्रोल से काफी कम की जानी चाहिए।

वाहनों को नुकसान की शिकायतें

उन्होंने हाल ही में दिल्ली के पेट्रोल पंपों और सर्विस स्टेशनों का दौरा किया था। केजरीवाल ने दावा किया कि वाहन मालिकों और मैकेनिकों से बातचीत के दौरान माइलेज में भारी गिरावट, फ्यूल पंप जाम होने, इंजेक्टर खराब होने और इंजन में खराबी आने जैसी कई गंभीर समस्याएँ सामने आई हैं।

जनता की आवाज़ को सुनना जरूरी

अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सुनना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने मोदी सरकार का नाम लेते हुए कहा कि यह सरकार ग्राहकों को विकल्प देने में असमर्थ है। लोग पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 का विकल्प देना चाहते हैं, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही।

प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस अभियान में भाग लें और StopE20petrol.com पर जाकर हस्ताक्षर करें। उनका कहना है कि यह अभियान E20 के खिलाफ एकजुट होने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। लोग अपने अनुभव भी साझा कर सकते हैं और इस संदेश को फैलाने में मदद कर सकते हैं।

सरकार से विकल्प की मांग

केजरीवाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर सरकार को E20 पेट्रोल लागू करना है, तो लोगों को शुद्ध पेट्रोल और E20 दोनों का विकल्प दिया जाना चाहिए। इससे लोग अपनी आवश्यकता के अनुकूल ईंधन चुन सकेंगे। केजरीवाल ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जनता की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

एथेनॉल पर क्यों  है बवाल

E20 पेट्रोल (यानी 80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल का मिश्रण) का पूरा मामला वर्तमान में देश की ईंधन नीति, वाहन चालकों की जेब और राजनीति के बीच छिड़ा एक बड़ा विवाद है। एक तरफ सरकार इसे देशहित और पर्यावरण के लिए जरूरी बता रही है, तो दूसरी तरफ आम जनता और विपक्षी दल गाड़ियों को हो रहे नुकसान और माइलेज गिरने का दावा कर रहे हैं।

विवाद की मुख्य वजह

उपभोक्ताओं का दावा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज अचानक बहुत कम हो गया है। इससे ईंधन की खपत बढ़ गई है। एथेनॉल प्रकृति में संक्षारक (Corrosive) होता है और नमी सोखता है। इसके कारण पुरानी गाड़ियों के फ्यूल पंप, इंजेक्टर जाम होने, पाइप गलने और इंजन में अत्यधिक वाइब्रेशन या नॉकिंग जैसी समस्याएँ आ रही हैं। अरविंद केजरीवाल का दावा है कि देश में लगभग 22 करोड़ बाइक और 8 करोड़ कारें ऐसी हैं जो इस ईंधन के अनुकूल नहीं हैं और जबरन इस्तेमाल से कबाड़ बन सकती हैं। पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को कोई विकल्प नहीं दिया जा रहा है। एथेनॉल की उत्पादन लागत कच्चे तेल से कम है, लेकिन पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने के बाद भी इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल जितनी ही वसूली जा रही है।

केंद्र सरकार का रुख और तर्क

केंद्रीय मंत्रियों (नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार का पक्ष रखा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण भारत को अब तक लगभग 310 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम करना पड़ा है, जिससे ₹1.9 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची है। एथेनॉल का उत्पादन गन्ने, मक्का और कृषि अवशेषों से होता है। आयात की जो रकम विदेशों में जाती थी, उसका एक बड़ा हिस्सा अब देश के किसानों के पास जा रहा है। E20 ईंधन से चलने वाले वाहनों में कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है, जो भारत के नेट-जीरो और स्वच्छ पर्यावरण के लक्ष्यों के अनुकूल है।

नुकसान के दावों को चुनौती

नितिन गडकरी ने स्पष्ट कहा है कि E20 ईंधन को ARAI (Automotive Research Association of India) द्वारा गहन परीक्षण के बाद ही लागू किया गया है। सरकार का दावा है कि गाड़ियों के खराब होने की वजह ईंधन में मिलावट हो सकती है, न कि एथेनॉल। सरकार मानती है कि पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल का कैलोरी मान (ऊर्जा क्षमता) कम होता है, जिससे माइलेज में 3% से 5% की मामूली गिरावट आ सकती है, लेकिन 30% या 40% गिरावट के दावे पूरी तरह गलत हैं।

वर्तमान स्थिति- अनिवार्यता बरकरार

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि E20 पेट्रोल ही देश का स्टैंडर्ड ईंधन रहेगा और पेट्रोल पंपों पर अलग से शुद्ध पेट्रोल (E0) बेचने की कोई योजना नहीं है। E20 से बचने के लिए कई लोग अब महंगे ‘प्रीमियम पेट्रोल’ (जैसे XP95 या स्पीड) की तरफ रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। अरविंद केजरीवाल द्वारा शुरू किए गए StopE20Petrol.com अभियान और कार निर्माता कंपनियों को लिखे गए पत्रों ने इस तकनीकी मुद्दे को अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप दे दिया है, जिससे सरकार पर नीति की समीक्षा करने का दबाव बढ़ रहा है।

कार्यक्रम का लक्ष्य और अपील

“स्टॉप E20 पेट्रोल” अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों की चिंताओं को उठाना है। केजरीवाल ने देशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान में शामिल हों और StopE20petrol.com पर जाकर हस्ताक्षर करें, ताकि सरकार को बिना तैयारियों के E20 पेट्रोल थोपने से रोका जा सके। अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और देश की जनता से अपील की है कि वे इस ऑनलाइन सिग्नेचर अभियान से जुड़ें और वाहनों को होने वाले नुकसान के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करके सरकार पर दबाव बनाएँ।

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